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लक्ष्मणटुंडा पुल है नक्सलियों के गुजरने का सेफ जोन

डुमरी। प्रतिनिधि। निमियाघाट थाना क्षेत्र में बड़कीटांड़ के समीप पुलिस व नक्सलियों के बीच 29 जून की रात मुठभेड़ पहली घटना नहीं है। 1993 व 2008 में भी इसी स्थल पर मुठभेड़ हुई थी। उस समय पुलिस को कोई सफलता नहीं मिली थी बल्कि भारी क्षति उठानी पड़ी थी। कई दिनों तक छापामारी अभियान चलाया गया था। बताया जाता है कि नक्सलियों के लिए झुमरा पहाड़ से निकलने के बाद खांखी, लक्ष्मण मोड़ व बड़कीटांड़ होते हुए पारसनाथ पहाड़ जाने का यह रास्ता सेफ कॉरिडोर माना जाता है।

पुलिस को भी इस क्षेत्र से नक्सलियों के गुजरने की सूचना मिलती रही है। हालांकि अधिकतर सूचना नक्सलियों के गुजरने के बाद मिली है। इस कारण पुलिस चाहकर भी कुछ नहीं कर सकी है। बताया जाता है कि 07 अगस्त 2008 को भी पुलिस को सूचना मिली थी कि माओवादी के कुछ बड़े नेता अपने पूरे दस्ता के साथ इसी रास्ते पारसनाथ पहाड़ जानेवाले हैं। जिला पुलिस और सीआरपीएफ ने लक्ष्मणमोड़ से बड़कीटांड़ के इस कॉरिडोर पर मोर्चाबंदी की थी।

उस समय रात करीब एक बजे माओवादियों ने ठीक लक्ष्मण पुल पार किया लेकिन पुलिस के होने की भनक मिल गई। इसके बाद जमकर मुठभेड़ हुई। आधे घंटे की मुठभेड़ में सीआरपीफ के दो जवान शहीद हो गए और पुलिस को भारी क्षति उठानी पड़ी। घटना के बाद मौके पर मिले आठ जोड़ी चप्पल और पूरे रास्ते में गिरे खून के धब्बे से अनुमान लगाया गया था कि इस मुठभेड़ में कुछ नक्सली भी घायल हुए थे। इसी तरह वर्ष 1993 में भी पुलिस और नक्सलियों के बीच यहां जमकर मुठभेड़ हुई थी।

परंतु पुलिस को कुथ हाथ नहीं लगा था। इस बार पुलिस को सफलता हाथ लगी। रविवार रात मुठभेड़ के बाद पुलिस को भारी पड़ता देख नक्सली भागने में सफल रहे। पुलिस ने एक राइफल, एक लैंड माइंस, 64 कारतूस, तार व भारी मात्रा में दवा व अन्य सामान बरामद कर लिया।

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