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महिलाओं को अधिक परेशान करता है क्रॉनिक माइग्रेन

माइग्रेन ऐसी बीमारी है, जो महिलाओं को ज्यादा परेशान करती है। एक बार किसी को यह बीमारी घेर ले तो जीवनभर पीछा नहीं छोड़ती। दवाओं, जीवनशैली में सुधार और टॉक्सिन टाइप ए जैसे विकल्प अपना कर माइग्रेन को नियंत्रित रखा जा सकता है।

तीस वर्षीया रेहाना को पिछले पांच वर्षों से भयंकर सिरदर्द रहता है, लेकिन उन्होंने इसे कभी गंभीरता से नहीं लिया। शुरुआती वर्षों में यह सिरदर्द भयंकर तो था, लेकिन कभी-कभी ही उभरता था। समय बीतने के साथ ही उनके कष्टकारी सिरदर्द की रफ्तार बढ़ती गई। इससे उनका कामकाज बुरी तरह प्रभावित हो गया, मित्रों के दबाव में जब वह डॉक्टर से मिलीं तो डॉक्टर ने तुरंत पहचान लिया कि वह क्रॉनिक माइग्रेन से पीड़ित हैं।

कई बार दवा लेने और अन्य उपचार आजमाने के बाद उन्हें दर्द से निजात पाने के लिए बोटॉक्स नाम से प्रचलित ओनाबोटुलिनम टॉक्सिन टाइप ए का इंजेक्शन लेने की सलाह दी गई। छह वर्षों तक सिरदर्द की पीड़ा झेलते रहने के बाद आज रेहाना सामान्य और अधिक सक्रिय जिंदगी जी रही हैं।

क्या होता है इसमें
बार-बार सिरदर्द की परेशानियों की वजह से अकसर उल्टी, मिचली, गर्मी, रोशनी या तेज आवाज के प्रति संवेदनशीलता तथा चक्कर आने की शिकायत उत्पन्न होती है। माइग्रेन ऐसी लाचार कर देने वाली बीमारी है, जो आपकी जिंदगी को अस्त-व्यस्त कर सकती है। इस वजह से अकसर आपको घर के अंदर ही रहने के लिए मजबूर होना पड़ जाता है और आपकी कार्यक्षमता प्रभावित हो सकती है।

क्या इससे मुक्ति संभव है
क्रॉनिक माइग्रेन की स्थिति से पूरी तरह उबरा नहीं जा सकता। प्रभावी डॉक्टरी सलाह और इलाज के जरिए इस पर काबू पाया जा सकता है। दवाओं, पोषाहार सप्लीमेंट का सेवन, लाइफस्टाइल में बदलाव तथा माइग्रेन उत्पन्न करने वाले हालात के प्रति सावधान रहने से बहुत मदद मिल सकती है। इसी तरह ओनाबोटुलिनम टॉक्सिन टाइप ए का इंजेक्शन भी कारगर हो सकता है।
(बीएल कपूर हॉस्पिटल के सीनियर कंसल्टेंट एंड डायरेक्टर (डिपार्टमेंट ऑफ न्यूरोलॉजी) डॉ. अतुल प्रसाद से बातचीत पर आधारित)

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  • Web Title:महिलाओं को अधिक परेशान करता है क्रॉनिक माइग्रेन