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जवानों में बीमारी का ग्राफ चिंताजनक

आंतरिक सुरक्षा की जिम्मेवारी संभाल रहे सीआरपीएफ जवानों में बीमारियों और आत्महत्या के आंकड़े चौकाने वाले हैं। जवानों के स्वास्थ्य को लेकर सीआरपी एफ द्वारा कराये गए हाल के अंदरुनी सव्रेक्षण से उाागर हुआ है कि बीहड़, दुर्गम और जोखिम भर ठिकानों पर तैनात फोर्स के जवानों की बीमारियों में सौ फीसदी तक इजाफा हुआ है। जवानों में बढ़ती बीमारियों के लिए सव्रेक्षण में जो तथ्य सामने आए उनमें पहला नम्बर परिवार से उनका दूर रहना है। अपर्याप्त आवासीय व्यवस्था,भाग-दौड़,ाीवन का खतरा,इन खतरों के लिए कम मुआवजा , विपरीत परिस्थतियों में लंबे समय तक तैनाती, रहने का खराब इंतजाम और जरूरी सुविधाओं का अभाव प्रमुख कारण हैं। जवानों में पनपते असंतोष पर फोर्स के सूत्रों ने जो अन्य कारण गिनाये उनमें जरुरत पड़ने पर,यहां तक कि आपात स्थिति में भी कई दफा छुट्टी नहीं मिलने, तबादला नीति और जवानों के प्रति कमाण्डेंट का रूखा व्यवहार भी शामिल है। जवानों में आत्महत्या की बढ़ती प्रवृत्ति के लिए उठाये गए तमाम कदम बेअसर साबित हो रहे हैं। तनाव और असंतोष के कारण अनेक जवान नौकरी से तौबा करने को मजबूर हैं। आत्महत्या के ताजा आंकड़े पुलिस संगठनों में पनप रहे असंतोष के सबूत हैं। 2005-08 के दौरान सिर्फ सीआरपी मेंोवानों ने आत्महत्या की। जवानों में तनाव और अवसाद की समस्या के समाधान के लिए काउंसिलिंग, खेल-कूद और मनोरांन के लिए अंत्याक्षरी और अन्य कार्यक्रम आयोजित किये जाते हैं।

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