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आम जनता के हितों की अनदेखी पर खिंचाई

नई दिल्ली। वरिष्ठ संवाददाता। आम आदमी की हितों की अनदेखी कर सिर्फ व्यावसायिक परियोजनाओं को ही मंजूरी देने में दिलचस्पी दिखाने पर हाईकोर्ट के केंद्र व दिल्ली सरकार के आलवा नगर निकायों को आड़े हाथ लिया है। हाईकोर्ट ने कहा है कि ‘शहर का ढांचा पहले ही जीर्ण-शीर्ण हो रहा है, बाबू केवल खिड़कियों और सीढिम्यों का आकार देखते हैं। ’ हाईकोर्ट ने कहा है कि किसी को इलाके में रहने वाले लोगों के स्वास्थ्य की चिंता नहीं है। जस्टिस मनमोहन ने किदवई नगर के पुनर्विकास और व्यावसायीकरण परियोजना के खिलाफ दाखिल याचिका पर सुनवाई करते हुए उन्होंने यह टिप्पणी की।

उन्होंने यह भी कहा कि सभी को अपनी योजना और उसे मंजूरी दिलाने की चिंता हो रही है और कोई भी व्यापक जनहित के बारे में नहीं सोचता है। हाईकोर्ट ने यह टिप्पणी करते हुए कहा कि कम से कम सरकार और इसके अधिकारियों को समाज के व्यापक हितों के बारे में सोचना होगा। इसके साथ ही हाईकोर्ट ने उपराज्यपाल से इस मसले पर सभी महकमों से बात करके किदवई नगर के पुनर्विकास और व्यावसायीकरण परियोजना पर दोबारा निर्णय लेने का आदेश दिया है।

हाईकोर्ट ने उपराज्यपाल से इस इलाके में रहने वाले सभी लोगों के हितों के बारे में विचार करने का निर्देश दिया है। साथ ही कहा है कि हमें सभी के बारे में सोचना चाहिए। हाईकोर्ट ने उपराज्यपाल से इस परियोजना पर दोबारा निर्णय लेने का निर्देश देते हुए कहा कि हम (कोर्ट) यह देखना चाहते हैं कि लोगों के जीने का अधिकार का उल्लंघन तो नहीं हो रहा है। हाईकोर्ट में अब मामले में अगली सुनवाई 29 सितंबर को होगी।

इससे पहले हाईकोर्ट ने सोमवार को इस परियोजना पर सवाल उठाते हुए आशंका जताई थी कि साउथ एक्सटेंशन भाग-2 और किदवई नगर के व्यावसायीकरण और पुनर्विकास की परियोजना से शहर क्षुग्गी बस्ती बन जाएगी जिसकी इजाजत शहर के बीचोबीच नहीं दी जा सकती। हाईकोर्ट ने कहा था कि प्रथमदृष्टिया मेरा मत है कि इस परियोजना से शहरी झुग्गी बन जाएगी। उन्होंने कहा कि मौजूदा तस्वीर और वविरणिकाओं से यह परियोजना शहरी झुग्गी लगती है और शहर के बीचोबीच इसकी इजाजत नहीं दी जा सकती है।

वरिष्ठ अधविक्ता अमन लेखी ने याचिका दाखिल कर साउथ एक्शटेंशन भाग-2 और आसपास के इलाकों में आवासीय प्रकृति को बनाए रखने की मांग करते हुए किदवई नगर में चल रहे पुनर्विकास योजना पर रोक लगाने की मांग की थी। याचिकाकर्ता का पक्षसाउथ एक्स इलाके में एक लाख वर्ग मीटर से अधिक व्यावसायिक परिसर के निर्माण के लिए नई दिल्ली नगर पालिका परिषद समेत अन्य प्राधिकारों द्वारा दी गयी मंजूरी में मानकों का पालन नहीं। याचिका में दावा पहले यहां आवासीय निर्माण कार्य प्रस्तावित था।

व्यावसायीकरण से इलाके में यातायात जाम की समस्या होगी। जिससे यहां रहने वाले लोगों की परेशानी बढ़ेगी।

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