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जमशेदपुर में कम दर पर हुई सैकड़ो रजिस्ट्री

जमशेदपुर वरीय संवाददाता। जमशेदपुर में निर्धारित दर से कम पर बड़े पैमाने पर जमीन की रजिस्ट्री हुई। ऐसे मामलों की संख्या कम से कम पांच सौ होगी। ये मामले 2010 से जून 2013 के बीच के हैं। इस दौरान जिला सब रजिस्ट्रार के पद पर रमाकांत तिवारी हुआ करते थे।

इस बात के दस्तावेजी सबूत हैं कि उन्होंने व्यावसायिक जमीन की रजिस्ट्री खेती के दोन व टांड़ श्रेणी में कर दी। इसलिए खरीदार को कम स्टाम्प और शुल्क चुकाना पड़ा, लेकिन इस वजह से सरकार को करोड़ो के राजस्व का नुकसान हुआ है। फिलहाल तिवारी उत्तरी छोटानागपुर प्रमंडल (हजारीबाग) के नबिंधन कार्यालयों के निरीक्षक हैं। उन्होंने हाल में बोकारो में इलेक्ट्रो स्टील कंपनी को अप्रैल 2006 में हुई जमीन रजिस्ट्री के मामले में सरकारी राजस्व को नुकसान पहुंचाने के मामले की जांच की है।

उस मामले में इलेक्ट्रो स्टील ने करीब बारह लाख रुपये की अंतर राशि जमा भी कर दी है। पर उन्होंने बोकारो के तत्कालीन जिला सब रजिस्ट्रार अशोक कुमार सिन्हा के खिलाफ कार्रवाई की अनुशंसा विभाग से की है। सिन्हा अभी जमशेदपुर के जिला सब रजिस्ट्रार हैं।

मामले का दूसरा पहलू यह है कि उन्होंने खुद जमशेदपुर का जिला सब रजिस्ट्रार रहते बड़े पैमाने पर यही काम किया। कुछ रजिस्ट्री की बानगी 1. 20 जनवरी 2011 को हुरलुंग मौजा की 13 डिसमिल जमीन बिकी।

खरीदार शहर का एक रसूखदार बिल्डर है। इस जमीन को खेती की दोन जमीन बताकर खरीद-बिक्री हुई। इसके कारण मात्र 4,99,428 रुपये का राजस्व मिला। यदि इसकी खरीद-बिक्री आवासीय श्रेणी में होती तो 9.58 लाख और व्यावसायिक में होती तो 21.45 लाख रुपये का राजस्व मिलता।

2. 31 जुलाई 2010 को पोटका के मौजा हल्दीपोखर की 587.5 डिसमिल जमीन की रजिस्ट्री हुई। इसे मेसर्स टीसी एग्रो प्रोडक्ट्स ने खरीदा। से दोन जमीन दर्शाकर 6,62,500 रुपये का शुल्क चुकाया गया। अगर यह जमीन आवासीय श्रेणी में बिकती तो 18.21 लाख और व्यावसायिक में होने पर 1.35 करोड़ रुपये का राजस्व मिलता।

3. 14 दसिंबर 2012 को मौजा भिलाईपहाड़ी की 51 डिसमिल जमीन दोन श्रेणी में स्वाति विनकोम प्रा. लि. ने खरीदी। इसके लिए मात्र 5.36 लाख रुपये चुकाए गए। अगर यह जमीन आवासीय या व्यावसायिक श्रेणी में बिकती तो खजाने में 12.24 लाख रुपये जमा होता।

4. 15 अक्टूबर 2010 को खाखरीपाड़ा मौजा की 53.5 डिसमिल जमीन दोन बताकर खरीद-बिक्री हुई। खरीदारी अल्टीयस इंटरप्राइजेज के नाम से हुई। इसके एवज में मात्र 11.77 लाख चुकाए गए। जबकि यह आवासीय में रजिस्ट्री होती तो 40.12 लाख और व्यावसायिक में होती तो 97.10 लाख रुपये का राजस्व मिलता।

5. 18 नवंबर 2011 को खाखरीपाड़ा मौजा की सवा 33 डिसमिल जमीन टांड़ श्रेणी में बिकी। स्टाम्प व रजिस्ट्री फीस के रूप में मात्र 7.31 लाख चुकाए गए। अगर यह आवासीय होता तो 24.93 जबकि व्यावसायिक होता तो 60.34 लाख रुपये का राजस्व सरकार को मिलता।

प्रावधान है कि अगर किसी जमीन का उचित स्टाम्प व शुल्क नहीं वसूला गया है, तो विधवित प्रक्रिया अपनाकर अतिरिक्त स्टाम्प शुल्क की वूसली की जा सकती है। उपायुक्त की अनुमति से वर्तमान सब रजिस्ट्रार इसकी वसूली कर सकते हैं। - रमाकांत तिवारी, नबिंधन कार्यालयों के निरीक्षक, उत्तरी छोटानागपुर।

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