DA Image

अगली स्टोरी

class="fa fa-bell">ब्रेकिंग:

वित्त मंत्री से गुहार

मान्यवर, बढ़ती महंगाई का सबसे बुरा असर वरिष्ठ नागरिकों पर पड़ता है। उनकी आय के साधन बेहद सीमित होते हैं या नहीं होते हैं। पेंशन और स्थायी जमा पर ब्याज, ये दो साधन सरकारी-अर्धसरकारी संगठनों से अवकाश प्राप्त नागरिकों के हैं। निजी क्षेत्र से अवकाश प्राप्त और अन्य वरिष्ठ नागरिकों की आय के साधन नगण्य हैं। ऐसे में, आपसे निवेदन है कि वरिष्ठ नागरिकों के लिए आयकर मुक्ति की न्यूनतम सीमा पांच लाख निर्धारित करें। सामान्य बीमा कंपनियों ने स्वास्थ्य बीमा की दरें वरिष्ठ नागरिकों के लिए दोगुनी कर दी हैं, जबकि इन्हें रियायती दरों पर यह सुविधा मिलनी चाहिए। उनके लिए दवाइयों पर छूट के प्रावधान हों। जिन बुजुर्गों के पास आय का कोई साधन नहीं या बेटे- बेटियों ने जिनसे मुंह मोड़ लिया है, उनके गुजारे के लिए गुजारा भत्ता की सुविधा होनी चाहिए या वृद्धाश्रमों में उनके रहने का नि:शुल्क प्रबंध होना चाहिए। असामाजिक तत्वों के लिए वरिष्ठ नागरिक आसान लक्ष्य बन जाते हैं, अत: उनकी सुरक्षा के लिए विशिष्ट उपाय होने चाहिए।  
रक्षा शरण गर्ग, शास्त्रीनगर, मेरठ

प्रतिनिधियों को आवास क्यों

भारत जैसे विकासशील देश में काफी लोगों के पास रोटी-कपड़ा और मकान नहीं हैं। ऐसे देश की राजधानी में सांसदों को बड़े बंगले देने का क्या मतलब? इस मद में तमाम सांसदों पर अरबों रुपये खर्च हो जाते हैं, क्योंकि ये आवास लुटियन जोन में हैं, जो काफी महंगा इलाका है। एक तरफ तो विदेशी शक्तियों के दबाव में सब्सिडी खत्म की जा रही है, जरूरी चीजों के दाम दिन-प्रतिदिन बढ़ाए जा रहे हैं, दूसरी तरफ जन-प्रतिनिधियों पर अरबों रुपये लुटाए जाते हैं। होना तो यह चाहिए कि संसद सत्र के दौरान ये सांसद दिल्ली आएं और साल के बाकी दिन अपने संसदीय क्षेत्र में गुजारें। इससे जनता का भला होगा। जब ये दिल्ली आएं, तो उन्हें सरकारी खर्च पर हॉस्टल दिया जाए, जहां सारे सांसद एक साथ रहें। यही नहीं, उनके बच्चे सरकारी स्कूलों में ही पढ़ें और वे सरकारी अस्पताल में ही इलाज कराएं। ऐसा हुआ, तो देश में तमाम सरकारी सेवाओं की स्थिति अपने आप सुधर जाएगी।
राजीव कुमार, दिल्ली

कब आएंगे अच्छे दिन

अच्छे दिनों का सपना दिखाकर और आम जनता को महंगाई से राहत दिलाने की बात करके नरेंद्र मोदी और भाजपा केंद्र की सत्ता में आए। मगर एक महीना गुजर जाने के बाद जनता को अच्छे दिनों का आभास तक नहीं हो पा रहा, उल्टे कल तक भाजपा महंगाई बढ़ने के लिए कांग्रेस को जिम्मेदार बताकर संसद से लेकर सड़कों पर उतरती थी और विरोध-प्रदर्शन करती थी और आज सत्ता में आते ही उसी भाजपा और मोदी के सुर बदल गए हैं। रेल के यात्री किराये और माल भाड़े में वृद्धि कर दी गई, डीजल और पेट्रोल के साथ रसोई गैस के दाम बढ़ा दिए गए, आलू-प्याज के दाम फिर रुलाने लगे। महंगाई के लिए भाजपा इराक संकट व मानसून को मुख्य कारण बता रही है, पर इसी तरह की बात जब कांग्रेस सरकार करती थी, तो वह सड़कों पर उतरकर सरकार के खिलाफ प्रदर्शन करती थी। पर अब भाजपा जब खुद उसी रह पर चल रही, तो उसे दूसरों के विरोध-प्रदर्शन पर ऐतराज क्यों है?
विवेक मनचंदा, लखनऊ

सांसद की बदजुबानी

तृणमूल कांग्रेस के सांसद तापस पाल का बयान बहुत शर्मनाक और निंदनीय है। ऐसे सांसदों के खिलाफ पार्टी और संसद, दोनों कार्रवाई करे। उनका बयान न सिर्फ स्त्रियों का अपमान है, बल्कि पूरी इंसानियत पर कलंक है। इससे यह भी मालूम होता है कि पुरुषवादी मानसिकता किस हद तक चली गई है, जहां महिलाओं को निशाना बनाना उसकी ताकत की पहचान बन गई है। उस बयान से हमारी राजनीति का भी एक सच उजागर होता है कि हम किस तरह के जन-प्रतिनिधि चुन रहे हैं।
अजय शर्मा, अलीगढ़, उत्तर प्रदेश
ajaysharma.newsx@gmail.com

  • Hindi Newsसे जुडी अन्य ख़बरों की जानकारी के लिए हमें पर ज्वाइन करें और पर फॉलो करें
  • Web Title:वित्त मंत्री से गुहार