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शोभा की वस्तु बनकर रह गया कोडरमा का केंद्रीय भंडारण

कोडरमा राजेश कुमार। झारखंड उर्जा विकास निगम लिमिटेड द्वारा बागीटांड में खोले गए केंद्रीय भंडारण महज शोभा की वस्तु बनकर रह गई है। जिले में जिस मकसद से केंद्रीय भंडारण का उद्घाटन फरवरी 2014 को हुआ था, उसका सार्थक परिणाम जिलेवासियों को नहीं मिल पा रहा है। भंडारण उद्घाटन के दौरान अतिथियों ने कहा था कि अब जिले में बिजली समस्या दूर करने में यह केंद्रीय भंडारण मील का पत्थर साबित होगा, लेकिन ऐसा कुछ भी नहीं हुआ।

आज भी ट्रांसफॉर्मर के लिए हजारीबाग, देवघर, गिरिडीह के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं। उद्घाटन के दौरान भंडारण में आठ नए ट्रांसफॉर्मर, तार समेत अन्य सामग्री उर्जा विकास निगम ने उपलब्ध कराए थे, मगर पांच माह बाद स्थिति यह है कि कुछ तारों के बंडल छोड़कर यहां कोई भी सामान नहीं है, जिससे जिले में बिजली की समस्या दूर की जा सके। आज भी जिले में करीब 30 ट्रांसफॉर्मर विभिन्न क्षेत्रों में जले पड़े हैं और करीब 40 से 50 ट्रांसफॉर्मर की स्वीकृति विभिन्न क्षेत्रों में लगाने के लिए विभाग को लिखा गया है।

कई स्थानों पर पोल की कमी के कारण भी बिजली नहीं पहुंच रही है। ट्रांसफॉर्मर के अभाव में लोग अंधेरे में रहने को ववशि हैं। केंद्रीय भंडारण उद्घाटन के दौरान हीं ट्रांसफार्मर रिपेयरिंग वर्कशॉप का शिलान्यास भी किया गया था, लेकिन पांच माह बाद भी वर्कशॉप के लिए जिला प्रशासन जमीन उपलब्ध कराने में नाकाम रहा है। वर्कशॉप शुरू होने से जले ट्रांसफॉर्मर की मरम्मत में सुविधा होती। ट्रांसफॉर्मर रिपेयरिंग वर्कशॉप के लिए 25 लाख रुपए आवंटित: इएसइ केंद्रीय भंडारण में सामान नहीं रहने और ट्रांसफॉर्मर रिपेयरिंग वर्कशॉप का काम शुरू नहीं होने के सवाल पर अधीक्षण अभियंता सुनील कुमार ने कहा कि सरकार स्तर से ट्रांसफॉर्मर समेत अन्य सामग्री उपलब्ध कराने के लिए पत्र लिखा गया है।

वर्कशॉप के स्थायी शेड के लिए विभाग को 25 लाख मिले हुए हैं। जिला प्रशासन द्वारा एक सप्ताह के अंदर लोकाई में जमीन उपलब्ध करा दी जाएगी। इसके बाद काम शुरू किए जाएंगे। उन्होंने कहा कि भंडारण में भी तार, पोल, ट्रांसफॉर्मर शीघ्र प्राप्त होंगे और जरूरत के क्षेत्रों में लगाए जाएंगे।

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