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निगम ने 124 जगहों पर रोका अवैध निर्माण

नई दिल्ली प्रमुख संवाददाता। उत्तरी दिल्ली नगर निगम ने करोलबाग क्षेत्र में 124 जगहों पर अवैध निर्माण पर रोक लगा दी। इन जगहों पर निर्माण दोबारा न शुरू हो जाए, इसके लिए स्थानीय पुलिस को भी इसकी सूची सौंपी गई है। वहीं, निगम ने 19 खतरनाक भवनों के स्वामियों को मरम्मत कराने का नोटिस भी जारी किया है।

शनिवार को इंद्रलोक में हुए हादसे के बाद से हरकत में आए नगर निगम ने आठ टीमों का गठन किया है। इन पर पूरे क्षेत्र में अवैध निर्माणों की पहचान करने का दायित्व सौंपा गया है। निगम अधिकारियों के मुताबिक अभी तक कुल मिलाकर 8798 संपत्तियों का सर्वे किया जा चुका है। इनमें से 124 जगहों पर चल रहे निर्माण कार्य को अधिकारियों ने अवैध पाया। इस पर इन सभी को तत्काल प्रभाव से काम रोकने का नोटिस दिया गया है। यहां पर निगम से नक्शा पास कराए बगैर धड़ल्ले से निर्माण किया जा रहा था।

पुलिस भी रखेगी निगाह: इंद्रलोक हादसे से सबक लेते हुए निगम ने इस बार जिन संपत्ति स्वामियों को काम रोकने का नोटिस दिया है, उसकी सूची स्थानीय पुलिस को भी सौंपी है। ताकि, दोबारा काम शुरू होने की स्थिति में तुरंत ही जानकारी हो सके। दरअसल, इन्द्रलोक में हादसे का शिकार हुई इमारत के बगल में चल रहे अवैध निर्माण को निगम ने नोटिस देकर रुकवा दिया था।

लेकिन, उक्त जगह पर बाद में चोरी-छिपे फिर से निर्माण शुरू हो गया। जिसके चलते इमारत भर-भराकर गिर गई और दस लोगों की मौत हो गई। 19 खतरनाक भवनों के स्वामियों को नोटिस: निगम ने देव नगर क्षेत्र में 19 खतरनाक भवनों की पहचान करके इनके मालिकों को मरम्मत कराने का नोटिस दिया है।

जबकि, पीएल रोड पर एक भवन स्वामी को इमारत के खतरनाक हिस्से को ध्वस्त करने को कहा गया। मुसीबत बन रहा मिली भगत का खेल:बिल्डर, पुलिस और निगम अधिकारियों की मिलीभगत के चलते हो रहे अवैध निर्माण आम लोगों के लिए जानलेवा साबित हो रहे हैं।

अवैध निर्माण पर निगाह रखने की जिम्मेदारी आमतौर पर पुलिस और निगम अधिकारियों पर होती है। लेकिन, रशि्वत लेकर पुलिस और निगम अधिकारी इस ओर से आंखे फेर लेते हैं।

सूत्रों की मानें तो कुछ इलाकों में एक छत डालने के लिए 50 हजार रुपये की घूस वसूली जाती है। जबकि, कुछ अन्य जगहों पर प्रति वर्ग गज हजार रुपये की घूस सामान्य तौर पर ली जाती है।

कार्रवाई न होने से हौसले बुलंद: जून महीने की पहली तारीख को सदर बाजार में निर्माणाधीन इमारत गिरने से तीन लोगों की मौत हो गई। जबकि, 28 जून को इंद्रलोक में हादसा हुआ। इन दोनों ही मामलों में निगम के दो-दो अधिकारियों को निलंबित किया गया। लेकिन, आमतौर पर मिलीभगत से जुड़े अन्य अधिकारी बच निकलते हैं। निलंबित हुए अधिकारी भी कुछ समय बाद बहाल हो जाते हैं। सख्त कार्रवाई नहीं होने के चलते अवैध निर्माण रोकने की दिशा में पूरी कार्रवाई नहीं हो पाती।

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