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भूमि अधिग्रहण कानून में नहीं होने देंगे छेड़छाड़ः मेधा पाटकर

भूमि अधिग्रहण कानून में नहीं होने देंगे छेड़छाड़ः मेधा पाटकर

कड़े संघर्षो के बाद भूमि अधिग्रहण कानून में बदलाव किए गए हैं, लेकिन मोदी सरकार बिना संवाद के अपनी नीतियों को हम पर थोपना चाह रही है। ऐसा नहीं होने दिया जाएगा। जल, जंगल, जमीन और खनिज के लूट के मामले में वर्तमान सरकार पिछली सरकार से भी अधिक खतरे का संकेत दे रही है।

पहले हम कम-से-कम विरोध कर सकते हैं, लेकिन अब जन आंदोलनों पर रोक लगाने की साजिश की जा रही है। ये बातें प्रख्यात गांधीवादी समाजसेवी मेधा पाटकर ने कहीं। वे शुक्रवार को जन आंदोलनों के राष्ट्रीय समन्वय की ओर से आयोजित ‘नई सरकार की विकास की अवधारणा’ विषय पर अपनी बातें रख रही थीं।

उन्होंने कहा कुछ कंपनियों को लाभ पहुंचाने के लिए भूमि अधिग्रहण कानून में बदलाव नहीं होने चाहिए। मौके पर आशीष रंजन, कामायनी स्वामी, अरविंद कुमार और मणिलाल ने अपनी बातें रखीं।

नर्मदा बांध की ऊंचाई बढ़ाने का निर्णय वापस ले सरकार
मेधा पाटकर ने कहा सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बावजूद सरकार बनते ही नर्मदा बांध की ऊंचाई 17 मीटर बढ़ाने की स्वीकृति दे दी है। इससे देश के ढाई लाख किसान, मछुआरे और मजदूर विस्थापित हो जाएंगे। हम इसका विरोध करते हैं।

सरकार हमारी आवाज दबाने की कोशिश कर रही है, लेकिन हम आंदोलन के लिए तैयार हैं। एक सोची-समझी चाल के तहत आईबी द्वारा झूठी रिपोर्ट के तहत एनजीओ और जनआंदोलनों पर रोक लगाई जा रही है।

सरकार विदेशी पैसा लेने वाले समूहों को एफसीआरए के नाम डरा रही है, लेकिन जो समूह पैसा नहीं लेते उन्हें गुजरात के विकास मॉडल सेमिनार में देश विद्रोही कहा जा रहा है। यह लोकतंत्र के लिए खतरनाक है। हम इसका विरोध करते हैं।

ये प्रस्ताव हुए पारित :
माध्यमिक शिक्षक संघ में जन आंदोलनों के राष्ट्रीय समन्वय की बैठक में भूमि अर्जन पुनर्वासन और पुनर्स्थापन में उचित प्रतिकर और पारदर्शिता अधिकार अधिनियम 2013 के बदलाव पर सार्वजनिक बहस होनी चाहिए। इसके अलावा विकास नियोजन में स्थानीय समूहों की सहमति और नदी जोड़ परियोजना के विरोध पर सहमति बनी।

मनी फैक्टर से सत्ता में आई भाजपा
प्रेस कॉन्फ्रेंस में पाटकर ने कहा कि मोदी फैक्टर के कारण नहीं बल्कि मनी फैक्टर के कारण भाजपा केंद्र की सत्ता में आई है। मात्र 33 प्रतिशत वोट पाने वाली सरकार से देश की 70 प्रतिशत गरीब लोगों के कल्याण व विकास की उम्मीद बेमानी है।

सिर्फ मोदी के चुनाव प्रचार में 21 हजार करोड़ व भाजपा के चुनाव प्रचार में 31 हजार करोड़ खर्च हुए। पूंजीपति घरानों से पैसे लेकर उनके हक में मोदी सरकार ने कार्रवाई करनी शुरू कर दी है। उन्होंने कहा कि नर्मदा बांध की उंचाई 17 मीटर बढ़ाने से 2.5 लाख आदिवासी, मछुआरे व किसान विस्थापित होंगे। इसका विरोध किया जाएगा। उन्होंने नदी जोड़ों योजना को भी पूंजीपति समर्थक कदम बताया।

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