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अच्छे दिन, बुरे दिन

समय हर तरह का आता है, अच्छा भी और बुरा भी। अमूमन लोग खुशी आने पर इस कदर खो जाते हैं कि खुद को भी भूल जाते हैं और मुक्त पंछी की तरह हवा में उड़ने लगते हैं। वहीं दूसरी ओर, जब मुश्किल स्थिति का सामना करना पड़ता है, तो वे यह भूल जाते हैं कि यह तो अल्पकाल की परीक्षा है, जो जल्द ही खत्म हो जाएगी। जब दुनिया में कुछ भी स्थायी नहीं, तो हालात कैसे स्थायी रहेंगे? इन सबके साथ ही यह भी कहा जाता है कि ‘अच्छे वक्त में साथ देने के लिए हजार लोग मिल जाएंगे, परंतु बुरे वक्त में हौसला देने के लिए मुश्किल से ही एक भी मिलेगा।’ बस हमें बदलते हालात के साथ खुद को बदलने की कला सीखने की जरूरत है, तभी हम वक्त के साथ कदम से कदम मिलाकर चल पाएंगे। और तभी हम जीवन की बड़ी निराशाओं से बच सकेंगे।

जो व्यक्ति खुशहाल स्थिति में अधिक उत्साहित नहीं होता और दुखद स्थिति में ज्यादा उदास नहीं होता, वही सही मायने में एक स्थिर और सुरक्षित जीवन जी पाता है। हम जीवन के इस रंगमंच पर अभिनेता के रूप में अपनी भूमिका निभा रहे हैं, इसलिए हमें दोनों स्थितियों में (सुखद और दुखद) समान रूप से अपनी भूमिका निभानी है और हर प्रकार की स्थिति में संतुलन बनाए रखना हमारे लिए अनिवार्य है। यह अच्छे अभिनय की जरूरी शर्त है। हमारे लिए सबसे जरूरी यह है कि हम हर तरह के व्यर्थ और नकारात्मक विचारों और ऊर्जा से मुक्त हो जाएं। साथ ही यह याद रखना भी जरूरी है कि हमारा जीवन बहुत छोटा है, अत: यदि हम केवल सकल स्तर पर उपलब्ध जानकारियों को संचित करने में ही व्यस्त हो जाएंगे, तो हम शांति पाने के सूक्ष्म अनुभवों को महसूस करने में सक्षम नहीं हो पाएंगे। तो आइए आज से हम अपने जीवन में संपूर्ण आनंद और खुशी का अनुभव करने के लिए हर क्षण का सदुपयोग करने का प्रण लें।

 

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  • Web Title:अच्छे दिन, बुरे दिन