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जानिए कांठ विवाद की पूरी कहानी, डीएम की जुबानी

जानिए कांठ विवाद की पूरी कहानी, डीएम की जुबानी

ट्रेन रोके जाने की सूचना पर मैं और एसएसपी फोर्स संग तुरंत मौके पर पहुंच गए। यहां हंगामा कर रहे लोगों को मैं और एसएसपी दूर से समझने की कोशिश कर रहे थे। कुछ लोग रेलवे ट्रैक से हटने को तैयार हो रहे थे। इसी बीच किसी शख्स ने लोगों को भड़का दिया। इसके बाद बवालियों ने हम लोगों पर पथराव कर दिया। कई पत्थर मेरे चेहरे और शरीर पर लगे। जिससे मैं लहूलुहान हो गया। एक साथ कई सौ लोगों ने हमला बोला था। जिस कारण लोग अपनी जान बचाने को इधर उधर भागने लगे। भागते समय मैं रेलवे ट्रैक किनारे झंड़ियों में गिर गया। इसके बाद क्या हुआ। ठीक से याद नहीं है।

कॉसमॉस अस्पताल में प्राथमिक उपचार कराने के बाद इमरजेंसी कक्ष से बाहर आए जिला अधिकारी चंद्रकांत बुरी तरह से घबराए हुए थे। वह पसीने से तर बतर थे। उन्होंने रुक रुक कर कांठ स्टेशन पर हुए बवाल की कहानी बयां की। इसके बाद उन्हें आईसीयू में कुछ समय के लिए भर्ती कराया गया। इसके बाद बेहतर इलाज के लिए चेन्नई भेज दिया गया है। 

जिला अधिकारी चंद्रकांत के एस्कोर्ट में तैनात पुष्पराज सिंह, अमित, जितेंद्र कुमार और गनर सतीश कुमार ने बताया कि ट्रेन रोकने की जब सूचना मिली थी। उस वक्त सभी अधिकारी कांठ थाने में मौजूद थे। सूचना मिलने के तुरंत बाद जिला अधिकारी एसएसपी एक ही गाड़ी में बैठ कर घटनास्थल की ओर रवाना हो गए। वहां देखा तो सैकड़ों लोग ट्रैक पर मौजूद थे। लोगों ने दोनों तरफ से आने वाली ट्रेनें रोक रखी थी। लोग ट्रेन पर पथराव कर रहे थे। पुलिस प्रशासन के खिलाफ  नारेबाजी कर रहे थे। अचानक लोगों ने एक साथ अधिकारियों पर पथराव कर दिया। जिसमें अधिकारी समेत कई लोग घायल हो गए। इसके बाद हम लोगों ने घेरा बनाकर साहब को वहां से निकाला। जिसमें हम लोगों को भी पत्थर लगे। जिसमें सभी लोग घायल हो गए। 

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