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तुषार भी होते तो..

ाश तुषार खांडेकर और टीम में होते, हम चैंपियन बन कर ही आते। वाकई एक सीनियर फॉरवर्ड की कमी हमें जरूर खली। यह कहना है कि भारतीय हॉकी टीम के कोच ए.के. बंसल का। हॉकी टीम अजलान शाह कप का फाइनल अर्जेटीना से गोल्डन गोल से हार गई थी। अजलान शाह कप के लिए तुषार का भी टीम में चयन हुआ था लेकिन वह मलयेशिया पहुंच नहीं पाए। तुषार के अनुभव को देखते हुए उन्हें टीम का कप्तान तक बनाया गया था। बाद में आनन-फानन में टीम की कप्तानी का जिम्मा सरदारा सिंह को दिया गया। टीम पहले दो मैच हारने के बाद फाइनल तक पहुंची थी। किसी को भी इसकी उम्मीद नहीं थी। खुद कोच को भी नहीं। उन्होंने कहा भी, ‘दो मैच हारने के बाद मुझे तो वाकई उम्मीद नहीं थी। लेकिन लड़कों ने काफी मेहनत की। वैसे मैं पाकिस्तान मैच को टर्निग पॉइंट मानता हूं।’ भारत ने पाकिस्तान को अजलान शाह कप में 2-1 से हराया था। कोच ने कहा, ‘कामयाबी की तरफ बढ़ा यह हमारा पहला कदम है और हमें इससे बहुत कुछ सीखना है।’ उन्होंने ड्रैग फ्लिकर संदीप सिंह की तारीफ की, ‘संदीप के प्रदर्शन ने टीम की जीत में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उनका इसी तरह खेलते रहना देश के लिए फायदेमंद होगा।’ संदीप के प्रदर्शन किया है उसने साबित किया है कि वह जुगराज सिंह से आगे दो कदम आगे निकल चुके हैं। उन्होंने आगे कहा, जुगराज जिस समय पीक पर थे उसी दौरान उनके साथ ट्रैोडी हो गई। 2000 में जब बंसल सहायक कोच थे उस समय टीम ने कांस्य पदक जीता था। इस बार वह चीफ कोच के रूप में टीम के साथ थे और टीम रात पदक जीतने में सफल रही। टीम में जूनियर खिलाड़ियों के प्रदर्शन के बार में पूछने पर कोच ने कहा, ‘सीनियर टूर्नामेंट में खेलने का नुभव जूनियर विश्व कप और जुलाई में होने वाले जूनियर एशिया कप में काम आएगा। टूर्नामेंट के दौरान जूनियर और सीनियर में भी अच्छा तालमेल रहा।’ं

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