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फिल्म रिव्यू : लेकर हम दीवाना दिल

फिल्म रिव्यू : लेकर हम दीवाना दिल

लेकर हम दीवाना दिल फिल्म से कपूर खानदान के एक और चिराग अरमान जैन बॉलीवुड में पदार्पण कर रहे थे, इसलिए सबकी उत्सुकता इस फिल्म को लेकर बनी हुई थी। सबका ध्यान अरमान जैन पर ही था। इसके अलावा लोगों में एक और उत्सुकता इस फिल्म के लेखक-निर्देशक आरिफ अली को लेकर भी थी। उनकी भी यह पहली फिल्म है और वे मशहूर लेखक-निर्देशक इम्तियाज अली के भाई हैं।

बतौर कहानीकार बात की जाए तो आरिफ अली एक फ्रेश लव स्टोरी लेकर आए हैं, लेकिन बतौर निर्देशक फिल्म पर उनकी पकड़ ढीली है। इम्तियाज अली वाली कसावट फिल्म में कहीं नजर नहीं आती। ठीक वैसे ही अरमान जैन बीच-बीच में बतौर अभिनेता स्पार्क तो दिखाते हैं, लेकिन उनके अभिनय में राजकपूर से लेकर करिश्मा, करीना या रणबीर कपूर वाली कोई बात नहीं है। हां, उनके अपोजिट इस फिल्म से बॉलीवुड में अभिनय करियर का आगाज कर रही दीक्षा सेठ उनसे ज्यादा प्रभावशाली हैं, हालांकि उनका अभिनय भी औसत ही है। फिल्म में ऑस्कर विजेता एआर रहमान का संगीत है। जाहिर है कि उनसे भी लोगों को उम्मीदें थीं, पर किसी गीत के संगीत में रहमान वाली ताजगी नहीं है।

फिल्म की कहानी शुरू करने से पहले फिल्म के दो संवाद देखिए- एक संवाद में नायक बोलता है कि आज हम इंटरनेट के जमाने में यूरोप के बारे में सब कुछ जानते हैं, लेकिन इंडिया के बारे में कितना कम जानते हैं। तो लगता है कि लेखक आज के एक कड़वे सच से रू-ब-रू करा रहा है। दूसरा, जब वह कहता है कि मेरा भाई अच्छा लड़का था। हर चीज में अव्वल। ऐसे में मैं घर वालों की अटेंशन तभी पा सकता था, जब मैं बुरा बनता, इसलिए मैं ऐसा हो गया। तो यह लगता है कि आरिफ अली चरित्रों का मनोविश्लेषण करने में सक्षम हैं। 140 मिनट की यह फिल्म कहीं-कहीं इसी तरह की चमक बिखेरती चलती है।

फिल्म की कहानी एक अत्याधुनिक समाज की है, जहां आभासी दुनिया ही सब कुछ है। नायक-नायिका वास्तविक जीवन की सच्चाइयों से रू-ब-रू नहीं हुए हैं। ऐसा ही एक प्रेमी युगल, जो अरेंज्ड मैरिज और प्रेम विवाह के अंतर्द्वद्व में उलझा है, घर से भाग जाता है। करिश्मा (दीक्षा सेठ) और दीनू (अरमान जैन) जब अपने प्रेम के सफर पर निकलते हैं तो उन्हें जिंदगी की तल्ख हकीकत का एहसास होता है। वे एक शहर से दूसरे शहर भागते रहते हैं। पुलिस और परिवार वाले उनके पीछे हैं, लेकिन उनके बीच का प्रेम और दीनू की यह जिद कि वह अपने पिता को गलत साबित करके रहेगा, उन्हें घर वापस जाने से रोकता है। उनके पैसे खत्म हो जाते हैं और नक्सली उन्हें पत्रकार समझ कर अपनी और अपने यहां की स्थितियों से वाकिफ कराने के लिए उन्हें जंगल में लेकर चले जाते हैं, जहां पुलिस की मुठभेड़ में उनके साथ ये भी बड़ी मुश्किल से बचते हैं। तब इनके रोमानी सपने टूट कर बिखर जाते हैं और दोनों एक-दूसरे को देख लेने की धमकी देकर अपने-अपने घर लौट आते हैं। इसके बाद क्या होता है, यह तो फिल्म देख कर ही पता चलेगा।

हां, यह फिल्म इस बात को बड़ी खूबसूरती से दिखाती है कि वर्चुअल दुनिया में जीने वाले युवा सिर्फ कल्पनाओं में जीते हैं। उनकी जानकारी वहीं तक सीमित है, जितनी वे सोशल साइट्स के जरिये जान पाते हैं।

सितारे: अरमान जैन, दीक्षा सेठ, सुदीप साहिर, रोहिणी हट्टंगड़ी, वरुण बडोला, गौतम कपूर, निशिकांत दीक्षित, निकिता दत्त, अखिल अय्यर

लेखक-निर्देशक: आरिफ अली

निर्माता: दिनेश विजन, सैफ अली खान

बैनर: इरोज इंटरनेशनल, मैडॉक फिल्म्स, इल्लुमिनाती फिल्म्स

संगीत: एआर रहमान

अवधि: 140 मिनट

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