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पुराने कानून के तहत हुए भूमि अधिग्रहणों पर नए कानून का लाभ

पुराने कानून के तहत हुए भूमि अधिग्रहणों पर नए कानून का लाभ

सुप्रीम कोर्ट ने व्यवस्था दी है कि नए भूमि अधिग्रहण कानून के तहत उन्हीं भूमि अधिग्रहणों की प्रक्रिया को समाप्त किया जा सकता है जिनका अधिग्रहण पुराने कानून (1894) के तहत किया जा रहा था। अन्य कानूनों के तहत की जा रही अधिग्रहण प्रक्रियाओं पर 2013 से लागू नया कानून प्रभावी नहीं होगा।

मुख्य न्यायाधीश जस्टिस आरए लोढ़ा की अध्यक्षता वाली तीन जजाें की पीठ ने शुक्रवार को यह व्यस्था देते हुए पंजाब टाउन प्लानिंग एक्ट, 1922 के तहत किए जा रहे अधिग्रहण को रद्द करने से मना कर दिया। कोर्ट ने कहा कि यह लाभ सिर्फ पुराने कानून भूमि अधिग्रहण एक्ट,1894  के तहत किए गए अधिग्रहणों पर ही मिलेगा। अन्य कानूनों के तहत किए गए अधिग्रहण पर नहीं। नए कानून उचित मुआवजा, पुनर्वास व पुनस्र्थापन और पारदर्शी भूमि अधिग्रहण एक्ट, 2013 की धारा 24(2) में संसद ने यह बात बिल्कुल स्पष्ट रूप से लिखी है। इसमें अधिग्रहण की प्रकृति बहुत महत्वपूर्ण है। यदि यह 1894 के अधिग्रहण कानून के तहत की गई है और प्रक्रिया लंबित है तो उसमें नए कानून के अनुसार बढ़ा हुआ मुआवजा और लाभ मिलेंगे।

पीठ ने कहा कि उचित मुआवजा, पुनर्वास व पुनस्र्थापन और पारदर्शी भूमि अधिग्रहण कानून, 2013 की धारा 24 (2) के अनुसार जिन अधिग्रहणों में भूस्वामी को मुआवजा नहीं दिया गया है, उसका केस लंबित है या उसका जमीन का कब्जा सरकार ने नहीं लिया है तो ऐसे अधिग्रहण की कार्यवाही को निरस्त समझ जाएगा। इस भूमि का अधिग्रहण नए कानून के तहत ही हो सकेगा जिसमें मार्केट रेट से बढ़ा हुआ मुआवजा देने और भूस्वामी का पुनर्वास करने का प्रावधान है।

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  • Web Title:पुराने कानून के तहत हुए अधिग्रहणों पर नए कानून का लाभ