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डॉन बनना चाहता था लाखन, मांगी थी रंगदारी

मलपुरा के गांव बमरौली अहीर में सिपाही की हत्या के बाद फरार हुआ लाखन यादव डॉन बनना चाहता है। जेल से रिहाई के बाद उसका अंदाज बदल गया था। आते ही उसने लोगों को हड़काना शुरू कर दिया था। रंगदारी मांगी थी। शक्ति प्रदर्शन के समय उसके पास बड़ी संख्या में दूसरे जिलों के बदमाश थे। पुलिस को उसकी आखिरी लोकेशन मध्य प्रदेश में मिली थी। वहां दबिश दी गई मगर कोई सुराग नहीं मिला।

गांव बमरौली अहीर निवासी लाखन यादव पुत्र नवल सिंह इस समय आगरा पुलिस के लिए सबसे बड़ी चुनौती बन गया है। कुख्यात हरेंद्र राणा की संगति ने उसे और भी खतरनाक बना दिया है। हरेंद्र जेल में है मगर रिहा हुआ लाखन उसी के नक्शे कदम पर चल रहा है। इसी का परिणाम है कि गांव में सिपाही को गोली मारते समय उसके हाथ नहीं कांपे। ग्रामीणों की मानें तो जेल से रिहाई के बाद लाखन यादव इलाके में अपना दबदबा बनाने में जुट गया था। उसने आते ही सबसे पहले जमीन के विवादों में टांग फंसाना शुरू कर दिया था। उसके बाद एक-एक करके चार लोगों को रंगदारी मांगी थी। दो लोगों से उसने कुछ पैसा भी ले लिया था। शिक्षा जगत से जुड़े एक व्यक्ति को लगातार धमका रहा था। पांच लाख रुपये नहीं देने पर हत्या की धमकी दे रहा था। जिनसे रंगदारी मांगी गई थी, वे दहशत में पुलिस के पास तक नहीं गए थे।

ग्रामीणों के अनुसार लाखन इलाके में अपने नाम की इतनी दहशत पैदा करना चाहता है कि एक फोन पर लाखों रुपये आराम से मिल जाएं। कोई उसके खिलाफ जुबान खोलने की हिम्मत नहीं जुटा पाए। मलपुरा में अपने नाम की दहशत व्याप्त करने के इरादे से ही उसने अपने बाहर के साथियों को बुला रखा था। उनसे उसकी मित्रता जेल के अंदर हुई थी। ग्रामीणों की मानें तो वर्तमान में उसके साथ छह-छह फीट लंबे लड़के रह रहे थे। सभी के पास हथियार रहते थे। लाखन गांव में आता था, मगर अपने घर पर बहुत कम देर रुकता था। उसने आगरा में ही कोई दूसरा ठिकाना बना रखा था। दूसरे जिलों के बदमाशों को साथ लेकर उसने बाइक रैली निकाली थी। हथियार लहराए थे। वह मुस्तफा क्वार्टर में टीटू यादव के घर भी गया था। वहां उसने फायरिंग की थी। घरवालों को धमकाया था कि मुकदमे में पैरवी करना बंद कर दें वरना घर में कोई नहीं बचेगा।

सिपाही हत्याकांड के बाद उसकी तलाश में जुटी पुलिस को यह जानकारी मिल रही है। फिलहाल उसका कोई सुराग नहीं मिला है। पुलिस को खबर मिली है कि वारदात के बाद वह ग्वालियर की तरफ भागा है। वहां हरेंद्र राणा के गुर्गे उसे शरण दे सकते हैं। वह बेखौफ हो चुका है। हत्या का यह तीसरा मुकदमा उसके खिलाफ दर्ज हुआ है। कोर्ट कचहरी और जेल की रोटी से वह अच्छी तरह वाकिफ है। अपराध की राह पर इतना आगे निकल चुका है कि जहां से वापस लौटना मुश्किल है। फरार लाखन के सिर पर इनाम की तैयारी है। पहले एसएसपी स्तर से उस पर पांच हजार का इनाम घोषित होगा। उसके बाद डीआईजी 12 हजार के इनाम की संस्तुति करेंगे।

जांच में फंस सकती है एसओ की गर्दन
बमरौली अहीर में दो जुलाई की रात क्या हुआ था। किन परिस्थितियों में सिपाही प्रदीप कुमार यादव को गोली लगी थी, इसकी जांच शुरू हो गई है। दबिश में कौन-कौन गया था। यह जानने के लिए सभी की कॉल डिटेल निकलवाई जा रही है। तत्कालीन एसओ मलपुरा सीपी सिंह ने खुद को दबिश टीम में शामिल दिखाया था। जीडी में उनकी रवानगी थी।

घटना की सूचना पर आईजी जोन सुनील कुमार गुप्ता, डीआईजी विजय सिंह मीणा और एसएसपी शलभ माथुर तत्काल घटना स्थल पर पहुंचे थे। एसओ ने उन्हें घटना स्थल का निरीक्षण कराया था। यह भी बताया था कि वह यहां खड़े हुए थे।

अधिकारियों ने उनकी बात को सही माना था। यह भी मान लिया था कि वह दबिश में साथ गए थे। बाद में एसओ के खिलाफ बने माहौल ने अधिकारियों के कान खड़े कर दिए। एसओ ने अधिकारियों से उस समय झूठ बोला होगा तो उसके खिलाफ सख्त विभागीय कार्रवाई तय है। फिलहाल उनका निलंबन हुआ है। जांच शुरू हो गई है। एसओ दबिश में गए होंगे तो उनकी लोकेशन वहां पर ही मिलेगी। दबिश में जिन सिपाहियों को शामिल दिखाया गया है, उनकी भी कॉल डिटेल निकलवाई जा रही है। यह देखा जाएगा कि घटना के समय उनकी लोकेशन कहां थी। उन्होंने घटना के बाद किसे फोन किया था। जिसे फोन किया था उसकी लोकेशन कहां पर थी। प्रारंभिक जांच में क्या निकलकर आ रहा है फिलहाल यह कोई बताने को तैयार नहीं है। एसएसपी ने इतना माना है कि पूरे प्रकरण में अभी तक एसओ की घोर लापरवाही उजागर हुई है।

समर्पण कर सकता है लाखन
पुलिस को खबर मिल रही है कि लाखन यादव ज्यादा लंबी फरारी नहीं काटेगा। वह समर्पण करेगा, ताकि पुलिस का भय उसे परेशान नहीं करे। वह यह अच्छी तरह जानता है कि जेल से सुरक्षित ठिकाना उसके लिए कोई और नहीं है। वह किसी मुकदमे में जमानत कटाकर जेल जा सकता है। सिपाही हत्याकांड में समर्पण नहीं करेगा। इस मुकदमे में समर्पण करेगा तो पहले मलपुरा थाने से रिपोर्ट मांगी जाएगी। हरेंद्र राणा के गुर्गे किसी दूसरे मामले में ग्वालियर में भी उसकी गिरफ्तारी करा सकते हैं। हरेंद्र राणा की गिरफ्तारी भी नाटकीय अंदाज में हुई थी। पूर्व में कई कुख्यात इसी तर्ज पर अपनी गिरफ्तारी करा चुके हैं। वे यह जानते हैं कि जेल जाने के बाद पुलिस कुछ नहीं कर सकती है। सिर्फ पूछताछ के लिए रिमांड पर लेती है।

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