DA Image

अगली स्टोरी

class="fa fa-bell">ब्रेकिंग:

कृषि प्रधान उत्तरी राज्यों में अभी स्थिति खराब नहीं

मानसून के आगमन में देरी, कम बारिश की आशंका, इससे होने वाले नुकसान और निपटने के उपायों को लेकर भारतीय मौसम विभाग के महानिदेशक डॉ. लक्ष्मण सिंह राठौर से बातचीत

देर से आए मानसून से क्या-क्या नुकसान हो सकता है?
मध्य भारत और पूर्वी हिस्से में इससे नुकसान हुआ है। फसलों की बुवाई समय पर नहीं हो पाई, लेकिन मुझे नहीं लगता कि उत्तर-पश्चिम भारत में ज्यादा देर हुई है। यदि अनुमान के अनुसार एक दो दिनों में मानसून रफ्तार पकड़ लेता है तो फिर उत्तर-पश्चिमी राज्य उत्तर प्रदेश, पंजाब, हरियाणा, उत्तराखंड और अन्य पहाड़ी राज्य आसानी से खेती के कार्य को अंजाम दे सकते हैं।

आगे भी कम बारिश की आशंका है?
हमने सामान्य से सात फीसदी कम यानी 93 फीसदी बारिश की संभावना बताई है। मतलब यह कि सामान्य मानसून में 890 मिमी बारिश होती है, इस बार यह 827 मिमी ही हो पाएगी। मानसूनी बारिश की यह कमी बहुत ज्यादा नहीं है। राहत की बात यह है कि जुलाई-अगस्त में अलनीनो पैदा होने की आशंका भी अब कमजोर पड़ने लगी है।

क्या कमजोर मानसून से नुकसान होगा?
हमने इसके देर से आने और कमजोर रहने की सूचना समय पर दे दी थी। सरकार ने भी त्वरित कदम उठाए हैं। इसलिए संभावित नुकसान की भरपाई करने के लिए एजेंसियां सक्रिय हो गई हैं। कोशिश यह है कि आम आदमी को इसकी कीमत न चुकानी पड़े।

क्या मानसून का विकल्प क्लाउड सीडिंग यानी कृत्रिम बारिश संभव है?
नहीं। बात तकनीक की नहीं है, क्लाउड सीडिंग हर जगह संभव नहीं है। इसके लिए आसमान में बादल चाहिए। बड़े-बड़े देश इसे इस्तेमाल नहीं कर पा रहे हैं, क्योंकि यह बहुत खर्चीली प्रक्रिया है, इतने बड़े देश में करा पाना तो और भी मुश्किल है।

 

  • Hindi Newsसे जुडी अन्य ख़बरों की जानकारी के लिए हमें पर ज्वाइन करें और पर फॉलो करें
  • Web Title:कृषि प्रधान उत्तरी राज्यों में अभी स्थिति खराब नहीं