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थानों में असामाजिक तत्वों पर नकेल कस रहे थानेदार

संतकबीरनगर। निज संवाददाता। नए कप्तान के आने के बाद पुलिस के अन्दर राजनेताओं व पुलिस के तथाकथित आकाओं की दखल कम होती दिख रही है। पहले जो तत्व सामाजिक आचार संहिता का उल्लंघन करके थानों में जाकर कुर्सियां तोड़ते थे। साथ ही खुद की राजनैतिक पकड़ का हवाला देते हुए पुलिस के कार्यो में गैरजरुरी हस्तक्षेप करते थे वह बन्द होता दिख रहा है। विगत दिवस कोतवाली खलीलाबाद और बखिरा थाने में नजारा कुछ ऐसा ही दिखा।

कोतवाल ने जहां एक मनबढ़ की गाड़ी को सीज कर दिया। वहीं दूसरी तरफ बखिरा के थानेदार ने कसाइयों को थाने से खदेड़ दिया। कोतवाली का मामला- कोतवाल ने सीज की मनबढ़ की बुलेट कोतवाल बब्बन यादव दोपहर में 1 बजे के करीब अपनी कुर्सी पर बैठे हुए थे। अचानक उनकी नजर कोतवाली के गेट पर गई जहां एक व्यक्ति बुलेट पर तीन लोगों को बैठाए हुए कोतवाली में पहुंचा। कोतवाल ने तुरन्त ही तीनों को सिपाहियों से पकड़वाकर बुलवाया।

बुलेट चला रहे व्यक्ति को जमकर फटकार लगाई और कड़े शब्दों के प्रहार से कोतवाली के नियम कायदे समझा दिए। साथ ही साथ बुलेट का खुद ही चालान करने के साथ ही कई धाराओं में सीज कर दिया। साथ ही थाने में मौजूद सभी पुलिसकर्मियों को निर्देश दिया कि थाने में किसी भी तरह की अनुशासनहीनता करने वालों के उपर कार्रवाई तुरन्त करें चाहे वह कोई भी हो। बखिरा थाने का मामला- थानाध्यक्ष ने कसाइयों को थाने से खदेड़ा बखिरा थाने के थानाध्यक्ष शमशेर बहादुर सिंह सुबह 9 बजे के करीब अपने कमरे में बैठे हुए थे तभी दो व्यक्ति पहुंचे।

उन्होंने खुद को सामाजिक कार्यकर्ता बताया और उनसे परिचयात्मक बातें करने लगे। इसी दौरान एक सिपाही ने उनके मोबाइल पर फोन कर दिया कि उनके साथ बैठे दोनो व्यक्ति कसाई हैं और प्रतबिन्धित पशुओं की तस्करी करने के साथ ही तस्करों को संरक्षण देने का काम करते हैं। इतना सुनते ही थानाध्यक्ष का पारा चढ़ गया। उन्होने तुरन्त ही दोनों को थाने से निकल जाने को कहा। वे समझ ही नहीं पाए कि उनके साथ क्या हो रहा है। थानेदार ने कड़क लहजे में कहा कि जो काम तुम लोग करते हो उसकी जानकारी मुझे है।

थाने से निकल जाओ और जो भी गलत कार्य करते हो वह बन्द कर दो। नहीं तो प्रभावी कार्रवाई की जाएगी। इंसर्ट क्या है कार्यालयों में जाने की आचार संहिता 1- कहीं भी बुशर्ट का बटन खोलकर अकड़ते हुए न जाएं। 2- कार्यालय में प्रवेश से पहले अधिकारी को सूचना दे दें। 3- कार्यालयों में पान खाकर या सगिरेट पीते हुए न जाएं। 4- कार्यालयों की कुर्सियों पर सभ्यतापूर्वक बैठें। 5- मोबाइल साइलेण्ट करें, जोर जोर आवाज में बातें न करें।

इंसर्ट ‘‘थानों और अन्य कार्यालयों में जाने की एक आचार संहिता होती है। उसका अनुपालन सभी को करना चाहिए। थानों में वही जाएं जो वास्तव में पीड़ित हों। यदि वहां पर उनकी फरियाद न सुनी जाए तो मेरे पास आएं। थानों में दलालों का प्रवेश बिल्कुल बन्द होना चाहिए। पुलिस के उपर बेजा दबाव बनाने वाले बर्दाश्त नहीं किए जाएंगे। ’’ अतुल शर्मा, एसपी ं।

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