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बारिश का पानी बचाने में अस्पतालों की भूमिका निष्क्रिय

बारिश के पानी को बचाने की कवायद में निजी और सरकारी अस्पतालों की भूमिका निष्क्रिय है। इस संदर्भ में राष्ट्रीय हरिण न्यायाधीकरण के रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशन तथा अस्पतालों से जवाब मांगा कि वह अपने क्षेत्र में बारिश के संचयन के लिए क्या उपाय अपना रहे हैं। दह मई को भेजे गए नोटिस के बावजूद अस्पतालों ने योजना में कोई रूचि नहीं दिखाई। अब इन अस्पतालों के खिलाफ न्यायाधीकरण ने दस हजार रुपए के जुर्माने के साथ गैर जमानती वारंट जारी किया है। जबकि एम्स, सफदरजंग, बतरा और साकेत सिटी अस्पताल ने वारंट जारी करने से पहले अपना जवाब न्यायाधीकरण के सामने रखा है।

मानसून के समय बारिश के पानी को सहेज कर रखने के लिए अपनाई गई योजना के तहत राष्ट्रीय हरित न्यायाधीकरण ने सभी निजी और सरकारी अस्पतालों से संपर्क किया। न्यायाधिकरण की नोटिस को नजरअंदाज करते हुए तीन सरकारी और दो निजी अस्पतालों ने अपनी कोई प्रतिक्रिया नहीं है। जिसपर न्यायाधीकरण ने मौलाना आजाद मेडिकल कॉलेज, मौलाना आजाद डेंटल कॉलेज, वर्धमान महावीर मेडिकल कॉलेज, मैक्स और फोर्टिस अस्पताल के चिकित्सका अधीक्षकों पर दस हजार का जुर्माना और गैर जमानती वारंट जारी किया है। न्यायामूर्ति स्वतंत्र कुमार की अध्यक्षता वाली पीठ ने सभी अधीक्षकों को व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने के लिए कहा है। पीठ ने दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से कहा कि वह यह पता करें कि राज्य के सभी अस्पतालों को नोटिस जारी करके पूछा जाएं कि उन्होंने वर्षा जलसंचयन के लिए आरडब्लूएचएस लगाया है या नहीं। जिन अस्पतालों ने आरडब्लूएचएस नहीं लगाया है उन्हें चार जुलाई को प्रस्तुत होने के लिए कहा गया है। इससे पहले एम्स, बतरा व साकेत सिटी अस्पताल ने प्राधिकरण के सामने अपना पक्ष रखा।

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