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सतर्क रहिए और गर्भपात से बचिए

जब किसी महिला को पहली बार पता चलता है कि वह मां बनने वाली है तो खुशियों का ठिकाना नहीं रहता। पर कई बार गर्भपात के कारण इन खुशियों पर ग्रहण लग जाता है। गर्भपात शारीरिक तौर पर ही नहीं, मानसिक रूप से भी तोड़ देता है। वास्तव में भागदौड़ भरी जिंदगी में अकसर गर्भवती महिलाएं उन लक्षणों को अनदेखा कर देती हैं, जो गर्भपात की ओर इशारा कर रही होती हैं। गर्भपात के पांच लक्षणों के बारे में बता रही हैं मृदुला भारद्वाज

मां बनना एक तकलीफदेह, लेकिन सुखद एहसास है। पर कई बार गर्भपात बच्चे के साथ सुखद भविष्य के पूरे सपने पर ग्रहण लगा देता  है। पर अगर गर्भवती महिलाएं सतर्क रहें तो समय रहते लक्षणों को पहचानकर गर्भपात के खतरे से बचा जा सकता है। अधिकांश गर्भपात शुरुआती 16 सप्ताह में हो जाते हैं। कई बार ऐसा भी होता है कि गर्भपात अंदर ही हो जाता है और मां को इसके बारे में पता भी नहीं चल पाता।

ऐसे में महिलाओं के लिए उन संकेतों को पहचानना जरूरी हो जाता है, जो मिसकैरिज के हो सकते हैं। वरिष्ठ स्त्री रोग विशेषज्ञ उमा रानी कहती हैं कि जब महिला पहली बार मां बनती है तो उसे गर्भावस्था के बारे में कुछ नहीं पता होता। वह गर्भावस्था को लेकर खुश और उत्साहित तो होती है, लेकिन अपना और बच्चे का कैसे ध्यान रखना है, यह जानकारी उसे नहीं होती। अपनी ओर से पूरा ध्यान रखने के बावजूद कई बार दुर्भाग्य से गर्भपात हो ही जाता है। ऐसे में महिलाओं के लिए बहुत जरूरी है कि वह गर्भपात के संकेतों को पहचानें और समय रहते डॉक्टर से संपर्क कर लें: 

हैवी ब्लीडिंग: कई बार महिलाओं को पूरी गर्भावस्था के दौरान ब्लड के हल्के-हल्के स्पॉट का अनुभव होता है, लेकिन गर्भावस्था के दौरान जब महिला को हैवी ब्लीडिंग हो तो यह मिसकैरिज का संकेत होता है। कई बार गर्भावस्था के शुरुआती दिनों में ही योनि से खून के थक्के से निकलने गते हैं, यह भी मिसकैरिज का ही संकेत होता है। यह खून के थक्के हैवी ब्लीडिंग के कारण ही होते हैं।

दर्द : गर्भावस्था के शुरुआती दिनों में पेट के निचले हिस्से में दर्द होना भी गर्भपात का संकेत है। यह दर्द धीरे-धीरे फैलता है और पेल्विक हिस्से और कमर के निचले हिस्से तक फैल जाता है। यह दर्द लगातार और बहुत तेज होता है।
युरिनरी समस्या: बार-बार पेशाब के लिए जाना और पेशाब करते समय निचले हिस्से में दर्द होना, सफेद और गुलाबी रंग का बहुत ज्यादा डिस्चार्ज होना भी गर्भपात के संकेत होते हैं।
भ्रूण का मूवमेंट बंद होना: महिलाओं को बच्चे के मूवमेंट के बारे में चौथे महीने से पता चलना शुरू हो जाता है। यह ऐसा समय होता है, जब मां अपने बच्चे के हिलने-डुलने को महसूस करने गती है। लेकिन यदि बच्चे का यह मूवमेंट रुक जाए तो इसे खतरे की घंटी मानना चाहिए और तुरंत डॉक्टर के पास जाना चाहिए।
अन्य लक्षण: इसके अलावा वजन में गिरावट आना, ब्रेस्ट का कड़ा होना, मितली आना, हाई ब्लड प्रेशर, डायबिटीज, किडनी में समस्या, यूट्रस में असामान्यता भी गर्भपात के लक्षण हैं।


क्यों होता है गर्भपात
गर्भपात के मुख्य कारण आनुवंशिक ही होते हैं। लेकिन ज्यादातर गर्भपात असामान्य क्रोमोजोम की वजह से होते हैं। इसके कुछ अन्य कारण इम्यूनोलॉजिकल डिसऑर्डर, एनाटॉमिक कारण, बैक्टीरिया और वायरस के इन्फेक्शन और एंडोक्राइन है। गर्भावस्था के दौरान पहले तीन महीने महिलाओं के लिए बहुत ही महत्वपूर्ण माने जाते हैं। इस दौरान उन्हें यह ध्यान रखना जरूरी हो जाता है कि वे जो कुछ भी खाएंगी, वह उनके मुंह और फेफड़ों द्वारा गर्भ में पल रहे उनके बच्चे तक पहुंचेगा। ऐसे में महिलाओं द्वारा सिगरेट, तंबाकू, शराब और किसी भी नशीली चीज का सेवन बच्चे को भी नुकसान पहुंचा सकता है, क्योंकि बच्चा अभी अपने विकास के पहे चरण में ही होता है। अपने सुरक्षित गर्भ की दृष्टि से महिलाओं को इस दौरान तब तक एक्स रे और सीटी स्कैन नहीं कराना चाहिए, जब तक कि डॉक्टर न कहें। इस तरह से इन सब बातों का ध्यान रखकर महिलाएं काफी हद तक गर्भपात की आशंका कम कर सकती हैं।

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