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क्यों ना मामले की जांच सीबीआई से हो: हाईकोर्ट

नई दिल्ली वरिष्ठ संवाददाता। मनोज राणा हत्याकांड मामले में दिल्ली हाईकोर्ट ने केन्द्रीय गृहमंत्रालय को नोटिस जारी कर पूछा है कि क्यों न इस मामले की जांच सीबीआई को सौंप दी जाए। हाईकोर्ट ने इस मामले में मंत्रालय से पीड़ित परिजनों को मुआवजा देने पर भी जवाब मांगा है।

जस्टिस मुक्ता गुप्ता ने यह आदेश मृतक मनोज राणा की पत्नी रशिी राणा की याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया है। उन्होंने इस मामले में दिल्ली पुलिस आयुक्त को नोटिस जारी कर बिंदापुर थाने के प्रभारी किशोर कुमार रेवला को मामले में आरोपी बनाए जाने एवं जांच की प्रवृति पर भी जवाब देने को कहा है।

हाईकोर्ट ने मंत्रालय और पुलिस आयुक्त को 27 अक्टूबर तक जवाब देने को कहा है। याचिकाकर्ता रिशी की तरफ से अधविक्ता गौरव बंसल ने 30 वर्षीय मनोज की मौत की सीबीआई जांच की मांग के लिए हाईकोर्ट में याचिका दायर की है।

बीती 26 मई को बिंदापुर थाने के छह पुलिसकर्मियों ने मनोज राणा का कथित रूप से अपहरण कर उसकी हत्या कर दी थी। आरोप यह भी है कि बिदांपुर थाना प्रभारी के कथित निर्देश पर मनोज का अपहरण कर हत्या की गई।

रिशी राणा की तरफ से दायर याचिका में दस लाख रुपये के मुआवजे की भी मांग की गई है। हाईकोर्ट ने इस पर भी गृहमंत्रालय से जवाब-तलब किया है। इसके अलावा मामले को दिल्ली पुलिस की अपराध शाखा से लेकर सीबीआई को सौंपने की मांग की गई है।

अधिवक्ता बंसल ने कहा है कि जांच दिल्ली पुलिस के दयनीय एवं संवेदनहीन रूख को दिखाती है जो निष्पक्ष जांच करने के बजाए बिंदापुर थाने के तत्कालीन थाना प्रभारी को बचाने का प्रयास कर रही है।

रशिी ने आरोप लगाए हैं कि 26 मई को छह पुलिसकर्मियों ने पूर्व नियोजित साजशि के तहत उसके पति का अपहरण किया और एक अज्ञात स्थान पर ले गए। जहां उसकी हत्या की गई। याचिकाकर्ता के अनुसार पुलिस ने मनोज का अपहरण व हत्या करने के बाद में बताया कि राणा उत्तम नगर इलाके में शादी समारोह के दौरान गोली चलाने के एक मामले में आरोपी था जबकि वास्तविकता में ऐसा कोई मुकदमा दिल्ली के किसी थाने में दर्ज ही नहीं था।

रशिी के मुताबिक आरोपी पुलिसकर्मी मनोज पर यह स्वीकार करने के लिए दबाव बना रहे थे कि उसके पास एक अवैध हथियार था जिसका उपयोग उसने शादी समारोह में गोली चलाने में किया। जब मनोज ने पुलिस की बात मानने से इनकार कर दिया तो पुलिसकर्मियों ने नाराज होकर उसकी पीट-पीट कर हत्या कर दी। रिशी का यह भी यह भी आरोप है कि घटना से पहले पुलिसकर्मी 19 मई को उसके घर आए थे और उसके पति की हत्या करने की धमकी दी थी।

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