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अफगानिस्तान में अनिश्चितता

अफगानिस्तान में सदर के इंतिखाब और उसके नतीजे को लेकर संशय का माहौल बना हुआ है। इससे इस पूरे इलाके में जिंदगी जैसे ठहर-सी गई है। लोगों को यह नहीं मालूम कि उनके मुल्क का आगे क्या होगा और इसलिए उनके अंदर यह डर गहराने लगा है कि ऐसे हालात कहीं अस्थिरता और बेतरतीबी की हद तक न चले जाएं। इसमें कोई दोराय नहीं कि राजनीतिक अस्थिरता अर्थव्यवस्था पर बुरा असर डालती है। कारोबारी दुनिया और कारोबारी घरानों को वैसे हालात कतई पसंद नहीं आते, जिनमें कुछ भी यकीनी तौर पर न कहा जा सकता हो। हर निवेशक यह भरोसा चाहता है कि उसे उम्मीद के अनुसार मुनाफा हो और यह तभी मुमकिन हो सकता है, जब अफगानी समाज में स्थिरता और अमन-सुकून आए। चुनावी कवायद में मौजूदा गतिरोध के लिए कौन कसूरवार है, यह अलग बहस का मुद्दा है। फिलहाल चिंता की बड़ी बात यह है कि एक मुल्क के तौर पर हम उथल-पुथल भरे हालात की गिरफ्त में आ चुके हैं। इसलिए जरूरी है कि इससे जुड़े तमाम लोग और हुकूमत अवाम में यह भरोसा पैदा करें कि मौजूदा गतिरोध खत्म हो जाएगा और उन्हें जल्द से जल्द राहत मिल जाएगी। वरना हालात बेकाबू हो सकते हैं और जब तक  सियासतदानों के बीच आपसी सहमति बने, तब तक जनता अपनी जंग छेड़ चुकी होगी। अगर वक्त रहते हालात पर काबू पा लिया गया, तो इस क्षेत्र के दूसरे मुल्कों के साथ हमारे आर्थिक कामकाज में भी इजाफा होगा और अफगानिस्तान की अर्थव्यवस्था भी दुरुस्त होगी। बीते दिनों टुकड़े-टुकड़े में ऐसी कई खबरें आईं, जो यह बताती हैं कि मौजूदा हालात के कारण कारोबार चौपट हो रहे हैं। हेरात में कारोबारियों ने यह शिकायत दर्ज कराई है कि उनके उद्योग-धंधों को अटकी हुई चुनाव-प्रक्रिया से जबर्दस्त नुकसान पहुंचा है। इलाकाई कारोबारियों ने बताया है कि उनके कारोबार गए छह महीने की सबसे बड़ी गिरावट की ओर हैं। इस बाबत हेरात चैंबर ऑफ कॉमर्स ऐंड इंडस्ट्री ने भी चिंता जताई है। ऐसे में, इलेक्शन कमीशन और हुकूमत से यही दरख्वास्त है कि वे इस संकट से ईमानदारी और आपसी सहयोग के साथ तत्काल निपटें।
डेली आउटलुक, अफगानिस्तान

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