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बिहार समेत कई बोर्ड के छात्रों को दाखिले में आनाकानी

नई दिल्ली। कार्यालय संवाददाता। दिल्ली विश्वविद्यालय के कुछ कॉलेज बिहार और राजस्थान बोर्ड समेत कई राज्यों के बोर्ड के छात्रों को दाखिला देने में आनाकानी कर रहे हैं। कॉलेज का कहना है कि इन बोर्ड के छात्रों के पास 12वीं कक्षा के मूल प्रमाण-पत्र और अंक पत्रिका नहीं हैं इसलिए फिलहाल दाखिला नहीं दिया जा सकता। औपचारिक तौर पर कॉलेज इस मसले पर नहीं बोल रहे हैं। दरअसल, इन राज्यों के बोर्ड के छात्रों के पास फिलहाल 12वीं की मूल अंक पत्रिका व प्रमाण-पत्र नहीं हैं।

ऐसे में, ये इंटरनेट से अंक पत्रिका डाउनलोड कर आवेदन कर रहे हैं जिन्हें कॉलेज स्वीकार नहीं कर रहा है। हैरानी की बात यह है कि कॉलेजों के पास हर बोर्ड के छात्रों का ब्योरा है। सभी बोर्ड सीडी में विश्वविद्यालय को छात्रों के अंकों का ब्योरा उपलब्ध कराते हैं। कॉलेज चाहें तो इसके जरिये छात्रों के अंकों की जांच कर सकते हैं। बावजूद इसके कॉलेज प्रोविजनल दाखिला देने में आनाकानी कर रहे हैं। उधर, स्टूडेंट्स वेलफेयर के वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि कोई भी कॉलेज दाखिला देने से मना नहीं कर सकता।

यदि छात्र इंटरनेट से डाउनलोड की गई अंक पत्रिका दिखा आवेदन करते हैं तो उसकी जांच बोर्ड के जरिये कराकर दाखिला देना होगा। गौरतलब है कि बीते साल रामजस कॉलेज ने इसी तरह मना किया था। बाद में डीयू के हस्तक्षेप के बाद दाखिला दिया गया था। तब कॉलेज ने तर्क दिया था कि फर्जी दाखिलों से बचने के लिए ऐसा कदम उठाया गया था। प्रशासन के साथ अभिभावक व छात्रों की कहासुनी- आउट ऑफ कैंपस में भी शुक्रवार को इस तरह की दिक्कतें सामने आईं।

भास्कराचार्य कॉलेज में अभिभावकों ने आरोप लगाया कि कॉलेज न चार घंटे तक उन्हें इस कारण लटकाए रखा। आखिरकार दाखिले से मना कर दिया। अभिभावक मामले को लेकर खुलकर सामने नहीं आ रहे हैं। इनका कहा है कि सार्वजनिक होने पर उनके बच्चों को दखिला नहीं दिया जाएगा। वहीं कैंपस में कॉलेज प्रशासन और छात्रों व उनके अभिभावक में कहासुनी हो गई।

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