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वादे से दूर

केंद्र सरकार ने अपने सवा महीने के कार्यकाल में ऐसे कई कदम उठाए, जो महंगाई घटाने की जगह बढ़ाने वाले साबित हुए। और अब जनता यह महसूस कर रही है कि महंगाई बेलगाम हो चुकी है, क्योंकि एक तरह से हर चीज का दाम बढ़ गया है और यह आशंका बनी हुई है कि आगे भी दाम थमने नहीं जा रहे। केंद्र सरकार ने पहले रेल किराये और माल भाड़े में बड़ी वृद्धि की। फिर चीनी के आयात शुल्क में जबर्दस्त वृद्धि की गई, जिससे चीनी का खुदरा मूल्य दो से चार रुपये प्रति किलो तक बढ़ गया। इसके बाद पेट्रोल और डीजल के दाम भी बढ़ा दिए गए। गैर-रियायती सिलेंडरों के दाम में भी साढ़े सोलह रुपये की वृद्धि कर दी गई है। याद कीजिए, पहले यही भाजपा यूपीए की कमरतोड़ महंगाई के खिलाफ नारे बुलंद करती थी। लेकिन सत्ता में आते ही यह पार्टी अपने घोषणापत्र के अनुरूप महंगाई रोक नहीं पाई। हालांकि, किसी सरकार के लिए सवा महीने कम हैं, लेकिन इतने दिनों में महंगाई रोकने की दिशा में कुछ तो कदम उठाए ही जा सकते थे। 
गिरी, फरीदाबाद, हरियाणा

ऐसे ही होगा सुधार
मोदी सरकार की सख्ती अब मंत्रालयों तक पहुंच रही है। सूचना प्रसारण मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने हाल ही में एक औचक निरीक्षण में कई कर्मचारियों को दफ्तर से नदारद पाया। इससे पहले वेंकैया नायडू ने भी औचक निरीक्षण किया था और अपने दफ्तर में कुछ दिशा-निर्देश जारी किए थे। कुछ वक्त के लिए कर्मचारियों को यह सब बुरा लग सकता है। लेकिन देखा जाए तो एक बेहतर शासन के लिए ये सारे कदम ठीक ही हैं। बिना काम के कुछ नहीं मिलता। अगर सभी महकमों, विभागों और दफ्तरों में इसी तरह के निरीक्षण कराए जाएं, तो अधिकारियों पर कार्यशैली दुरुस्त करने का दबाव बन सकता है। उम्मीद की जानी चाहिए कि ये काम महज दिखावे के न हों, बल्कि सही में हों। मोदी सरकार की नीयत और नीति अभी तक तो ठीक है, क्योंकि स्वयं प्रधानमंत्री ने अनुशासन और संयम के साथ भाई-भतीजावाद से दूर रहकर जनता के लिए काम करने पर बल दिया है।
वेद मामूरपुर, नरेला, दिल्ली

सच्चाई समझे सरकार
मोदी सरकार अब तक यही गलतफहमी पाले बैठी है कि जनता ने उसको वोट विकास और गुड गवर्नेंस के नाम पर दिया है, जबकि हकीकत यह है कि जनता पुरानी सरकार के एक खास तबके पर मेहरबान होने की नीति से उब चुकी थी और उसे यह डर सताने लगा कि कहीं इस बहाने देश में असंतुलन का बोलबाला न हो जाए। इसलिए यह चुनाव भेदभाव के सिद्धांत के खिलाफ था। इसलिए एक समुदाय ने मोदी में अपना विश्वास प्रकट किया। दूसरी बात, जम्मू-कटरा रेल मार्ग और इसरो द्वारा उपग्रह प्रक्षेपण कार्यक्रम पिछली सरकार की उपलब्धियां हैं, जिनको तीस दिन पहले सत्ता में आई मोदी सरकार अपनी कामयाबी बता रही है। और रेल किराये और माल भाड़े में इजाफा को पिछली सरकार की गलतियों का परिणाम बताना भी मोदी सरकार की भूल है।
एल पी श्रीवास्तव, भोपा रोड, मुजफ्फरनगर, उत्तर प्रदेश

इराक में फंसे भारतीय
इराक संकट ने भारत के सामने विदेशी मामले में एक चुनौती पेश कर दी है। अगर वहां ‘इस्लामिक स्टेट ऑफ इराक ऐंड सीरिया’ आतंकी संगठन का कब्जा बढ़ता गया, तो वहां रह रहे भारतीयों का सबसे अधिक नुकसान होगा, क्योंकि जैसी खबरें आ रही हैं, उनके मुताबिक विदेशी लोगों को वे बंधक बना रहे हैं और कई भारतीय वहां कारोबार और रोजगार के लिए गए हुए हैं। अब भी कुछ भारतीय आतंकियों के कब्जे में हैं और कुछ वहां के हालात से बेहद घबराए हुए हैं। इसलिए भारत सरकार को इराक हुकूमत से इसके मद्देनजर बात करनी होगी, ताकि भारतीयों की सुरक्षा-व्यवस्था का पुख्ता बंदोबस्त हो सके।
गणेश शंकर, करोलबाग, दिल्ली

 

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