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ऊंचाई देखते ही आने लगता है चक्कर!

गर्मी और उमस पीछा छोड़ने का नाम ही नहीं ले रहे हैं। जी चाहता है पहाड़ों की ओर जाएं, पर कैसे? ऊंचाई पर यात्रा करने के नाम पर तो सिर घूमने लगता है। हालांकि हाई अल्टीट्यूड सिकनेस (एचएएस) एक आम समस्या है, बावजूद इसके हाइपरटेंशन और मधुमेह के रोगियों को इस संबंध में खास एहतियात बरतने की जरूरत होती है।


एचएएस के लक्षण
आमतौर पर इसकी शुरुआत भूख न लगने, सिर दर्द, चक्कर, थकावट, उलटी, अनिद्रा, नकसीर, बेहोशी, चेहरे पर सूजन, डायरिया व पैरों में सुन्नता के साथ होती है। शुरुआती स्तर पर इसके लक्षण फ्लू और हैंगओवर से मिलते हैं। कई लोगों को सांस लेने में परेशानी के साथ हल्का सिरदर्द भी होता है। फेफड़ों में से नमी कम होने से डीहाइड्रेशन के कारण भी एचएएच जैसे लक्षण प्रतीत होते हैं।

हिल स्टेशन पर ध्यान रखना है जरूरी
समुद्र से 2000 मीटर या उससे अधिक की ऊंचाई वाले क्षेत्रों पर यात्रा करना खून में ऑक्सीजन के स्तर को कम कर सकता है, जिसका प्रभाव शरीर के विभिन्न अंगों के काम करने की प्रक्रिया पर पड़ता है। हालांकि अधिक ऊंचाई वाले क्षेत्रों में लेह-लद्दाख, मनाली व शिमला आदि आते हैं, पर अक्सर यह समस्या तब उत्पन्न होती है, जब कुछ ही घंटे के अंदर हम सामान्य स्तर से बहुत अधिक ऊंचाई पर पहुंच जाते हैं।

समस्या तब होती है
एचएएस के कारण फेफड़े व मस्तिष्क में फ्लूइड इकट्ठा होकर सांस लेने में बाधा उत्पन्न कर सकता है। शरीर के विभिन्न अंगों में ऑक्सीजन की कमी होने के कारण सांस लेने में परेशानी होने के अलावा उलझन, बेचैनी व तनाव जैसी समस्या उत्पन्न होती है। स्थिति अधिक गंभीर होने पर ये संक्रमण फेफड़ों तक फैल जाता है।

हृदय रोगी न बरतें लापरवाही
हृदय रोगों से पीड़ित लोग (हृदयघात, धमनियों में स्टेंट, दिल की सजर्री) अनियंत्रित ब्लड प्रेशर व मधुमेह, अस्थमा व एनीमिया से पीड़ितों को पहाड़ी क्षेत्रों में जाने से परहेज या खास एहतियात बरतनी चाहिए। गर्भवती महिला व 65 साल से अधिक उम्र के लोगों को पहाड़ी क्षेत्रों पर जाने से बचना चाहिए।


जाने से पहले
- मधुमेह व हाइपरटेंशन के पीड़ितों को यह सुनिश्चित कर लेना चाहिए कि उनका शुगर और बीपी नियंत्रण में हो। इंसुलिन पर निर्भर लोग खास ध्यान रखें। बेहतर हो, यदि जाने से पहले डॉक्टर से बात कर लें।
- पर्याप्त मात्रा में शरीर को हाइड्रेट रखें। भरपूर पानी पिएं।
- चक्कर और उलटी के लिए दवा साथ में रखें। सामान्य बुखार, एसिडिटी, जुकाम व गला खराब होने पर ली जाने वाली दवाएं साथ रखें। रूई, बैंडेज, दर्द निवारक पट्टी, एंटी बैक्टीरियल लिक्विड, दर्द निवारक  स्प्रे, ट्यूब्स व तेल आदि साथ रखना भी अच्छा रहता है।
- जाने से पहले पर्याप्त आराम करें।


खान-पान में सावधानी बरतें
आमतौर पर एक चौथाई लोगों को एचएएस की समस्या होने पर पर्याप्त मात्रा में पानी पीने, आराम करने या दर्द निवारक दवाएं लेने पर आराम आ जाता है। स्थिति गंभीर दिखने पर डॉक्टर से संपर्क करें। साथ ही सुपाच्य भोजन जैसे दाल, रोटी, चावल, हरी सब्जियां व कम मसालेदार चीजें खाएं।

Hindustan times

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