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किशोरावस्था में ज्यादा होता है स्कोलियोसिस

स्कोलियोसिस यानी रीढ़ की हड्डी में टेढ़ेपन की समस्या ज्यादातर बच्चाों में होती है, लेकिन इसके प्रति लापरवाही बरती जाती है। यह समस्या बाद में गंभीर रूप धारण कर लेती है। समय पर ध्यान देकर इससे बचा जा सकता है। आइए जानें, क्या है स्कोलियोसिस और इससे बचाव के उपाय।


क्सर स्कोलियोसिस को अनदेखा कर दिया जाता है। अगर पीड़ित रोगी पहले ही इलाज के लिए डॉक्टर के पास चला जाए तो उसकी स्थिति नियंत्रित हो जाए, लेकिन इस बीमारी को लेकर जागरूकता की कमी है। इस बीमारी को ठीक करने के लिए सर्जरी जैसे विकल्प भी मौजूद हैं, लेकिन लोग इसे शारीरिक संरचना और उसकी शारीरिक मुद्रा से जोड़ कर देखते हैं। समय पर इलाज न होने से न सिर्फ व्यक्ति की स्थिति भयावह हो जाती है, बल्कि इस कारण दूसरे अंदरूनी अंग भी प्रभावित होने लगते हैं।

क्या है स्कोलियोसिस
रीढ़ में विकृति आने को ही स्कोलियोसिस कहते है। सामान्य रीढ़ की हड्डी पीछे से देखने पर सीधी नजर आती है, जबकि स्कोलियोसिस में हड्डी में तीन तरीके से वक्र बने होते हैं।

कठिन नहीं है उपचार
जिन रोगियों का स्केलिटन परिपक्व है और उनका वक्र कम डिग्री तक असामान्य है तो उन्हें इलाज की आवश्यकता नहीं होती। हालांकि युवा रोगियों में, जिनका वक्र अभी विकसित होना है, इलाज की आवश्यकता बहुत ज्यादा होती है। ऐसे मामलों में अगर स्कोलियोसिस को बिना इलाज के छोड़ दिया जाए तो यह वक्र रिबकेज यानी पंजर तक जा सकता है। यह जगह दिल व फेफडों के सामान्य कार्य करने के लिए महत्वपूर्ण है। अगर स्कोलियोसिस की समस्या इस जगह तक आ जाए तो सांस से जुड़ी समस्याएं व दिल संबंधी समस्याएं हो सकती हैं।

व्यायाम है कारगर
व्यायाम से कम वक्र वाले स्कोलियोसिस को नियंत्रित करने में मदद मिलती है। वैसे विशेषज्ञ यह भी कहते हैं कि ऐसा कोई व्यायाम नहीं है, जिससे स्कोलियोसिस को कम किया जा सके या रोका जा सके। बावजूद इसके स्कोलियोसिस से पीड़ित रोगियों के लिए रीढ़ की मांसपेशियों को लचीला रखना जरूरी है।
(मैक्स हॉस्पिटल के न्यूरोसर्जरी और हेड स्पाइन सर्जरी के डायरेक्टर डॉ़  बिपिन वालिया से बातचीत पर आधारित।)

कुछ तथ्य
’यौवन से पहले इसके लक्षण तेजी से देखने को मिलते हैं। यह उम्र आमतौर पर 9 से 15 साल के बीच की होती है।
’हालांकि लड़कों व लड़कियों में स्कोलियोसिस एक स्तर पर होता है, लेकिन लड़कियों में इसका खतरा ज्यादा होता है और इलाज की जरूरत होती है।
’स्कोलियोसिस परिवार में हो सकता है, लेकिन जिन बच्चों में स्कोलियोसिस पाया गया है, उनके पारिवारिक इतिहास में यह बीमारी नहीं थी। ये अधिकतर मामलों में अज्ञात ही है।

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