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बरेलीः फर्जी सर्टिफिकेट से शिक्षक बनने चले थे 17 शिक्षामित्र

बेसिक शिक्षा विभाग में फर्जी सर्टिफिकेट के जरिए शिक्षामित्र की नौकरी पाने और अब शिक्षक बनने की दौड़ में भी शामिल होने का सनसनीखेज खुलासा हुआ है। शिक्षक समायोजन के लिए कराए जा रहे सत्यापन में 17 शिक्षामित्र सामने आए हैं, जो नकली शैक्षिक प्रमाणपत्रों से नौकरी कर रहे थे। ऐसे लोग गुरुकुल विवि, वृंदावन के फर्जी कागज लगाकर शिक्षामित्र बने थे और अब शिक्षक बनने की दौड़ में भी थे। जालसाजी सामने आने के बाद एक ओर विभाग कानूनी कार्रवाई की तैयारी में जुटा है, तो दूसरी ओर आरोपी भूमिगत हो लिए हैं।

अफसरों के मुताबिक, इन दिनों शिक्षामित्रों को शिक्षक बनाने की प्रक्रिया जोरों पर है। शिक्षक चयन प्रक्रिया के अंतर्गत राज्य शैक्षिक अनुसंधान परिषद ने सभी शिक्षामित्रों के शैक्षिक कागजों के सत्यापन का आदेश बेसिक शिक्षा विभाग को दिया था। आदेश में गुरुकुल विवि, वृंदावन की जांच विशेष रूप से कराने की बात कही गई है। इसलिए विभाग ने सबसे पहले इसी यूनिवर्सिटी की डिग्री रखने वाले शिक्षामित्रों की जांच कराई। गुरुकुल यूनिवर्सिटी से जब सत्यापन रिपोर्ट आई तो खलबली मच गई। रिपोर्ट में 17 शिक्षामित्रों के बारे में यूनिवर्सिटी ने किसी भी तरह के रिकार्ड के होने से ही इंकार कर दिया। इनमें से सात शिक्षामित्र पहले बैच के और 10 दूसरे बैच के हैं। अफसरों का कहना है कि आरोपियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की तैयारी है। इसकी भनक लगते ही आरोपी गायब हो लिए हैं।

जुलाई में ही बनने वाले थे शिक्षक
पहले बैच के 1085 शिक्षामित्रों में से सात शिक्षामित्र पकड़े गए हैं। इन सभी का प्रशिक्षण पूरा हो चुका था। इन्हें जुलाई के अंत में शिक्षक के रूप में रखे जाने की तैयारी हो चुकी थी। बस काउंसिलिंग होना बाकी थी। ठीक उसी तरह से दूसरे बैच के 2139 शिक्षामित्रों में से 10 के कागज फर्जी पाए गए है। अब इन लोगों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराकर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

अभी और भी मिल सकते हैं नटवरलाल
विभाग ने अभी केवल गुरुकुल यूनिवर्सिटी के कागजों की ही जांच कराई है। यूपी बोर्ड और रुहेलखंड यूनिवर्सिटी के कागजों का सत्यापन होना अभी बाकी है। माना जा रहा है कि इसमें भी कई नटवरलाल पकड़ में आ सकते हैं।

विभाग ने भी की लापरवाही
शिक्षामित्रों की वर्ष 2005 में नियुक्ति के समय ही डायरेक्टर बेसिक शिक्षा विभाग ने सभी के सत्यापन का आदेश जारी किया था मगर बरेली में विभाग ने सत्यापन नहीं कराया। अब जबकि शिक्षामित्रों को शिक्षक बनाने की तैयारी है, तब जाकर सत्यापन कराया गया है। 2005 में सत्यापन नहीं कराने के चलते विभागीय लोगों की मिलीभगत से भी इंकार नहीं किया जा सकता है।

जालसाजों पर होगी सख्त कार्रवाई: बीएसए
इस बारे में बात करने पर बीएसए चंद्रकेश सिंह यादव ने बताया, फर्जी प्रमाणपत्रों के जरिए नौकरी करने वाले शिक्षामित्रों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। इन लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करवाकर फंड वसूली की कार्रवाई भी होगी। जो भी लोग इसमें संलिप्त पाए जाएंगे, उन्हें भी बख्शा नहीं जाएगा।

 

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  • Web Title:बरेलीः फर्जी सर्टिफिकेट से शिक्षक बनने चले थे 17 शिक्षामित्र