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नालंदा : सोना उगाने की तैयारी

प्राचीनकाल से ही दुनिया में शिक्षा का अलख जगाने वाला नालंदा अब कृषि जगत में भी छाने की तैयारी में है। शिक्षा के क्षेत्र में खोये गौरव को प्राप्त करने के लिए ‘यूनिवर्सिटी ऑफ नालंदा’ की स्थापना की जा रही है वहीं कृषि में अनूठे कार्यो के लिए कई महत्वपूर्ण योजनाएं यहां कार्यान्वित की जा रही हैं।ड्ढr ड्ढr इन योजनाओं के माध्यम से बुद्ध की तपोभूमि में सोना उगाने की तैयारी हो रही है। शीघ्र ही कृषि के मामले में नालंदा सूबे में अव्वल तथा देश के लिए प्ररणास्रेत बनेगा। नेशनल हॉर्टिकल्चर मिशन ने जिले में चार बड़ी योजनाओं पर कार्य शुरू किया है। इस्लामपुर के प्रोजनीबाग नर्सरी में उन्नत किस्मों के डेढ़ लाख आम के पौधे तैयार किये जा रहे हैं। इनमें अन्य प्रदेशों की उन्नत किस्में भी हैं। नर्सरी में आठ लाख की लागत से ग्रीन हाउस व शेडनेट के निर्माण किए गए हैं। आम्रपाली, मल्लिका, लंगड़ा, सफेदा, सुकुल, बम्बइया, गुलाब खास, कृष्णभोग समेत आम की अन्य दुर्लभ प्रजातियों के पौधे यहां तैयार किये जा रहे हैं।ड्ढr ड्ढr सब्जियों व फूलों के पौधे भी बेमौसम तैयार किये जा रहे हैं। प्रतिकुल वातावरण में भी फलने-फूलने वाले पौधों को यहां तैयार किया जाएगा। इसकी क्षमता वृद्धि मांग के अनुसार की जाएगी। हालांकि यह कार्यक्रम सूबे के पंद्रह स्थानों पर चलाया जा रहा है, परंतु यह सूबे की सबसे बड़ी नर्सरी है। इसके अलावा नूरसराय, चंडी व भागनबिगहा में भी नर्सरियों के निर्माण किये गये हैं। चंडी में हाइब्रिड भिंडी के बीज तैयार किये जाएंगे। बाद में यहां कद्दू व अन्य सब्जियों के बीज भी तैयार किये जाएंगे। सूबे के लिए बने कृषि रोड मैप के तहत जिले के प्रत्येक प्रखंड में एक-एक बीज ग्राम तथा जैविक ग्राम की स्थापना की जा रही है। वैसे तो नालंदा आलू व दलहनी फसलों के लिए मशहूर है, परंतु अब नगदी फसलों के उत्पादन में भी अपना स्थान बनाने लगा है।ं

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