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केदारनाथ मंदिर की होगी किलेबंदी

देहरादून। विशेष संवाददाता। आपदा के बाद मंदाकिनी और सरस्वती नदी के उदगम स्थलों की ओर से वहां आए विशालकाय बोल्डरों से केदारनाथ मंदिर को खतरे की आशंका के मद्देनजर जीएसआई ने कम से कम तीन या चार चक्रों में सुरक्षा दीवार बनाने की राय दी है। मुख्य सचवि सुभाष कुमार ने बताया कि जीएसआई ने शासन को अपनी रिपोर्ट सौंप दी है।

उनकी राय के अनुसार विशेष टास्क फोर्स और स्थानीय प्रशासन को मंदिर की सुरक्षा के लिए काम करने के लिए कहा गया है। केदारनाथ मंदिर के पीछे की ओर से बह रही मंदाकिनी और सरस्वती नदियों ने 16-17 जून, 13 को अपना रौद्र रूप दिखाया था। मंदाकिनी का प्रवाह भी दूसरी ओर हो गया था। यह मंदिर के लिए ज्यादा खतरनाक बन गया था। अब मंदाकिनी को उसके मूल प्रवाह में वापस लाने में प्रशासन सफल हो गया है। पर मंदिर के ठीक पीछे विशालकाय बोल्डर अब भी खतरा बने हुए हैं।

इन बोल्डर के साथ ही ठीक मंदिर के पीछे अटक गए सबसे करीब 14-15 फीट ऊंचे 25 फीट से ज्यादा चौड़े बोल्डर ने भीषण बाढ़ से केदारनाथ मंदिर की सुरक्षा की थी। मंदिर के पीछे की ओर मंदाकिनी और सरस्वती नदियां अब अपने मूल प्रवाह में बह रही हैं। पर जीएसआई को आशंका है कि नदी कभी भी अपना रुख मोड़ सकती है। ऐसे में मंदिर के पीछे की से आए सभी बोल्डरों को हटाया जाना चाहिए। क्योंकि ये ही बोल्डर कभी भी मंदिर के लिए खतरा बन सकते हैं।

साथ ही वहां कम से कम तीन या चार चक्रों में मंदिर की सुरक्षा के लिए दीवार बनाई जानी जरूरी है। मुख्य सचवि सुभाष कुमार ने कहा कि सुरक्षा दीवार बनाने के लिए जीएसआई की रिपोर्ट अनुसार कार्रवाई की जाएगी। जिलाधिकारी रुद्रप्रयाग और विशेष टास्क फोर्स को इस संबंध में आगे की कार्रवाई के लिए कहा गया है। कोशशि की जा रही है कि जल्द से जल्द इस पर काम हो। उन्होंने कहा कि मंदिर के आसपास सभी चहि्नित क्षतिग्रस्त इमारतों के साथ ही अन्य निर्माण को भी वहां से शिफ्ट करने के लिए तीर्थ पुरोहितों और दुकानदारों को वशि्वास में लेकर कार्य किया जाएगा।

उन्हें मंदिर से पहले यात्रा मार्ग पर ही सुरक्षित स्थान पर शिफ्ट करने की राय भी है। जीएसआई की राय बी है कि मंदिर के आसपास निर्माण कार्य न हो। सभी खतरनाक भवनों को वहीं पूरी तरह से क्षतिग्रस्त कर वहां समतलीकरण कर दिया जाए। दवि्यशिला को भी हटाने का सुझावदेहरादून। पिछले साल अपदा के दौरान केदारनाथ मंदिर के पीछे अटकी विशालकाय शिला को भी जीएसआई ने वहां से हटाने का सुझाव दिया है। जीएसआई ने कहा है कि यह शिला भविष्य में खतरा बन सकती है।

इसलिए इसका ट्रीटमेंट किया जाना जरूरी है। मंदिर कमेटी और श्रद्धालुओं का मानना है कि इस शिला के मंदिर के पीछे अटक जाने के कारण पानी और मलबा डायवर्ट हो गया था। जिससे मंदिर को नुकसान होने से बच गया। लोगों ने मंदिर की सुरक्षा करने वाली इस शिला को दिव्यशिला नाम देकर इसे पूजना भी शुरू कर दिया है।

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  • Web Title:केदारनाथ मंदिर की होगी किलेबंदी