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खत्म हुआ इंतजार, इराक से घर लौटीं सभी भारतीय नर्सें

खत्म हुआ इंतजार,  इराक से घर लौटीं सभी भारतीय नर्सें

इराक में आतंकवादियों की गिरफ्त से निकली 46 भारतीय नर्सों को लेकर एयर इंडिया का विमान आज कोच्चि पहुंच गया। भारतीय नर्सों का स्वागत करने के लिए केरल के मुख्यमंत्री ओमान चांडी हवाई अड्डे पर मौजूद थे। 46 नर्सों की सकुशल वापसी पर सुकून व्यक्त करते हुए मुख्यमंत्री ने मोदी सरकार को धन्यवाद दिया है। उन्होंने कहा कि हमारी चिंताओं को गहराई से समझते हुए केन्द्र सरकार ने नर्सों की वापसी के लिए गंभीर प्रयास शुरू किये।
       
चांडी ने कहा कि उनकी सुरक्षित रिहाई हमारा मुख्य उद्देश्य था। इस्लामिक स्टेट ऑफ इराक एंड सीरिया के आतंकवादियों ने कल ही नर्सों को रिहा कर दिया था, जिसके बाद से इनकी सुरक्षित स्वदेश वापसी की तैयारियों ने जोर पकड़ लिया था। भारतीय नर्सों के अलावा 130 अन्य यात्रियों को लेकर एयर इंडिया का विमान सुबह 8.45 पर मुंबई अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर पहुंच गया था।

नर्सों ने अपनी आपबीती सुनाते हुए कहा आंतकवादी हमारे साथ बहुत ही शालीनता और तमीज से पेश आए। हमें उनकी तरह से कभी कोई खतरा महसूस नहीं हुआ। जब आतंकवादियों ने हमे अस्पताल खाली करने को कहा, तब हम भ्रमित हो गए थे। लेकिन इसी बीच चांडी और विदेश मंत्री सुषमा स्वराज की ओर से समय पर मिली सहायता की वजह से हम चुपचाप आंतकवादियों के साथ चल पड़े। इनमे से एक नर्स एन्सी जोसेफ ने कहा कि मैं उन सभी लोगों का धन्यवाद करना चाहूंगीं, जिन्होंने हमें वहां से निकालने में मदद की।
     
केरल की इन बेटियों की सकुशल वापसी पर सुकून व्यक्त करते हुए मुख्यमंत्री चांडी ने मोदी सरकार को धन्यवाद दिया। उन्होंने कहा कि हमारी चिंताओं को गहराई से समझते हुए केन्द्र सरकार ने नर्सों की वापसी के लिए गंभीर प्रयास शुरू किये। उन्होंने कहा कि ना सिर्फ वह, बल्कि केरल का हर नागरिक बहुत संतोष का अनुभव कर रहा है। उन्होंने कहा कि उनकी सुरक्षित रिहाई ही हमारा मुख्य उद्देश्य था। 
     
कल नर्सों की रिहाई की खबर मिलने पर राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने भी खुशी जतायी। मुखर्जी ने ट्विटर पर लिखा था कि भारतीय नर्सों की सुरक्षित रिहाई से वह खुश हैं तथा राहत महसूस कर रहे हैं। इराक में पूर्व तानाशाह सद्दाम हुसैन के गृहनगर तिकरित में कई दिनों से इस्लामिक स्टेट ऑफ इराक एंड सीरिया के आतंकवादियों ने कल ही नर्सों को रिहा करने का फैसला किया था, जिसके बाद से इनकी सुरक्षित स्वदेश वापसी की तैयारियों ने जोर पकड़ लिया।

एयर इंडिया का एक विमान इरबिल से सुबह चार बजकर पांच मिनट पर भारतीय नर्सों के अलावा 130 अन्य यात्रियों को लेकर रवाना हुआ, जो 8.45 बजे मुंबई के छत्रपति शिवाजी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर पहुंचा। मुंबई में कुछ ही देर रूकने के बाद विमान ने कोच्चि के लिए उडान भरी। इस बीच कोच्चि अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा लिमिटेड ने नर्सों के स्वागत की तैयारी पूरी कर ली थी।

कोच्चि हवाई अड्डा लिमिटेड के निदेशक ए.सी. के. नायर नेबताया कि इस विमान को कोच्चि सुबह सात बजे पहुंचना था, लेकिन कुछ तकनीकी गड़बड़ी के कारण इसमें विलंब हुआ। उल्लेखनीय है कि इराक में आतंकियों के कब्जे से 46 भारतीय नर्सों की रिहाई की पुष्टि होने के बाद विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने कल दोपहर एक उच्च स्तरीय बैठक में स्थिति की समीक्षा की।

इस बैठक में नर्सों को भारत लाने के लिए एयर इंडिया का एक विशेष विमान भेजने का फैसला किया गया। यह विमान कल शाम छह बजे रवाना हुआ। इन नर्सों को पिछले कई दिनों से जारी लड़ाई के बाद आईएसआईएल के आतंकवादियो ने कब्जे में ले लिया था। ये नर्सें एक अस्पताल के बेसमेंट में रह रहीं थीं। गुरुवार को आतंकी उन्हें मोसूल ले गये थे। कल उनकी रिहाई के बाद नर्सों को इरबिल हवाई अड्डे लाया गया। उन्हें भारत लाने के लिए दो विमानों को तैयार रखा गया था। 
     
बंधकों की रिहाई के लिए पर्दे के सामने से लेकर बंद दरवाजों के पीछे हुए प्रयासों के बारे में कल विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा था कि विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने इस दौरान खाड़ी में अनेक देशों के विदेश मंत्रियों के साथ बातचीत की और जमीनी स्तर पर कई दरवाजे खटखटाए गए। प्रवक्ता ने कहा कि मीडिया में सुषमा स्वराज के प्रयासों के बारे में जितना सामने आया है, उससे करीब तीन चार गुना ज्यादा उन्होंने प्रयास किए, लेकिन उन्होंने इस बारे में ब्योरेवार विवरण देने से यह कहते हुए मना कर दिया कि जंग अभी जारी है और मोसूल में 39 भारतीय अब भी बंधक हैं, लिहाजा नर्सों को किस तरह रिहा कराया गया, किससे बातचीत की गई, किस-किस का सहयोग लिया गया, कौन सा दरवाजा खुला, इस बारे में कुछ भी बताना सही नहीं होगा।

प्रवक्ता ने कहा कि इराक के इर्बिल में भारत की एक टीम पहले ही तैनात थी और वह इस दौरान काम आ गई। उन्होंने कहा कि इन नर्सों ने पिछले अनेक घंटों में मानसिक यंत्रणा झेली है, जो उनके निकटजनों के पास आकर ही ठीक हो सकती है। इस सवाल पर कि कई दिन से तिकरित के अस्पताल में सुरक्षित रह रही नर्सों को भारत ने समय रहते ही क्यों नहीं निकाल लिया था और उनके बंधक बनने की नौबत क्यों पैदा होने दी गई, प्रवक्ता ने कहा कि उनमें से कई नर्सें वापस आने को उस समय तैयार नहीं थीं।

जिन नर्सों ने वहीं बने रहने का फैसला किया था, उनकी संख्या काफी थी। उनके फैसले में गड़बड़ी हो सकती है, लेकिन यह उस समय की स्थिति में लिया गया निर्णय था। लेकिन बाद में हालत बिगड़ गए और जमीनी रास्ते भी बागियों के कब्जे में आ गए, तो उन्हें निकालना संभव नहीं रह गया था। 
      
विदेश मंत्रालय ने इन सवालों का कोई जवाब नहीं दिया कि नर्सों को बंधक बनाने वाले कौन थे, उनकी मांग क्या थी, उनमें से क्या मांगे मानी गईं और क्या नर्सों की रिहाई के लिए फिरौती भी दी गई। उल्लेखनीय है कि इराक के बिना संघर्ष वाले इलाकों में करीब 10 हजार भारतीयों में से दो हजार ने भारत वापसी की मंशा जाहिर की है और भारत सरकार उन सब की मदद के प्रयास कर रही है।

नर्सें अब इराक जाने की इच्छुक नहीं
युद्ध से जर्जर इराक में तकरीबन एक माह सांसत में बिताने के बाद आज वतन लौटीं ज्यादातर नर्सें अब वहां नहीं लौटना चाहतीं। 45 अन्य नर्सों के साथ कोच्चि हवाई अड्डे पहुंची सैंड्रा सेबेश्यिन ने कहा कि हम वापस नहीं जाएंगे। वापस जाने का कोई सवाल ही नहीं है। हम अपनी जान एक बार फिर दांव पर लगाने के लिए तैयार नहीं हैं।
     
कोच्चि हवाई अड्डे पर पहुंचने के बाद 46 नर्सों का केरल के मुख्यमंत्री ओमन चांडी और नर्सज्ञें के रिश्तेदारों ने उनका बहुत गर्मजोशी से स्वागत किया। कोट्टायम से ताल्लुक रखने वाली सैंड्रा ने बताया कि वह पिछले साल 16 अगस्त को इराक गई थी। उसे और अन्य नर्सों को पिछले चार महीने से गवर्नमेंट तिकरित ट्रेनिंग हास्पिटल से तनख्वाह नहीं मिली। उसने बताया, पहले 23 नर्सों का हमारा बैच था और फिर इस साल फरवरी में 15 और शामिल हो गईं।
     
आईएसआईएस उग्रवादियों के हाथों बंधक बनाए जाने पर सैंड्रा और एक अन्य नर्स नीनू जोस ने कहा कि उन्हें वहां से पहले ही जाने को कहा गया था लेकिन उन्होंने इनकार कर दिया था, क्योंकि भारतीय दूतावास ने उन्हें ऐसा करने की इजाजत नहीं दी थी। सैंड्रा ने बताया कि 3 जुलाई को उग्रवादियों ने उन्हें बैग पैक करने और रवाना होने के लिए सिर्फ 15 मिनट का समय दिया। उसने कहा, उन्होंने हमसे कहा कि आप सभी हमारी बहन की तरह हैं। आपको कोई नुकसान नहीं पहुंचाया जाएगा। लेकिन हमने उनपर भरोसा नहीं किया।
     
सैंड्रा ने बताया कि तिकरित से मोसुल तक के 7 घंटे के सफर में उनके साथ कुछ हथियारबंद डॉक्टर भी थे। वे चार बसों में दोपहर 12 बजे रवाना हुए और शाम 7 बजे मोसुल पहुंचे। नीनू ने बताया कि उन्हें खाना दिया गया और सोने के लिए बिस्तर का इंतजाम किया गया।
     
कन्नूर की सुनी मोल चाको ने बताया, उन्हें आतंकवादी नहीं कहा जा सकता। वे स्थानीय सरकार के हिस्सा थे। इराक से लौटी नर्सों को लेने के लिए उनके रिश्तेदारों का हुजूम था। उनकी आंखें नम थी। उन्होंने अपनी प्रियजन को गले लगाया।
     
एर्नाकुलम के एलानजी बालाकृष्णन ने बताया कि उनकी बेटी रेणु पिछले साल अगस्त में इराक गई थी। मुझे अपनी बेटी को इराक भेजने के लिए 48 सेंट जमीन और अपना घर गिरवी पर रखना पड़ा था। उल्लेखनीय है कि रेणु को भी पिछले चार माह से कोई वेतन नहीं मिला था।
     
सभी नर्सज्ञें और उनके रिश्तेदारों ने उनकी सुरक्षित वतन वापसी सुनिश्चित करने में तमाम तरह की मदद करने के लिए चांडी और केन्द्र सरकार का शुक्रिया अदा किया। इराक से लौटी 46 नर्सों में से 45 केरल के विभिन्न जिलों की और एक तमिलनाडु की तुतीकोरिन की हैं। सभी ने कहा कि उग्रवादियों ने उनके साथ अच्छा बर्ताव किया।
     
कोट्टायम की मरीना ने जब अपनी दो साल की बेटी रेया और बेटे मेरिन को गले से लगाया तो उसकी आंखों में आंसू थे। वह उनसे 11 महीने के बाद मिल रही थी। मरीना ने कहा कि आईएसआईएस ने उनका अच्छा ख्याल रखा और उनसे उसे कोई शिकायत नहीं है।
     
चांडी कल देर रात यहां पहुंचे थे। उन्होंने हवाई अड्डे पर नर्सों का स्वागत किया। हवाई अड्डे के कर्मियों ने सुनिश्चित किया कि तमाम औपचारिकताएं तेजी से पूरी हो जाएं। मीडियाकर्मियों को मुश्किलों का सामना करना पड़ा, क्योंकि उन्हें इंटरनेशनल अराइवल लाउंज में कहीं अंदर रहने की इजाजत नहीं दी गई।
     
हवाई अड् केडे सूत्रों ने बताया कि चांडी के अलावा स्वास्थ्यमंत्री वीएस शिवाकुमार, लोकनिर्माण मंत्री इब्राहीम कुंजू, चलाकुडी के सांसद एवं मलयालम अभिनेता जेस के मणि हवाई अड्डे पर मौजूद थे। जैसे ही नर्सों ने चांडी को देखा, उन्होंने मुख्यमंत्री को थैंक्यू कहा।
     
नन रेजिडेंट केरलाइटस एसोसिएशन (नोरका) के पदाधिकारियों ने नर्सों की मदद के लिए दो काउंटर लगाए थे। प्रत्येक नर्स को 5000 रुपये और घर पहुंचने के लिए मुफ्त टैक्सी की पेशकश की गई।
   

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