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तैयार रहें, महंगा हो सकता है पेट्रोल

र्नाटक चुनाव नतीजों के बाद डीाल न सही, पेट्रोल की कीमतें कुछ बढ़ सकती है। सरकार महंगाई पर विपक्ष के हमलों से पहले से ही त्रस्त है और डीाल की कीमतों में वृद्धि महंगाई को और भड़का सकती है, इसलिए सरकार फिलहाल केवल पेट्रोल की कीमतों को ही छूने का साहस संजोएगी। सूत्रों के अनुसार सरकार कच्चे तेल के आयात पर कस्टम शुल्क में भी कुछ कमी ला सकती है जिससे सार्वजनिक क्षेत्र की तेल विक्रय कंपनियों का घाटा कम करने में मदद मिलेगी। वामपंथी दल इसकी मांग बहुत समय से करते रहे हैं। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें 127 डालर प्रति बैरल तक जा पहुंची है। आशंका है कि इस साल की सर्दी तक इसकी कीमत 200 डालर तक न पहुंज जाए। देश के तेल आयात बिल में 40 प्रतिशत से भी अधिक की वृद्धि हो चुकी है। यह 77.02 अरब डालर पर पहुंच चुका है। चालू वित्तीय साल में इसके 100 अरब डालर से भी अधिक हो जाने की आशंका से सरकार नर्वस है। डालर के मुकाबले जब रुपये में मजबूती थी, तो सरकार कच्चे तेल के ऊंचे मूल्य को झेल गई, पर अब रुपये में आ रही लगातार मंदी के बाद सरकार की परशानी बढ़ गई है। उधर देश में तेल की खपत दस प्रतिशत सालाना की दर से बढ़ रही है। प्रधानमंत्री डा. मनमोहन सिंह ने सोमवार को बढ़ते तेल आयात बिल तथा सार्वजनिक क्षेत्र की तेल विपणन कंपनियों पर अंडररिकवरी के बढ़ते बोझ की समीक्षा की।

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