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बोन मैरो ट्रांसप्लांट यूनिट बंद

पीजीआई की बोन मैरो ट्रांसप्लांट यूनिट यानी अस्थि मज्जा प्रत्यारोपण इकाई फिलहाल बंद हो गई। इससे ब्लड कैंसर के मरीाों का इलाज ठप होने की आशंका है। बोन मैरो ट्रांसप्लांट के मरीÊा अब यहाँ भर्ती नहीं किए जा रहे हैं। प्रत्यारोपण कराने के लिए पीजीआई में पंजीकृत मरीÊाों को वेल्लूर रफर किया जा रहा है। छह बिस्तरों की यूनिट में एक भी राीडेंट डॉक्टर नहीं है।ड्ढr प्रशिक्षित पैरामेडिकल स्टाफ व नर्सो का अभाव है। ऐसे में यूनिट की प्रभारी प्रो. सोनिया नित्यानंद ने यूनिट चला पाने में असर्मथता व्यक्त की है। चिकित्सा अधीक्षक डॉ. एके भट्ट ने यूनिट के बंद होने की पुष्टि की है। इस तरह की सुविधा देने वाला पीजीआई देश में तीसरा अस्पताल था। अब केवल वेल्लूर व टाटा मेमोरियल अस्पताल मुंबई में यह सुविधा मिलेगी। बोन मैरो ट्रांसप्लांट यूनिट चलाने के लिएोीरो बैक्टीरिया यानी बैक्टीरिया रहित कक्ष कीोरूरत पड़ती है। 1में बीएमटीयू वार्ड का निर्माण शुरू किया गया था जो अब तक पूरा नहीं पाया है।ोीरो बैक्टीरिया वार्ड न होने से मरीाों को अब तक क्रिटिकल केयर यूनिट में रखा जाता था। उसके लिए छह बेड आवंटित था। अब इन बिस्तरों को नेफ्रोलॉजी विभाग को दे दिया गया है।ड्ढr चिकित्सकों का कहना है कि छह बेड के लिए 25 प्रशिक्षित नर्सो कीोरूरत पड़ती है। तीन राीडेंट डॉक्टर भी होने चाहिए। इसके लिए प्रशिक्षित नर्से होनी चाहिए। इन्हीं दिक्कतों को देखते हुए यूनिट प्रभारी प्रो. सोनिया नित्यानंद ने यूनिट चला पाने में असमर्थता जताई और निदेशक को पत्र लिखा। चिकित्सा अधीक्षक डॉ. एके भट्ट का कहना है कि यूनिट में फिलहाल प्रत्यारोपण बंद है। नवें तल पर नई यूनिट बनाई जा रही है। संसाधनों को पूरा करने के बाद यूनिट फिर से शुरूहो जाएगी।ं

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