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तिहाड़कर्मियों के बच्चों को पढ़ाया जा रहा शिष्टाचार का पाठ

नई दिल्ली दिनेश वत्स। दिन-रात कैदियों की डयूटी में तैनात रहने वाले जेल कर्मचारियों के बच्चों को शिष्टाचार का पाठ पढ़ाया जा रहा है। साथ ही उनका शरीरिक और मानसिक विकास करना भी स्लेबस में शामिल है। यह पहला मौका है जब तहिाड़ परिसर में रहने वाले कर्मचारियों के बच्चों को शिष्टाचार का पाठ पढ़ाया जा रहा है।

उनकी क्लास करीब दो माह तक चलेंगी। काफी समय से यह बात महसूस की जा रही थी कि जेल काम्प्लेक्स में रहने वाले लोयर रेंक के कर्मचारी दिन -रात डयूटी पर रहने की वजह से अपने बच्चों के विकास पर पूरी तरह से ध्यान नहीं दे पा रहे हैं।

अधिकांश बच्चों शर्मीले और झोंपू प्रवृति के बने हुए हैं साथ ही उनमें शिष्टाचार की भी कमी पाई गई। जहां उनके शरीरिक, मानसिक और भावनात्मक विकास की बात है उसका स्तर भी इन बच्चों में काफी कम पाया गया है।

यह जानकारी देते हुए गुरुकुल कार्नविल कार्यक्रम के आचार्य सुनील ने बताया कि तिहाड़ एम्पलाइज वेलफेयर एसोसिएशन से पदाधिकारियों की मदद से जेल क्वार्टर परिसर में गुरुकुल कार्नविाल कार्यक्रम शुरू किया गया और बच्चों को शिष्टाचार का पाठ पढ़ाया जा रहा है।

क्लास में करीब 40 बच्चों हैं जिन्हें प्रतिदिन शाम को पांच से छह बजे यह शिक्षा दी जा रही है। क्लास में पांच से लेकर 16 वर्ष की आयु के बच्चों शामिल हैं। इन्हें ध्यान और योग भी सिखाया जा रहा है। आचार्य का कहना है कि अधिकांश बच्चों ऐसे हैं जो पिता की लम्बी डयूटी होने की वजह से कभी जेल काम्प्लेक्स से बाहर घूमने तक नहीं जा सके हैं। इस कारण बच्चों स्वभाव से चिड़चिड़े हो गए थे।

जेल प्रवक्ता सुनील कुमार गुप्ता का कहना है कि यह बात ठीक है कि कैदियों की डयूटी में तैनात वार्डर, हेड वार्डर सहित अन्य स्तर के कर्मचारी अपने बच्चों की तरफ ध्यान नहीं दे पा रहे है जिसकी वजह से उनके बच्चों के लिए यह क्लास शुरू की गई है।

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