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हार के बाद यूथ कांग्रेस ने की चुनाव से तौबा!

हार के बाद यूथ कांग्रेस ने की चुनाव से तौबा!

लोकसभा चुनाव में शर्मनाक हार के बाद यूथ कांग्रेस के अंदरूनी चुनावों को लेकर उठ रहे सवालों के बीच कांग्रेस ने नए प्रयोग को बंद कर पुराने तौर-तरीकों पर लौटना शुरू कर दिया है। पार्टी यूथ कांग्रेस चुनाव में बदलाव के साथ युवा नेताओं को मनोनीत करने का भी प्रावधान कर रही है। अभी तक मनोनीत करने का प्रावधान नहीं था।

यूथ कांग्रेस ने संगठन में चुनाव की शुरुआत पार्टी उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने की थी, पर हार के बाद पार्टी ने सुधारों को लेकर सभी प्रदेश अध्यक्षों को एक प्रस्ताव भेजा है। इसके तहत सभी यूथ कांग्रेस प्रदेश अध्यक्षों को अपनी कमेटी में 25 से 45 सदस्यों वाली कमेटी के गठन का अधिकार दिया गया है। प्रदेश अध्यक्ष अपनी पसंद के युवा नेताओं को संगठन में जगह दे सकता है। मौजूदा प्रक्रिया में सिर्फ चुनाव के जरिए ही कोई युवा सदस्य उपाध्यक्ष, महाससिव या सचिव बन सकता है।

इसके साथ यूथ कांग्रेस ने लोकसभा और विधानसभा क्षेत्र के मुताबिक कमेटियों के गठन से भी तौबा कर ली है। यूथ कांग्रेस में अब पहले की तरह जिला यूथ कांग्रेस और ब्लॉक यूथ कांग्रेस कमेटियों का ही गठन किया जाएगा। खासबात यह है कि यूथ कांग्रेस में सिर्फ प्रदेश और जिला कमेटियों के लिए चुनाव होगा। पंचायत और वार्ड कमेटियों में सदस्यों के तौर पर शक्ति प्रदर्शन के आधार पर युवाओं को जगह दी जाएगी।

यूथ कांग्रेस में चुनाव की शुरुआत पार्टी उपाध्यक्ष राहुल गांधी के पार्टी में आंतरिक लोकतंत्र कायम करने ने की थी। इसलिए, प्रक्रिया में बदलाव को काफी अहम माना जा रहा है। लोकसभा में हार की समीक्षा कर रही एंटनी समिति के सामने लगभग सभी नेताओं ने यूथ कांग्रेस में चुनाव प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं। हार के बाद हुई यूथ कांग्रेस कार्यकारणी की बैठक में भी चुनाव को फौरन बंद करने की मांग उठी थी।

क्या हैं अहम बदलाव
यूथ कांग्रेस में पदाधिकारियों की उम्र सीमा 35 से बढ़ाकर 38 साल की गई है। 25 से 35 साल की उम्र के दौरान ही युवा चुनाव लड़ सकता है। पहले चुनाव लड़ने की उम्र 18 साल थी।
प्रदेश से लेकर ब्लॉक कमेटी अध्यक्ष को काम नहीं करने वाले पदाधिकारी को हटाने का अधिकार होगा। अभी तक चुना हुआ पदाधिकारी होने की वजह से हटाने ता प्रावधान नहीं था।
प्रदेश यूथ कांग्रेस अध्यक्ष 25 से 45 सदस्यों वाली अपनी कमेटी का गठन कर सकता है। बड़े प्रदेशों में यह संख्या 45 और छोटे राज्यों में 25 तय की गई है।
कमेटी में महिलाओं, ओबीसी. एससी/एसटी और अल्पसंख्यकों को पचास फीसदी आरक्षण दिया जाएगा। दूसरे क्षेत्रों से जुड़े युवाओं को भी समिति में जगह दी जा सकती है।
प्रदेश स्तर पर सबसे ज्यादा वोट पाने वाले को अध्यक्ष, उससे कम वोट पाने वाले पांच उम्मीदवारों को महासचिव बनाया जाएगा। इनमें एक महिला का होना अनिवार्य है।


क्या थीं अहम शिकायतें
कांग्रेस के ज्यादातर नेताओं का आरोप था कि चुनाव में उम्मीदवार काफी पैसा खर्च करते हैं।
यूथ कांग्रेस के चुनाव में प्रदेश कांग्रेस के बड़े नेता अपने करीबी युवा नेताओं को चुनाव मैदान में उतारते हैं।
अध्यक्ष के खिलाफ चुनाव लड़ने वाले उम्मीदवार कमेटी में महासचिव बन जाते है, इसलिए टीम वर्क का आभाव है।
लोकसभा और विधानसभा क्षेत्र अध्यक्ष चुनाव के दौरान खुद टिकट के दावेदार बन जाते हैं।

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