DA Image

अगली स्टोरी

class="fa fa-bell">ब्रेकिंग:

खुदरा कारोबार क्षेत्र के लिये नियामक बनाने की मांग

खुदरा कारोबार क्षेत्र के लिये नियामक बनाने की मांग

छोटे व्यापारियों ने खुदरा क्षेत्र में बड़े औद्योगिक घरानों के प्रवेश के मद्देनजर बाजार में स्वस्थ प्रतिस्पर्धा सुनिश्चित करने के लिए आम बजट में इस क्षेत्र पर एक विनियामक गठित करने की मांग की है।

व्यापारियों के अखिल भारतीय संगठन कन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स के राष्ट्रीय महासचिव प्रवीन खंडेलवाल ने कहा कि खुदरा कारोबार क्षेत्र में स्वस्थ प्रतिस्पर्धा के लिये एक स्वतंत्र नियामक प्राधिकरण बनाया जाना चाहिये।

उन्होंने कहा कि खुदरा कारोबार में रिलायंस, टाटा सहित अनेक बड़ी कंपनियों के उतरने के बाद छोटे और मझोले व्यापारियों के लिये प्रतिस्पर्धा में टिके रहना काफी मुश्किल हो गया है। बड़ी कंपनियों के हथकंडों पर अंकुश लगाने और छोटे व्यापारियों को उनके कारोबार में बनाये रखने के लिये नियामक प्राधिकरण बनाना आवश्यक हो गया है।

खंडेलवाल से जब आगामी बजट से उनकी उम्मीदों के बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा कि वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) जल्द लागू किया जाना चाहिये और इसके लिये एक ही प्राधिकरण होना चाहिये। इसे स्पष्ट करते हुये उन्होंने कहा कि जीएसटी के तहत दोहरी कर प्रणाली की बात की जा रही है, जिसमें एक केन्द्रीय जीएसटी और दूसरा राज्य जीएसटी रखने की बात की जा रही है, लेकिन इसके लिये एक ही प्राधिकरण बनाया जाना चाहिये।

बहुब्रांड खुदरा क्षेत्र में बहुराष्ट्रीय कंपनियों को अनुमति दिये जाने विरोध करता रहा है। सरकार ने बहु ब्रांड खुदरा बाजार में विदेशी कंपनियों कुछ शर्तों के साथ 51 प्रतिशत तक की विदेशी भागीदारी वाला और एक ब्रांड में 100 प्रतिशत विदेशी भागीदारी वाला कारोबार करने की अनुमति दे दी है।

खंडेलवाल ने यह भी कहा कि व्यापारियों को कर्ज मिलने में काफी परेशानी होती है। व्यापारियों को आसानी से कर्ज उपलब्ध हो, इसकी व्यवस्था की जानी चाहिये।

उन्होंने कहा कि थोक और खुदरा व्यापारियों को आधुनिक और प्रतिस्पर्धी बनाने के लिये सरकार को एक नीति बनाकर उन्हें प्रोत्साहन देना चाहिये। छह करोड़ व्यापारियों के छोटे कारोबार में कंप्यूटरीकरण के लिये बजट में प्रोत्साहन दिया जाना चाहिये।

  • Hindi Newsसे जुडी अन्य ख़बरों की जानकारी के लिए हमें पर ज्वाइन करें और पर फॉलो करें
  • Web Title:खुदरा कारोबार क्षेत्र के लिये नियामक बनाने की मांग