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जासूसी पर भारत ने दी अमेरिका को हिदायत

भाजपा की जासूसी कराए जाने से नाराज केंद्र सरकार ने बुधवार को अमेरिकी राजनयिक को तलब कर कड़ा विरोध दर्ज कराया है। किसी भारतीय संगठन या शख्स की निजता के उल्लंघन को अस्वीकार्य बताते हुए भारत ने अमेरिका से यह आश्वासन भी मांगा कि भविष्य में ऐसी घटना दोबारा नहीं होगी।

भारत में अमेरिका की अंतरिम राजदूत कैथलीन स्टीफेंस हैं। हालांकि यह पता नहीं चला कि विदेश मंत्रालय ने जिस अमेरिकी राजनयिक को तलब किया, वह कौन है। विदेश मंत्रालय के सूत्रों ने बताया कि पहले भी दो बार अमेरिका से जवाब मांगा गया तो उसका कहना था कि वह विचार करेगा कि उसके जासूसी कार्यक्रम के बारे में वह क्या सूचना साझा कर सकता है। हालांकि अब तक अमेरिका ने भारत को कोई जानकारी मुहैया नहीं कराई।

सीआईए के पूर्व अधिकारी एडवर्ड स्नोडेन द्वारा लीक दस्तावेज से पता चला है कि अमेरिकी राष्ट्रीय सुरक्षा एजेंसी (एनएसए) ने 2010 में भाजपा समेत छह विदेशी राजनीतिक दलों की जासूसी करने की मंजूरी ली थी।193 देश व उनके संगठन एनएसए की खुफिया निगरानी के दायरे में थे। एनएसए के जासूसी प्रकरण से दोनों देशों के रिश्तों में गर्माहट लाने की कोशिशों को झटका लग सकता है।

 

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