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कृषि कर्चा रोका स्टेट बैंक ने

भारतीय स्टेट बैंक ने ट्रैक्टर तथा अन्य कृषि उपकरणों के लिए ऋण की सुविधा रोक दी है। बैंक के इस कदम से देश के कृषि क्षेत्र पर बुरा असर पड़ सकता है।ड्ढr स्टेट बैंक ने अपनी सभी शाखाओं को भेजे सकरुलर में कहा है कि ट्रैक्टर, पॉवर टिलर और कम्बाइन हाव्रेस्टर समेत विभिन्न कृषि उपकरणों के लिए वित्तीय सुविधा तत्काल प्रभाव से रोक दी जाए। बैंक का कहना है कि इस क्षेत्र में बकाया राशि 17 फीसदी से ज्यादा हो गई है। खास तौर पर ट्रैक्टर के लिए लोन लेने वाले किसानों ने काफी बकाया कर रखा है। इसीलिए बैंक ने अस्थायी रूप से कर्ज का वितरण रोका है। बकाया वसूली की प्रगति के आधार पर इस फैसले की समीक्षा की जाएगी। कृषि क्षेत्र केन्द्र सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल है। सरकार ने इससे पहले किसानों के 60,000 करोड़ रुपए के कर्ज माफ करने की घोषणा की थी। वित्त मंत्री पी. चिदम्बरम ने विपदा के मार किसानों के लिए ऋण राहत योजना का एलान किया था। इस साल जनवरी में स्टेट बैंक के शेयर की कीमत 2,540 रुपए थी जो अब गिरकर 1,704 रुपए रह गई है। बैंक ने अपनी शाखाओं से कहा है कि वे ट्रैक्टर डीलरों के संपर्क में रहें और ट्रैक्टर लेने वाले किसानों का ब्योरा जुटाएँ। इसके अलावा किसानों को सरकार की ऋण राहत योजना के फायदे के बार में समझाएँ।ड्ढr एक साल पहले स्टेट बैंक की गैर क्रियाशील पूँजी (एनपीए)10,000 करोड़ रुपए थी जो इस वर्ष मार्च के अंत तक बढ़कर 12,800 करोड़ हो गई। बैंक के प्रवक्ता ने मुम्बई से फोन पर बताया कि ट्रैक्टर फाइनेंसिंग में एनपीए बढ़ते-बढ़ते17 फीसदी तक पहुँच गई है, इसलिए कुछ समय के लिए यह फैसला करना पड़ा है। यह पूछने पर एनपीए का स्वीकार्य स्तर क्या है, प्रवक्ता ने कहा, ‘ऐसा कोई तयशुदा स्तर नहीं है। जब हम राहत महसूस करंगे, फिर कृषि ऋण देना शुरू कर देंगे।’

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