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जीवनभर साथ देंगे बॉडी ऑर्गन

जीवनभर साथ देंगे बॉडी ऑर्गन

तनाव से भरी शहरी जीवनशैली हृदय रोग, उच्च रक्तचाप, सिर दर्द, अनिद्रा, अवसाद जैसी समस्याओं का प्रमुख कारण है। इन बीमारियों से संबंधित शरीर के कुछ प्रमुख अंगों जैसे मस्तिष्क, हृदय, गुर्दा, फेफड़ा और जिगर का खास ख्याल रख कर इन समस्याओं से दूर रह सकते हैं।

आपका पेट सपाट है, इसका अर्थ यह नहीं कि आप पूरी तरह फिट हैं, बल्कि स्वस्थ महसूस करना तथा जीवन को भरपूर जीना फिटनेस है। हमारा शरीर अनेक अंगों की प्रणालियों से बना हुआ है और इन सभी प्रणालियों को एक इकाई के रूप में मिल कर काम करना जरूरी होता है। हमारे शरीर में लगभग 78 अंग होते हैं। इनके आकार, कार्य एवं गतिविधियां अलग-अलग लोगों में अलग-अलग हो सकती हैं। महिला और पुरुष के इन 78 अंगों में से त्वचा वजन एवं आकार के हिसाब से सबसे बड़ा अंग है। पेट, अग्नाशय, पित्ताशय, आंत आदि भी अनेक अंग हैं, जो एक जैसे ही महत्वपूर्ण हैं। लेकिन यहां हम शरीर के 5 महत्वपूर्ण अंदरूनी अंगों यानी बॉडी ऑर्गन हृदय, मस्तिष्क, गुर्दा, फेफड़ा और जिगर यानी यकृत की बात करते हैं, क्योंकि आधुनिक शहरी जीवनशैली की लापरवाही में इन्हें ज्यादा खतरा रहता है।

हृदय
हृदय यानी हार्ट शरीर की संचार प्रणाली का मुख्य अंग है, जो पूरे शरीर में रक्त पंप करता है। यह मस्क्युलर पंप है, जो नियमित अंतराल पर सिकुड़ता और फैलता है। इस कारण यह पूरे शरीर से रक्त को खींचता है और उसे शुद्ध करके रक्त नलिकाओं के जरिये पूरे शरीर में भेजता है। हृदय में चार कक्ष होते हैं। दाएं कक्ष में अशुद्ध रक्त जमा होता है। यह ऑक्सीजन रहित रक्त होता है। दूसरी ओर, बाएं कक्ष में स्वच्छ रक्त होता है, जो ऑक्सीजन से युक्त होता है।

कोरोनरी धमनी रोग : हृदय को रक्त पहुंचाने वाली रक्त नलिकाएं प्लाक या थक्के के जमा होने के कारण संकरी हो जाती है। ऐसे में हृदय को अधिक काम करना पड़ता है। इसके परिणाम स्वरूप दिल की मांसपेशियां धीरे-धीरे कमजोर हो जाती हैं। यह जानलेवा बीमारी है और इसका कारण रक्त कोलेस्ट्रॉल का उच्च स्तर है। मायोकार्डियल इंफैरक्शन अत्यंत खतरनाक हृदय रोग है। इसे सामान्य बोल-चाल में दिल के दौरे के नाम से जाना जाता है। अगर मरीज का तत्काल समुचित इलाज न हो तो इसके कारण मरीज की मौके पर मौत हो सकती है। इसमें हृदय को होने वाली रक्त की आपूर्ति या तो कम हो जाती है या पूरी तरह से बंद हो जाती है, जिसके कारण हृदय की कोशिकाओं को ऑक्सीजन नहीं मिल पाती।  कंजेस्टिव हार्ट फेल्योर में मरीज का हृदय क्षतिग्रस्त हो जाता है या पूरी क्षमता के अनुसार काम नहीं कर पाता। इसके कारण शरीर को जरूरत के मुताबिक पर्याप्त रक्त नहीं मिल पाता। मरीज को थकान का अनुभव होता है और सांस लेने में तकलीफ होती है।

मस्तिष्क  
हमारे शरीर का एक प्रमुख अंग मस्तिष्क यानी ब्रेन है, जो शरीर के सभी कार्यकलापों एवं गतिविधियों के लिए जिम्मेदार है। मस्तिष्क से जुड़ी सभी संरचनाएं एक-दूसरे के साथ तालमेल में काम करती हैं और ये विकास, रखरखाव, प्रजनन, यौन परिपक्वता, जोखिम से अगाह करने, पर्यावरण के खतरों पर प्रतिक्रिया जताने और व्यक्तिगत और व्यवहार संबंधी घटनाक्रम जैसे कई मुख्य कार्यो को अंजाम देते हैं। यह मुख्य अंग अनेक गडबड़ियों, चोटों, क्षति और गंभीर बीमारियों का शिकार हो सकता है और इससे पीड़ित व्यक्ति की तत्काल मौत भी हो सकती है। इन बीमारियों में मेनिनजाइटिस, इन्सेफेलाइटिस, बेहोशी, नकसीर, ब्रेन टय़ूमर, हाइड्रोसेफलस और हेमोरेजिक स्ट्रोक आदि प्रमुख हैं।

फेफड़े
फेफड़े यानी लंग्स हमारे शरीर को ऑक्सीजन प्राप्त करने और कार्बन डाइऑक्साइड से छुटकारा दिलाने में मदद करते हैं। यह अत्यंत ही नाजुक अंग है, जो वायु प्रदूषण, धूम्रपान और कैंसरजन्य एजेंटों के कारण क्षतिग्रस्त हो सकता है। इससे संबंधित बीमारियों में ब्रोंकाइटिस, इम्फेसेमा, फेफड़े का कैंसर आदि प्रमुख हैं। ब्रोंकाइटिस ब्रोंकाई की सूजन है। इसमें लगातार खांसी होती है और बलगम निकलती है। धूम्रपान के कारण क्रोनिक ब्रोंकाइटिस होता है। वायु प्रदूषण और धूल के कारण यह बीमारी होती है, जिससे लंबे समय तक खांसी रहती है। दूसरी बीमारी इम्फेसेमा तब होती है, जब फेफड़े अधिक उम्र हो जाने के कारण अपनी लोच खो देते हैं। ऐसे में फेफड़े सही तरह से काम नहीं करते और गैसों का सही तरह से आदान-प्रदान नहीं हो पाता है। इसके परिणाम स्वरूप फेफड़े में हवा रह जाती है और सांस लेने में बहुत अधिक कठिनाई होती है। फेफड़े का कैंसर दुनिया भर में बहुत अधिक व्याप्त है। इसका मुख्य कारण लगातार धूम्रपान करना है। इससे फेफड़े का क्षय होने लगता है और इसके कारण फेफड़े सही तरह से काम नहीं करते। फेफड़े का कैंसर तो लाइलाज है।

जिगर या यकृत

जिगर यानी लीवर सबसे बड़ा आंतरिक अंग है। यह कुछ खास पदार्थो का उत्सर्जन करता है, जिनका इस्तेमाल शरीर के अन्य हिस्सों में होता है। यह अंत:स्नवी और बाह्य स्नवी, दोनों कार्य करता है। पीलिया लीवर रोग का संकेत है और यह बीमारी की गंभीरता को बताने वाला सबसे विश्वसनीय लक्षण है। लीवर रोग के विशिष्ट लक्षणों में शामिल हैं - थकान, मिचली, भूख में कमी, बेचैनी या पेट के ऊपरी हिस्से में दर्द या दिक्कत, आंतों से खून बहना और पेट में दर्द।  

गुर्दे
गुर्दे यानी किडनी रक्त से अतिरिक्त नमक, पानी और अपशिष्ट पदार्थो को शरीर से बाहर निकालने में मदद करते हैं। गुर्दे महत्वपूर्ण हारमोन को भी स्नवित करते हैं, जो रक्त कोशिका के निर्माण में और रक्तचाप को नियंत्रित रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। गुर्दे की गंभीर बीमारियों की रोकथाम या बीमारी के विकास को धीमा करने के लिए बीमारी की जल्द पहचान और समय पर इलाज महत्वपूर्ण है। इससे गुर्दे के खराब होने की रफ्तार को धीमा करने के लिए काफी समय मिल जाता है। बीमारी का जल्द इलाज कराने पर क्रोनिक किडनी रोग को गंभीर होने से रोका जा सकता है। क्रोनिक किडनी रोग के करीब दो तिहाई मामलों के लिए मधुमेह और उच्च रक्तचाप जिम्मेदार हैं। आहार, व्यायाम और दवाओं की मदद से मधुमेह और उच्च रक्तचाप को पूरी तरह से नियंत्रित रखकर गुर्दे को खराब होने से रोका जा सकता है।


(नोवा स्पेशियलिटी हॉस्पिटल के गैस्ट्रोएंटेरोलॉजी सर्जन डॉ. आशीष भनोट, एआईएमएस (फरीदाबाद) के नेफ्रोलॉजिस्ट डॉ़ जितेन्द्र कुमार, फोर्टिस हॉस्पिटल के इंटरवेंशनल कार्डियोलॉजिस्ट डॉ़ विनय सांघी और आर्टेमिस हॉस्पिटल (गुडगांव) के न्यूरो सर्जन
डॉ़ आलोक गुप्ता से बातचीत पर आधारित)

इनके लिए क्या करें

हृदय
अपने हृदय को स्वस्थ बनाए रखने के लिए अपने भोजन में पर्याप्त मात्र में फल और सब्जियों को शामिल करें। इस बात का ध्यान रखें कि ओमेगा 3 फैटी एसिड भी आपके भोजन में शामिल हो रहा हो। सप्ताह में कम से कम 5 दिन आधा घंटा व्यायाम करें या इतने ही समय के लिए नियमित रूप से टहलने जाएं।

मस्तिष्क
ऑयली फिश, टमाटर, ब्लूबेरीज, स्ट्रॉबेरी, अखरोट, साबूत अनाज, पालक, चुकंदर, डार्क चॉकलेट आदि को अपने भोजन में नियमित रूप से शामिल करें। मस्तिष्क के व्यायाम के लिए सुडोकू जैसा कोई खेल नियमित रूप से खेलें।

फेफड़े
धूम्रपान से दूर रहें। अगर धूम्रपान कर रहे हैं तो उसे तत्काल न कहें। नियमित रूप से व्यायाम करें। पर्याप्त पानी पिएं। लहसुन, प्याज, अदरक, पत्ता गोभी, ब्रोकली, हल्दी, सेब आदि का संतुलित मात्र में सेवन करें।

जिगर
जिगर की सेहत के लिए भोजन में पपीता, आम, चुकंदर, लहसुन, ब्रोकली आदि को जरूर शामिल करें। फैटी और मीठे भोजन से बचें। अल्कोहल से दूर रहें। अपने जिगर को सेहतमंद बनाए रखने के लिए मांसाहार का भी सेवन सीमित मात्र में करें।

गुर्दे
अधिक नमक गुर्दे के लिए ठीक नहीं, इसलिए अपने भोजन में नमक कम करें। पर्याप्त पानी पिएं। फल और सब्जियां बढ़ाएं। खासकर अंगूर, प्याज, पालक आदि को अपनी डाइट में जरूर शामिल करें। शराब और धूम्रपान से बचें। किसी भी तरह के सप्लीमेंट्स का इस्तेमाल बिना डॉक्टर की सलाह के बिल्कुल भी न करें।

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