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सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली विधानसभा मामला संविधान पीठ को सौंपा

सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली विधानसभा मामला संविधान पीठ को सौंपा

उच्चतम न्यायालय ने दिल्ली विधानसभा भंग करने की आम आदमी पार्टी की मांग से जुड़ा मसला आज संविधान पीठ को सौंप दिया। साथ ही न्यायालय ने स्पष्ट किया कि उपराज्यपाल दिल्ली में सरकार के गठन के बारे में कोई भी कदम उठाने के लिये स्वतंत्र हैं।
    
प्रधान न्यायाधीश आर एम लोढा, न्यायमूर्ति मदन लोकूर और न्यायमूर्ति कुरियन जोसेफ की तीन सदस्यीय खंडपीठ ने कहा, लंबित याचिका उपराज्यपाल द्वारा कोई निर्णय लेने में बाधक नहीं होगी। न्यायालय ने इस मसले को पांच सदस्यीय संविधान पीठ के समक्ष पांच अगस्त को सूचीबद्ध करने का निर्देश दिया है।
    
न्यायाधीशों ने कहा, हमारी राय है कि इस मामले में महत्वपूर्ण सांविधानिक सवाल उठाया गया और इस पर पांच न्यायाधीशों की संविधान पीठ द्वारा विचार की आवश्यकता है।
    
न्यायालय ने इस मामले में करीब एक घंटे की सुनवाई के बाद आदेश पारित किया। इस दौरान आप ने सरकार गठित करने के लिये भाजपा पर दलबदल को बढ़ावा देने का प्रयास करने और खरीद फरोख्त का आरोप लगाया जबकि केन्द्र ने कहा कि स्थिति अभी भी अस्थिर है और अब उपराज्यपाल को ही देखना है कि क्या कोई दल सरकार बनाने का दावा कर सकता है।
    
अरविन्द केजरीवाल की 49 दिन पुरानी अल्पमत सरकार के इस्तीफे के बाद दिल्ली में राष्ट्रपति शासन लागू करने को चुनौती देने वाली आप की याचिका का विरोध करने में केन्द्र में नयी सरकार ने भी भाजपा के सुर से सुर मिलाया है।
    
अतिरिक्त सालिसीटर जनरल पी एस नरसिम्हन ने सदन को भंग करने और फिर से जनादेश के लिये बाध्य करने की मांग को जल्दबाजी करार देते हुये कहा, अल्पसंख्यक सरकार का क्या अधिकार है जो इस्तीफा देने के बाद राहत चाहती है। अल्पसंख्यक सरकार के इस्तीफा देने के बाद उसके पास कोई उपाय उपलब्ध नहीं है और वह विधान सभा भंग करने की मांग नहीं कर सकती है।

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