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20 हचाार20 हचाार बेटियों की शादी करायी जायेगी कन्यादान योजना में20 हचाार बेटियों की शादी करायी जायेगी कन्यादान योजना में

दायमी पुअर गर्ल मैरा सोसाइटी के विवाह समारोह में बोले सीएमड्ढr मुख्यमंत्री मधु कोड़ा ने कहा है कि गरीबों की मदद नहीं करनेवाला इंसान सबसे नीचे होता है। ऐसे इंसान से हमें बचना चाहिए। सभी सिर्फ धन कमाने में जुटे रहते हैं। पड़ोसी भूखा-नंगा है, इसकी उन्हें परवाह नहीं होती। यह बातें उन्होंने सोमवार को फिरायालाल बैंक्वेंट हॉल में दायमी पुअर गर्ल मैरेज सोसाइटी द्वारा आयोजित सामूहिक विवाह समारोह में उन्होंने कहीं।ड्ढr सीएम ने कहा कि कुछ लोग बेटियों को कोख में ही मार डालते हैं। उन्होंने सोसाइटी के कार्यो की सराहना की और कहा कि इसी उद्देश्य से राज्य सरकार ने मुख्यमंत्री कन्यादान योजना शुरू की है। इसके तहत इस बार राज्य की 20 हाार बेटियों की शादी करायी जायेगी।ड्ढr झारखंड तंजीम के केंद्रीय अध्यक्ष शमशेर आलम ने कहा कि दहेा प्रथा अभिशाप है। इस प्रथा को समाप्त करने को संस्था ने चुनौती के रूप में लिया है। वरिष्ठ पत्रकार हरिनारायण सिंह, वार्ड 27 की पार्षद साजदा खातून ने भी विचार रखे। सांप्रादायिक सौहाद्र्र का अनोखा नजाराड्ढr काजी ने कराया निकाह, पंडित जी ने लगवाये फेरड्ढr एक छत के नीचे एक-दूजे के हो गये नौ जोड़ेड्ढr बहनों को रुखस्त करते ही रो पड़े संस्था के लोगड्ढr ड्ढr सांप्रदायिक सौहार्द का अनोखा नजारा था। हिंदू और मुसलिम धर्मावलंबियों की शादी एक ही छत के नीचे हो रही थी। काजी कलमा पढ़ा कर निकाह करा रहे थे, तो पंडित जी फेर लगवा रहे थे। यह नजारा फिरायालाल बैंक्वेट हॉल में सोमवार को दिखा। अवसर था दायमी पुअर गर्ल सोसाइटी के सामूहिक विवाह समारोह का। बहनों को ससुराल भेजते समय संस्था के सदस्यों की आंखें भर आयीं और रो पड़े। उन्हें संस्था की ओर से उपहार भी दिये गये।ड्ढr दिन के करीब दो बजे विवाह कार्यक्रम शुरू हुआ। पांच मुसलिम, चार हिंदू कुल नौ जोड़ों की शादी हुई। रांची के अलावा चतरा, गुमला, गोड्डा, पूर्वी सिंहभूम आदि जगहों से जोड़ियां पहुंची थीं।ड्ढr संस्था के अध्यक्ष हैदर अली ने बताया कि पिछले दो साल में संस्था ने कुल 18 लोगों की शादी करायी है। सभी शादियां जनसहायता से करायी गयी हैं। सचिव फिरो हैदरी ने बताया कि संस्था का उद्देश्य ही है गरीब लड़कियों की शादी कराना। उप सचिव रोशन नायक ने भी अपने विचार रखे।ड्ढr समारोह में मुख्यमंत्री मधु कोड़ा भी पहुंचे थे। उन्होंने सभी जोड़ियों को दस-दस हाार रुपये का चेक दिया। कारी जान मोहम्मद के तिलावत-ए-कुरआन पाक से समारोह की शुरुआत हुई। संस्था के अध्यक्ष हैदर अली ने स्वागत भाषण दिया और सचिव फिरो हैदरी ने धन्यवाद ज्ञापन किया। संचालन मिनाक्षी शर्मा ने किया। समारोह में साकीब लतीफ, मो खालिद, जावेद अंसारी, पार्षद जमील अख्तर, शेख एबादुल्लाह, सरफे आलम आदि शामिल थे।ड्ढr जिन जोड़ों की शादी हुईड्ढr मनोज नाथ मुंडा संग धुरू कुमारी, बाबूलाल मुंडा संग शीतल कुमारी, सुधीर नायक संग अंजना कुमारी, खबेस पाहन संग संजोति कुमारी,मो इबरार संग अंजुमन शाहीन, मो शकील अहमद संग अफसाना नाज, हाफीा अंसारी संग गजाला परवीन, मो सगीर संग कौसर परवीन और मो शमीम संग जायेदा परवीन।ड्ढr नक्सली बंदी : नहीं पहुंचा दूल्हा, बाट जोहती रही दुल्हनड्ढr इंतजार है नयी सुबह का, आज दोनों होंगे एक दूजे केड्ढr ड्ढr सुनीला के सुनहर भविष्य की कामना सोमवार को पूरी नहीं हो सकी। वह दिनभर अपने भावी जीवन साथी की बाट जोहती रही। अब उसे इंतजार है मंगलवार की सुबह का, जब वह रवि हांसदा के साथ विवाह बंधन में बंध जायेगी। दायमी पुअर गर्ल्स सोसाइटी की ओर से आयोजित सामूहिक विवाह समारोह में सुनीला का रवि के संग विवाह होना था। रवि गोड्डा जिला का रहने वाला है। नक्सलियों की बंदी के कारण वह समय पर विवाह मंडप में नहीं पहुंच सका।ड्ढr घाटशिला के बेहरा गांव की रहने वाली सुनीला करमाकर अपने चाचा दीपक हांसदा के साथ मन में ढेर सार सपने संजोये विवाह मंडप पहुंची। सुनीला के चेहर पर उस समय मायूसी छा गयी, जब फोन पर उसे सूचना मिली कि रवि आज राजधानी नहीं पहुंच पाया है। उसने मंगलवार की सुबह रांची आने की सूचना दी। सुनीला के सिर से पिता का साया बचपन में ही उठ गया था। आर्थिक तंगी झेल रही मां ने किसी तरह उसे पाल पोसकर बड़ा किया। एक साल पहले गोड्डा में रवि से उसकी पहली मुलाकात हुई। दोनों में प्यार हुआ और साथ जीने-मरने की कसमें खायीं। विवाह के मार्ग में पैसे की कमी आड़े आयी। शादी तो कर लेंगे, लेकिन सामाजिक रीति-रिवाज का निर्वहन कैसे होगा। यही चिंता दोनों को सता रही थी। ऐसी स्थिति में दायमी सोसाइटी इन दोनों के लिए नयी रोशनी बनकर उभरी। 1मई की तिथि निर्धारित हुई, जहां अन्य नौ जोड़ियों के साथ इन्हें भी विवाह के पवित्र बंधन में बंधना था। अब मंगलवार को सुनीला और रवि का विवाह चर्च में कराया जायेगा। तेर मेर सपने अब एक रंग हैंड्ढr ड्ढr समाज की ये निर्धन बेटियां हैं, पर इनकी आंखों में भी खूबसूरत सपने पलते हैं। इनके सपनों को हकीकत में बदलने का काम किया ‘दायमी पुअर गर्ल्स मैरज सोसाइटी ने।ड्ढr आंखों में सतरंगी सपने लिये आठवीं पास 18 वर्षीया शीतल ने कहा : यह शादी उसकी मर्जी से हो रही है। वह अपनी पढ़ाई शादी के बाद भी जारी रखना चाहती है। उसका 25 वर्षीय पति बाबूलाल मुंडा इंटर पास है। वे दोनों मिलकर गृहस्थी की गाड़ी चलाना चाहते हैं।ड्ढr गायत्री (1वर्ष) सातवीं पास है। उसका पति दनगा (25 वर्ष) वीं पास है। उनके पास थोड़ी बहुत खेतीबारी है, जिसके सहार मजे से ये अपनी जिंदगी गुजार लेंगे।ड्ढr एक नववधू संजोती भी है जो अनपढ़ है और उसे अपनी उम्र नहीं पता। पर उसकी आंखों में सपने अठखेलियां करते नजर आते हैं। उसका 22 वर्षीय पति खगेश खुद को ‘नन मैट्रिक’ बताता है, पर उसे भरोसा है कि वह अपनी पत्नी को खुशहाल रखेगा।ड्ढr अंजना और उसका पति सुधीर भी अपनी शादी से खुश हैं और आगे की जिंदगी खेतीबारी कर गुजारंगे। मुमकिन हुआ तो पढ़ाई भी जारी रखेंगे।ड्ढr बाइस वर्षीय सिबला शाहीन 8वीं पास है और उसका पति मो इबरार पेशे से ड्राइवर है। सिबला सिलाई-कढ़ाई भी जानती है और अपने पति को हर तरह से सहयोग करना चाहती है।ड्ढr कौसर परवीन (1वर्ष) ने इसी वर्ष फर्स्ट डिवीजन से मैट्रिक पास की है। उसका पति मो सागिर हुसैन अपनी पत्नी को आगे पढ़ने देना चाहता है।ड्ढr गजाला परवीन का पति हाफिज अब्दुल हाफिज हैं (कुरआन पढ़ते हैं), गजाला अपनी पढ़ाई जारी रखना चाहती है और नौकरी भी करना चाहती है।ड्ढr जाहिदा का पति मो शमीम पेशे से मोटर मैकेनिक है। वह बताती है कि उसने शमीम की फोटो देखी थी और शमीम उसे बहुत अच्छे लगे।ड्ढr सिमटे-सकुचाये से इन जोड़ों के अनगिनत ख्वाब हैं। ये बेटियां भी चाहती थीं कि इनकी डोली इनके घरों से उठती। पर, गरीबी इनके सपनों पर भारी थी। ये निराश नहीं हैं। ये बहुत खुश हैं कि इनके सपनों को भी अंजाम तक पहुंचाया गया। नयी गृहस्थी की जिम्मेदारियां संभालने को उत्साहित इन बेटियों की खुशियां हमेशा बरकरार रहे। ड्ढr ं

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  • Web Title: 20 हचाार रुपये में बेटियों की शादी20 हचाार बेटियों की शादी करायी जायेगी कन्यादान योजना में20 हचाार बेटियों की शादी करायी जायेगी कन्यादान योजना में