DA Image

अगली स्टोरी

class="fa fa-bell">ब्रेकिंग:

दिल्ली चुनाव के सिलसिले में भाजपा की बढ़ी मुश्किलें

दिल्ली चुनाव के सिलसिले में भाजपा की बढ़ी मुश्किलें

नई सरकार पर दिल्ली में राजनीति बवाल थमता नजर नहीं आ रहा है। जहां एक तरफ आप पार्टी ने राष्ट्रपति को चुनाव कराने की सिफारिश कर डाली है, वहीं कांग्रेस भी इस मुद्दे पर चुनाव के लिए सुर में सुर मिला रही है। हालांकि सूत्र बताते हैं कि दिल्ली विधायक चुनाव के मैदान में नहीं जाकर सीधे सरकार बनाने की दलील दे रहे हैं। इस नई पहल के बाद भाजपा  के लिए मुश्किलें और बढ़ गई हैं क्योंकि अब तक इस पर अपना पक्ष साफ नहीं कर पाई है। इस वजह से विधायकों से ज्यादा पार्टी के कार्यकर्ताओं में बवाल हैं।

दिल्ली में सरकार बनाने के लिए 36 सीटों का बहुमत चाहिए। लेकिन तीन विधायक जीतकर अब लोकसभा पहुंच गए है और भाजपा की सीटों में की आई है। बावजूद इसके एक गुट चाहता है कि सरकार बननी चाहिए। हालांकि इस तर्क पर पार्टी में बवाल इस वजह है कि पार्टी अब तक यह दावा करती रही है कि वह चुनाव के लिए तैयार है और दिल्ली के लिए केवल चुनाव ही एक मात्र विकल्प है। हाल ही में हुए केंद्र सरकार के कई अहम निर्णयों की वजह से भाजपा के नेताओं की बेचैनी बढ़ी है। विधायकों ने इस पर चिंता जाहिर किया है और संदेह जताया है कि ऐसी स्थिति में चुनाव होने से पार्टी के लिए मुश्किलें खड़ी हो जाएंगी।

क्या है भाजपा का सर्वे
एक के बाद एक कड़े फैसले आने वाले चुनावों में भाजपा के लिए मुसीबत खड़ी कर सकते हैं। इन से भाजपा का ग्राफ तेजी नीचे गिरा है। सूत्र बताते हैं कि विधानसभा में एक सर्वे कराया गया है। यह सव्रे करीब 40 हजार लोगों पर हुआ है।  इसकी चिंता पार्टी को सता रही है। चुनाव की स्थिति में सबसे अधिक नुकसान 5000 तक वोट से जीतने वाले विधायकों को होगा। इनमें भाजपा के 8-10 विधायक हैं।

तीन सीटों पर ही कराएं उप चुनाव
लोकसभा चुनावों के बाद विधानसभा 3 सीट खाली हुई है।  इनमें डॉ. हर्षवर्धन, रमेश विधूड़ी और प्रवेश वर्मा शामिल हैं। इस वजह से सीट खाली हुई है और भाजपा 36 के आंकड़े से और दूर हो गया है। ऐसी स्थिति में पूर्ण चुनाव कराने की बजाय उप चुनाव से ही मदद ले ली जाए ताकि अन्य विधायकों को चुनाव के मैदान में उतरने बचाया जा सकेगा। पार्टी आलाकमान ने भी  इस फामरूले को पेश करने के लिए कहा है लेकिन इस पर अब तक कोई आखिरी निर्णय नहीं लिया है।

क्या कहते हैं दिल्ली के नेता
6 माह से आचार संहिता लगती जा रही है। काम नहीं हो रहे है, सरकार बननी चाहिए, चाहे किसी भी पार्टी की हो। तत्काल भंग किए जाने पर भी नवम्बर तक इंतजार करना होगा। जनता के काम एक लम्बे समय से लटके हैं।  आसिफ मो. खान, कांग्रेस

चुनाव होना चाहिए, दिल्ली की समस्याएं तभी हल पाएगी। लोगों को पेंशन आदि मिलने में परेशानी हो रही है और विधायक की सिफारिश पर होने वाले काम भी नहीं हो रहे हैं। : हारून युसुफ, पूर्व मंत्री व नेता कांग्रेस विधायक दल।

जल्द से जल्द चुनी हुई सरकार आनी चाहिए। जब तक सरकार नहीं बनती तब तक सांसदों के साथ मिलकर एक परिषद बननी चाहिए। जो जन समस्या और विकास पर ध्यान दें। इससे कम से कम लोगों की भागीदीरी होगी। : विजय गोयल, भाजपा नेता व पूर्व प्रदेश अध्यक्ष।

अक्तूबर में चुनाव होंगे। हरियाणा व महाराष्ट्र के साथ हमारे पास बहुमत नहीं है और कोई विकल्प नहीं है। : रामवीर सिंह विधूड़ी, विधायक भाजपा

  • Hindi Newsसे जुडी अन्य ख़बरों की जानकारी के लिए हमें पर ज्वाइन करें और पर फॉलो करें
  • Web Title:दिल्ली चुनाव के सिलसिले में भाजपा की बढ़ी मुश्किलें