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पसीने में न भीगे आपकी तरोताजगी

पसीना आना शरीर की स्वाभाविक प्रक्रिया है। यह तापमान को नियंत्रित रखने का शरीर का अपना तरीका है। इससे शरीर के विभिन्न रसायनों और हार्मोंस में संतुलन बनाए रखने में मदद मिलती है। पर अधिक पसीना आना सेहत संबंधी समस्याओं का संकेत भी है। अचानक अधिक पसीना शरीर के अंगों पर असर डाल सकता है। पसीने की परेशानी से कैसे बचें, बता रही हैं शमीम खान


गर्मियों में कई लोगों का पसीने से हाल-बेहाल हो जाता है। आसमान पर पूरी तेजी से दमकता सूरज, टॉप गियर में दौड़ती गाड़ियां और उससे भी ज्यादा रफ्तार से भागती आजकल की जिंदगी। आप सुबह तरोताजा होकर ऑफिस के लिए निकलते तो हैं, लेकिन वहां पहुंचते-पहुंचते ही पसीने से बुरा हाल हो जाता है। कुछ लोगों के पसीने की दुर्गंध तो इतनी तेज होती है कि इत्र व डिऑडरेंट की खुशबू भी उड़न छू हो जाती है। वैसे पसीना आना कोई शारीरिक खराबी या बीमारी नहीं है, लेकिन ज्यादा पसीना आना जरूर एक समस्या है, जिसे चिकित्सकीय भाषा में हाइपर हाइड्रोसिस कहते हैं। कई लोग चेहरे, हथेलियों, अंडर आर्म्स (कांख) और कुछ  तलवों से अधिक पसीना बहने की समस्या से परेशान रहते हैं। हालांकि पसीना आना सेहत के लिहाज से जरूरी  है, पर इसका बेहद कम या अधिक होना किसी स्वास्थ्य समस्या का संकेत हो सकता है। 

क्यों जरूरी है पसीना    
अलग-अलग लोगों की पसीने संबंधी जरूरत अलग-अलग होती है, इसलिये विशेषज्ञों का मानना है कि पसीने की कोई एक निश्चित मात्रा निर्धारित नहीं की सकती। लेकिन पसीने का शरीर से निकलते रहना जरूरी है। पसीना शरीर का प्राकृतिक रक्षा प्रणाली है, जो शरीर को ठंडा रखती है, शरीर की नमी को बनाए रखती है और शरीर को विभिन्न संक्रमणों से बचाती है। गर्मी लगने पर शरीर से पसीना आता है, जो वाष्पीकृत होकर शरीर को ठंडक देता है। पसीना शरीर को नुकसान पहुंचाने वाले पदार्थों जैसे एल्कोहल, कोलेस्ट्रॉल और नमक की अतिरिक्त मात्रा को भी बाहर निकाल देता है। इतना ही नहीं, पसीने में प्राकृतिक रूप से एंटी-माइक्रोबियल पेप्टाथाइड होता है, जो टीबी और दूसरे  हानिकर रोगाणुओं से लड़ता है।

पसीना आने का संबंध केवल बाहरी नहीं, आंतरिक कारकों से भी है। चिंता, भय, तनाव में भी त्वचा से पसीना निकलने लगता है। यौवनावस्था आरंभ होने पर शरीर में होने वाले हार्मोनल बदलावों के समय शरीर में करीब 30 लाख पसीने वाली ग्रंथियां क्रियाशील हो जाती हैं। ऐसा सभी में होता है, बस इतना अंतर अवश्य है कि हाइपर हाइड्रोसिस से पीड़ित व्यक्तियों में सामान्य लोगों से अधिक पसीना आता है। उन पर मूड और मौसम का फर्क नहीं पड़ता। शरीर से निकलने वाला पसीना जब बैक्टीरिया के संपर्क में आता है तो शरीर से दुर्गंध आती है।          

हाइपर हाइड्रोसिस के कारण
हाइपर हाइड्रोसिस नर्वस सिस्टम से जुड़ी समस्या है। मोटे तौर पर हम इसे तीन भागों में बांट सकते हैं- नर्वस सिस्टम, इमोशनल व हार्मोनल बदलाव और बाहरी पर्यावरण। जो लोग हाइपर हाइड्रोसिस से पीड़ित होते हैं, उनमें पसीने वाली ग्रंथियां अधिक सक्रिय होती हैं, जिसके कारण अधिक पसीना आता है। यह एक सामान्य डिसॉर्डर है। करीब 7-8 प्रतिशत भारतीय अधिक पसीना आने की समस्या से पीड़ित हैं। कांख से अधिक पसीना आने को एक्सिमलरी हाइपर हाइड्रोसिस कहते हैं। ऐसा यौवनावस्था शुरू होने के साथ आरंभ होता है। हथेलियों और तलवों पर  अधिक पसीना आने को पालमोप्लोंटर हाइपर हाइड्रोसिस कहते हैं। इसके लक्षण बचपन में ही दिखने लगते हैं। हाइपर हाइड्रोसिस में शरीर को ठंडक देने की प्रक्रिया अति सक्रिय हो जाती है, जिससे  जरूरत से चार या पांच गुना अधिक पसीना आता है। गर्म मौसम, अधिक शारीरिक श्रम, भावनात्मक समस्याएं, हार्मोनल बदलाव, मेनोपॉज, डायबिटीज,  हाइपर थायरॉइड, मोटापा, निकोटीन, कैफीन तथा गर्म, तले और मसालेदार भोजन का सेवन करना हाइपर हाइड्रोसिस की समस्या को बढ़ा देता है।

गंभीर बीमारी का संकेत तो नहीं!
अधिक पसीना आना किसी गंभीर बीमारी का संकेत भी हो सकता है। यह समस्या  मोटे लोगों में अधिक देखने को मिलती है। कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि 50 प्रतिशत में यह समस्या आनुवंशिक होती है। अधिक पसीना इन कारणों से भी आता है.. 

- हार्मोन संबंधी गड़बड़ियों को दूर करने वाली दवाएं, डायबिटीज, थायरॉइड , हाई बीपी व अवसाद के उपचार में ली जाने वाली दवाएं शरीर में अधिक पसीना लाते हैं।
- संक्रमण, कई तरह के कैंसर, हृदय और फेफड़ों की बीमारी, थायरॉइड, डायबिटीज, मेनोपॉज और कभी-कभी स्ट्रोक के दौरान भी पसीना अधिक आता है। यदि अचानक से ही अधिक पसीना आने लगा है तो डॉक्टर से संपर्क करें। इससे कई रोगों को शुरुआती स्तर पर ही पहचानने में मदद मिल सकती है। 

किन बातों का रखें ध्यान
- रोज ठंडे और साफ पानी से नहाएं। प्राकृतिक रेशों जैसे सूती व लिनन से बने कपड़े पहनें।
- पसीने के कारण कपड़ों पर लगने वाले धब्बों या पसीने के उभरने से बचने के लिए अंडर आर्म  पैड का इस्तेमाल करें। 
- नियमित रूप से एंटीबैक्टीरियल साबुन से स्नान करने से त्वचा पर बैक्टीरिया का विकास कम होता है, जिससे पसीना आने पर दुर्गंध नहीं आती। 
- रात को सोते समय अपनी हथेलियों और तलवों पर एंटीपरसिपेरेंट लगाएं। प्रयास करें कि इसमें परफ्यूम न हो।
- रिलैक्स  करने की तकनीकें जैसे योग, मेडिटेशन आपको शांत रखते हैं। अधिक तनाव पसीने को ट्रिगर करता है।

तो डॉक्टर से संपर्क करें        
अगर पसीना निकलने में आसामान्य परिवर्तन आये यानी बहुत अधिक या बहुत कम पसीना आने लगे तो डॉक्टर से संपर्क करना सही रहता है। इसी तरह शरीर की गंध में परिवर्तन आना चिकित्सकीय समस्या का संकेत हो सकता है। इस संबंध में त्वचा रोग विशेषज्ञों से भी संपर्क किया जा सकता है। त्वचा रोग विशेषज्ञ हाइपर हाइड्रोसिस के उपचार के लिए बोटोक्स की सलाह भी देते हैं। अमेरिका में इसे एफडीए की मान्यता प्राप्त है। इसका इस्तेमाल उन लोगों द्वारा किया जा रहा है, जो कांख से अधिक पसीना निकलने की समस्या से ग्रसित हैं। इससे छुटकारे का अंतिम इलाज सरवाइकल सिम्पे थेक्टोरमी सर्जरी है।
(हमारे विशेषज्ञ: डॉ. ए. के. शुक्ला, सीनियर फिजिशियन, कैलाश हॉस्पिटल तथा शिखा श्रीवास्तव,न्यूट्रिशनिस्ट, पाइनिर न्यूट्रिशन एंड वेलनेस प्राइवेट लिमिटेड)

 

खान-पान का रखें ध्यान
- जिन लोगों को अधिक पसीना आता है, उन्हें गर्मी व उमस के मौसम में खास एहतियात रखने की जरूरत होती है। अधिक गर्मी पाचन तंत्र को प्रभावित करती है। गर्मियों में ताजा और हल्का भोजन करें। खीरा, पुदीना, संतरा, तरबूज खाएं। ये प्यास बुझाने वाली चीजें हैं। खास बात यह है कि इनमें सोडियम और कैलोरी की मात्रा काफी कम और एंटी ऑक्सीडेंट, कैल्शियम तथा विटामिन ए अधिक मात्रा में होते हैं। इन्हें ठंडक देने वाले खाद्य पदार्थ भी कहते हैं। नियमित डेयरी प्रोडक्ट, दही और छाछ का सेवन करना शरीर में पानी के स्तर को सामान्य बनाए रखने में मदद करता है।
- गर्मियों में प्याज खूब खाएं। इसमें क्वेयरसेटिन होता है, जो गर्मी से त्वचा पर पड़ने वाले रैशेज में आराम पहुंचाता है। तरबूज और खरबूजा खास गर्मियों के फल हैं। इनमें  करीब 90 प्रतिशत पानी होता है। गर्मी में अत्यधिक पसीना आने से शरीर में जो पानी की कमी हो जाती है, ये उसे नियंत्रित करते हैं।
- गर्मियों में शरीर को काम करने के लिए ऊष्मा की कम मात्रा में आवश्यकता होती है, इसलिए ऐसे पदार्थों का सेवन करना चाहिए, जिनमें कैलोरी कम और तरल व पोषक पदार्थ अधिक हों। ज्यादा मसालेदार और चिकनाई वाले भोजन से बचना चाहिए। अधिक से अधिक फलों का सेवन करना चाहिए, क्योंकि फलों में लगभग 80 प्रतिशत पानी होता है और मानव शरीर में भी।     
- जिन लोगों को अधिक पसीना आता है, उन्हें नियमित रूप से फलियां, नाशपति, फूलगोभी, शलजम, बंदगोभी, कच्चा केला, अनार, भिंडी, दालें व तुलसी का सेवन करना चाहिए। तीता भोजन पानी का अवशोषण कर ऊतकों को ठोस बनाता है।

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