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बिजली उत्पादन में पानी के इस्तेमाल की सम्रग नीति बने

बिजली उत्पादन में पानी के इस्तेमाल की सम्रग नीति बने

‘रहिमन पानी राखिए, बिन पानी सब सून। पानी गए न ऊबरे मोती मानुष चून।’ इस दोहे के मुताबिक पानी बिना कुछ भी मुमकिन नहीं है। यही बात ऊर्जा उत्पादन पर भी लागू होती है। पानी बिना बिजली पैदा होना भी मुमकिन नहीं है फिर चाहे सौर ऊर्जा से ही क्यों न हो। वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम (डब्ल्यूईएफ)के मुताबिक बिजली बनाने के लिए लगने वाले पानी के लिए सरकारों को बिजली-पानी के लिए एक समग्र नीति बनानी होगी।

दुनिया की जनसंख्या बढ़ाने के साथ बिजली की मांग भी बढ़ रही है। इसके साथ ही पानी और बिजली पर भी दबाव बढ़ रहा है। बिजली के उत्पादन की हर प्रक्रिया में पानी का इस्तेमाल होता है। जैसे-जैसे बिजली की मांग बढ़ती जाएगी पानी पर भी दबाव बढ़ता जाएगा। डब्ल्यूईएफ की एक रिपोर्ट के मुताबिक पानी की कमी का सीधा असर बिजली के उत्पादन पर पड़ता है।

बिजली उत्पादन पर पड़ा असर 

- वर्ष 2011 में टेक्सास में एक साल तक भयंकर सूखा पड़ा था। इसे कपास की फसल पूरी तरह से बर्बाद हो गई थी और किसानों को अपने पशु बेचने पड़े थे। पानी की वजह से बिजली का उत्पादन प्रभावित हुआ था। इसकी वजह से ग्रिड ऑपरेटर की भी चिंता बढ़ गई थी।
 
- भारत में पानी की कमी वाले क्षेत्रों में किसान खेतों में पानी देने के लिए पंप का इस्तेमाल करते हैं। बिजली से चलने वाले यह पंप जमीन के अंदर से पानी निकालने के लिए बहुत अधिक पानी से बनाई गई बिजली का इस्तेमाल करते हैं। एक अनुमान के मुताबिक पंप से सिंचाई वाले क्षेत्रों में 25 फीसदी की वृद्धि हुई है।

-वर्ष 2006 में कई यूरोपीय देशों में पानी की कमी के कारण कई परमाणु ऊर्जा केंद्र बंद हो गए थे। इसी तरह ब्राजील में सूखे से जल विद्युत उद्योग पर असर पडम था, जिससे देश में वस्तुओं की कीमतें बढ़ गई थीं।
 
-चीन तेजी से विकास करने के लिए कोयले से बिजली बना रहा है। इसके लिए यह देश लगातार बिजली उत्पादन केंद्र बना रहा है। आधे से अधिक उत्पादन केंद्र पानी की कमी के दबाव में हैं।

सौर ऊर्जा के लिए भी जल आवश्यक
हर प्रकार की ऊर्जा के लिए पानी की आवश्यकता होती है। उष्मीय और जल विद्युत के लिए पानी की सबसे अधिक जरूरत पड़ती है। इसके अलावा परमाणु ऊर्जा केंद्र में ठंडक बनाने के लिए और सौर ऊर्जा के लिए फोटोवोल्टिक सेल के निर्माण व सुचारु रूप से चलाने के लिए भी काफी पानी की जरुरत होती है।

जल के सदुपयोग पर करें पुनर्विचार
- पानी के आर्थिक मूल्य पर बल: ऊर्जा से संबंधित योजना बनाते समय पानी के मूल्य को ध्यान रखना जरूरी।
- पानी व ऊर्जा की वर्तमान योजना पर पुनर्विचार: बिजली उत्पादन में पानी के प्रभावपूर्ण इस्तेमाल से पूरी दुनिया की बिजली की मांग पूरी की जा सकती है। कई देशों में बिजली उत्पादन केंद्र में पानी का सही उपयोग नहीं होने से उन्हें परेशानियों का सामना करना पड़ता है। 
- नई सोच को अपनाना: योजनाकारों, शोधकर्ताओं को बिजली उत्पादन में पानी के कम इस्तेमाल के नए रास्ते खोजने होंगे। इसी तरह पानी को इस्तेमाल लायक बनाने को कम बिजली के उपयोग के भी तरीके खोजने होंगे।

दुनियाभर में पानी की कमी
वर्ष                देश  जनसंख्या
1995            31         0.46
2025            48         2.8
2050            54         4.0
(जनसंख्या अरब में)

पृथ्वी पर पानी
3.5 करोड़ घन किलोमीटर ताजा पानी है
70 फीसदी पहाड़ों और ध्रुवों पर बर्फ में मौजूद
1.1 करोड़ घन किलोमीटर पानी उपयोग के लिए
43 देशों के 70 करोड़ लोग आज पानी की कमी से जूझ रहे हैं

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