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आप रहेंगी फिट बच्चा होगा तंदुरुस्त

आम धारणा है कि आप प्रेग्नेंट हुई नहीं कि आपको आराम शुरू कर देना चाहिए। यह बात कुछ हद तक ही सही है। अगर आप चाहती हैं कि आपकी गर्भावस्था खुशनुमा रहे तो इस दौरान आपको सही आहार, आराम और सही व्यायाम के बीच तालमेल बिठाना होगा। बता रही हैं विनीता झा

गर्भावस्था में व्यायाम करने से शरीर में जोश व स्फूर्ति बनी रहती है। साथ ही मांसपेशियों व जोड़ों का कसाव, लचीलापन व ताकत बढ़ती है। ऐंठन, कमर दर्द, वेरिकोज वेन व अन्य बीमारियों से भी बचा जा सकता है। तनाव से दूर रहने के लिए भी गर्भावस्था के दौरान व्यायाम बेहद जरूरी है। गर्भावस्था में नियमित व्यायाम से थकान और अनिंद्रा की शिकायत दूर होती है। साथ ही व्यायाम करने वाली महिलाएं मितली, उल्टी और मोटापे की शिकायत से दूर रहती है।

गाइनेकोलॉजिस्ट डॉ. दिनेश कंसल के मुताबिक गर्भावस्था के दौरान थोड़ा-सा व्यायाम आपको तरोताजा महसूस कराएगा। नियमित रूप से व्यायाम करने से शरीर में ऊर्जा का संचार होता है और अतिरिक्त चर्बी भी दूर हो जाती है। गर्भावस्था में व्यायाम करना सेहत के लिए और होने वाले बच्चे दोनों के लिए अच्छा रहता है। साथ ही सक्रिय रहने से गर्भावस्था की जटिलाताओं और प्रसव के दौरान होने वाला दर्द भी कम होता है।

यदि महिला कामकाजी है तो गर्भावस्था में वह ज्यादा एक्टिव रहती है। इतना ही नहीं गर्भावस्था में काम करते रहने से स्वास्थ्य संबंधी परेशानियों से भी बचा जा सकता है। गर्भावस्था के दौरान शारीरिक रूप से सक्रिय रहने वाली महिलाओं का रक्तचाप और वजन भी नियंत्रित रहता है। गर्भावस्था के दौरान नियमित व्यायाम से महिलाओं के गर्भस्थ शिशु का वजन भी सामान्य रहता है।


गर्भावस्था में ये व्यायाम करें
फिट रहने के लिए गर्भावस्था की शुरुआत में टहलना लाभदायक है। लेकिन बहुत ज्यादा नहीं। गर्भावस्था के दौरान नियमित रूप से व्यायाम करने से एक खास तरह के मधुमेह का खतरा भी कम होता है। इस प्रकार के मधुमेह का खतरा सिर्फ गर्भवती महिलाओं को होता है।

मांसपेशियों की स्ट्रेचिंग के लिए सबसे पहले जमीन पर लेट जाएं और दोनों पैरों को सीधा फैला लें। अपने दोनों हाथों को एक साथ सिर के ऊपर की ओर सीधे फैलाएं। उसके बाद अपनी बॉडी को स्ट्रेच करें और सांस को अंदर की ओर खींचें। इस क्रिया को तकरीबन 6 सेकेंड तक के लिये होल्ड करें और धीरे-धीरे से सामान्य हो जाएं।

गर्भावस्था के दौरान शरीर में लचीलापन लाने के लिए पीठ के बल पर लेट जाएं, पैरों को फैला लें। उसके बाद अपने दोनों घुटनों को मोड़कर मिला लें। फिर दोनों घुटनों को अपने कमर के नजदीक लेकर आएं और नमस्ते जैसा पोज बनाएं। इस पोज को 6 सेकेंड के लिए ऐसे ही रहने दें। ध्यान रखें कि पेट पर ज्यादा जोर न पड़े। इस व्यायाम से प्रसव के दौरान आसानी होती है।

सांस से जुड़े व्यायाम में सांस लेने में उपयोग होने वाली सभी मांसपेशियों का व्यायाम होता है। बच्चे के जन्म के समय मां को लंबी सांस का लेना, सांस को रोकना और जोर लगाना पड़ता है। इस कारण सांस से जुड़ा व्यायाम अपने आपमें विशेष महत्व रखता है। इस व्यायाम में अधिक से अधिक ऑक्सीजन फेफड़ों के माध्यम से रक्त में जाता है और शरीर तक पहुंचता है। इस व्यायाम के लिए पहले पालथी मारकर दरी या कालीन पर बैठ जाएं। शरीर सीधा, कमर और कंधे सीधे तथा सिर और गर्दन भी सीधा रखें। लंबी और गहरी सांस लें और फिर छोड़ें। इस क्रिया को 3 बार करें। इसके बाद लंबी सांस लें, कुछ देर रोकें और फिर सांस छोड़ें।  इस अभ्यास को भी 5 बार प्रतिदिन करना चाहिए। ऐसा करने से स्वयं ही सांस रोकने की क्षमता बढ़ जाती है। सांस को लेने और छोड़ने की क्रिया बहुत ही सावधानी और सरलतापूर्वक करनी चाहिए।

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