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आ गए चातक

पक्षी विज्ञानी कह रहे हैं कि मानसून पंछी चातक आ गए हैं, मानसून बस आता ही होगा। ये पंछी मानसून के अग्रदूत हैं। ओडिशा में चिल्का झील के प्रवासी पंछियों का वर्षों से विशद अध्ययन कर रहे प्रसिद्ध पक्षी विज्ञानी यू एन देव ने भी कहा है कि चातक पाखी भुवनेश्वर के भरतपुर इलाके में पहुंच गए हैं, अब बारिश के दिन दूर नहीं। ये पंछी सुदूर दक्षिणी अफ्रीका से आते हैं और केरल से मानसून की अगवानी करते-करते ओडिशा तक आ जाते हैं। इसलिए वहां लोग इन्हें मानसून पाखी कहते हैं। कब से आ रहे हैं ये मानसून पंछी हमारे देश में मानसून के अग्रदूत बनकर? कौन जाने? लेकिन, हर साल बारिश से पहले इन्हें आता हुआ देखकर ही पीढ़ी-दर-पीढ़ी यह लोक विश्वास बना होगा कि ये बारिश का संदेश लाते हैं।

चातक के बारे में एक और लोक मान्यता यह है कि यह पक्षी केवल वर्षा की बूंदों से अपनी प्यास बुझाता है। मेघदूत  में यक्ष मेघ से कहता है, ‘तेरा यह स्वभाव है कि तू बिना गरजे भी उन चातकों को जल देता है, जो तुझसे इसकी याचना करते हैं।’ शायद महाकवि कालीदास को पता था, चातक वर्षा का संदेश लाते हैं।..प्रसिद्ध पक्षी विज्ञानी सालिम अली ने लिखा है कि चातक देखने में लगभग मैना के बराबर होता है। इसका शरीर ऊपर से काला और नीचे से सफेद रंग का होता है। सिर पर शिखा होती है, इसलिए कुछ लोग इसे चोटीदार पपीहा भी कहते हैं। ये भारत के अलावा हमारे पड़ोसी देश श्रीलंका, बंगलादेश, म्यांमार और पाकिस्तान में भी पाए जाते हैं।
देवेंद्र मेवाड़ी की फेसबुक वॉल से

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