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दस साल में 60 लाख टन प्रतिवर्ष दुग्ध उत्पादन की जरूरत

दस साल में 60 लाख टन प्रतिवर्ष दुग्ध उत्पादन की जरूरत

केंद्रीय कृषि मंत्री राधा मोहन सिंह ने कहा कि उपभोक्ताओं एवं दुग्ध उत्पादकों में संतुलन बनाए रखने के लिए आने वाले दिनों में दूसरी श्वेत क्रांति शुरू करने की जरूरत है।

राधा मोहन सिंह धारुहेड़ा स्थित देश के सबसे बड़े सहकारी दुग्ध उत्पादन ‘महसाणा जिला सहकारी दुग्ध उत्पादक संघ’ के केंद्र दूध सागर डेयरी में आयोजित कार्यक्र म को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि अगले दस साल में देश में तकरीबन साठ लाख टन प्रतिवर्ष दुग्ध उत्पादन की जरूरत होगी। यदि मांग के अनुरूप उत्पादन में वृद्धि नहीं की गई तो हमें बाहरी देशों से दुध आयात करना पड़ेगा। सरकार ने दुग्ध उत्पादन और विक्रय को सिर्फ सहकारी समितियों के जरिए दस से पंद्रह फीसदी उत्पादन बढ़ाने का लक्ष्य रखा है।
 
इस अवसर पर सहकारी अभियान के चेयरमैन विपुल चौधरी ने कहा कि दूसरी श्वेत क्रांति की जरूरत जताई। उन्होंने कहा कि देश में डेयरी उद्योग को संरक्षण देने और उसे प्रोत्साहित किए जाने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि इन कदमों को तत्काल उठाना होगा। मनरेगा की तरह दुग्ध उत्पादन के लिए महिलाओं और युवकों को प्रोत्साहित करना होगा। पशुपालकों और उनके पशुओं को संरक्षण देना होगा। पशु आहार की पर्याप्त उपलब्धता भी सुनिश्चित करनी होगी। उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि दुग्ध उत्पादन बढ़ाने के लिए वैज्ञानिक, तकनीकी और कारोबारी प्रयास करने होंगे। ‘हिन्दुस्तान’ को उन्होंने बताया कि इस बाबत उन्होंने कृषि मंत्री को अवगत कराया है। उन्होंने इस बाबत गंभीरता दिखाई है। कार्यक्रम में सहकारी विकास संगठन, राजनीतिक दलों के प्रतिनिधि और गुजरात से सहकारी आंदोलन से जुड़े तकरीबन 2500 पशुपालक जुटे थे।

सनद रहे कि ‘महसाणा जिला सहकारी दुग्ध उत्पादक संघ’ के हरियाणा के मानेसर और धारुहेड़ा में दो प्लॉट है। गुजरात में कंपनी ने महसाणा, पाटन और कादी में तीन प्लॉट हैं। इन प्लॉट से दिल्ली और एनसीआर को अमूॅल ब्रांड के नाम से दुध की आपूर्ति की जाती है।

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