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कचचृषि ऋण पर रोकचच केचच निर्देश पर बवाल

तीन साल में कृषि ऋण दुगुने से भी अधिक करने वाली संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन संप्रग सरकार के कार्यकाल में ही देश के सबसे बड़े बैंक स्टेट बैंक द्वारा अपनी शाखाओं को कृषि ऋण पर रोक लगाने के निर्देश देने को लेकर राजनीतिक और औद्योगिक हल्कों में तीव्र प्रतिक्रिया हुई है। प्रमुख विपक्षी पार्टी भारतीय जनता पार्टी ने जहां स्टेट बैंक के इस आदेश को तुरंत वापस लेने की मांग की है, वहीं ट्रेक्टर निर्माता संघ ने कृषि क्षेत्र और देश के सकल आर्थिक विकास के लिए देश के सबसे बडे वाणिज्यिक बैंक के इस कदम को अनुचित बताया है। स्टेट बैंक ने अपनी क्षेत्रीय प्रधान कार्यालयों को भेजे परिपत्र में नए ट्रेक्टर. कृषि यंत्रों. पावर टिलर. हारवेस्टर आदि के वित्तपोषण के लिए कर्ज देने पर फिलहाल रोक लगाने को कहा है। बैंक ने कहा है कि कुल कृषि रिण के इस हिस्से में काफी कर्ज दिया जा चुका है और बकाए की रकम काफी बढ चुकी है इसलिए अगले आदेश तक कोई नया रिण नहीं दिया जाए। बैंक के कारपोरेट सेंटर मुंबई से यह सकुर्लर 16 मई को जारी किया गया।

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  • Web Title: कचचृषि ऋण पर रोकचच केचच निर्देश पर बवाल