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सनसनीखेज हार के साथ बाहर नडाल

सनसनीखेज हार के साथ बाहर नडाल

तीसरी बार विंबलडन खिताब जीतने के लक्ष्य के साथ खेल रहे विश्व के नंबर एक खिलाड़ी स्पेन के राफेल नडाल को पुरुष एकल के चौथे राउंड में 19 वर्षीय ऑस्ट्रेलियाई वाइल्डकार्ड धारक निक किर्गियोस के हाथों सनसनीखेज हार का सामना करना पड़ा है।
   
पहले से ही एकतरफा माने जा रहे चौथे राउंड के मुकाबले में एक ओर विश्व के नंबर एक खिलाड़ी नडाल थे तो दूसरी ओर 144वीं रैंक के किर्गियोस। लेकिन वाइल्डकार्ड युवा खिलाड़ी ने बिना किसी चिंता के अपना बेहतरीन प्रदर्शन करते हुए दो घंटे 58 मिनट तक चले मुकाबले में 37 एस लगाकर दूसरी सीड नडाल को 7-6, 5-7,  7-6, 6-3 से चौंकाते हुए टूर्नामेंट से बाहर का रास्ता दिखा दिया।
    
टॉप सीड खिलाड़ियों में सेरेना विलियम्स और मारिया शारापोवा के हार के बाहर होने के बाद नडाल की स्वदेश वापसी बेहद चौंकाने वाली हैं। वर्ष 1992 के बाद यह पहली बार है जबकि 100वीं रैंक से बाहर के किसी खिलाड़ी ने नंबर एक खिलाड़ी को पराजित किया हो। किर्गियोस ने मैच के बाद कहा कि मैंने मैच में असाधारण प्रदर्शन किया। इससे पहले किर्गियोस रिचर्ड गास्के के खिलाफ तीसरे दौर में जीत दर्ज कर चुके हैं और उन्होंने इस दौरान नौ मैच अंक भी बचाये थे जो उनका सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन है।
   
मैच समाप्ति के बाद स्टेडियम में बैठे दर्शकों ने युवा ऑस्ट्रेलियाई खिलाड़ियों के लिए जमकर तालियां बजाई जिन्होंने 2008 और 2010 के विंबलडन चैंपियन को बाहर जाने के लिए मजबूर कर दिया।
    
पुरुष एकल के अन्य अहम मुकाबलों में पांचवीं सीड स्विट्जरलैंड केस्टेनिसलास वावरिंका ने 19वीं सीड स्पेन के फेलिसियानो लोपेज को 7-6, 7-6, 6-3 से हराकर अगले दौर का टिकट कटाया। मैच के दौरान नेट पर दोनों खिलाड़ियों के बीच गरमा गरम बहस भी चर्चा का विषय रही।
    
शीर्ष वरीय खिलाड़ियों में घर जाने वालों में जापान के केई निशिकोरी का नाम भी जुड़ गया। आठवीं सीड कनाडा के मिलोस राओनिक ने 10वीं सीड निशिकोरी को चार सेटों तक चले मुकाबले में 4-6, 6-1, 7-6, 6-3 से हराया। राओनिक के लिए यह जीत इस लिहाज से अहम थी कि वह कनाडा के पहले पुरुष खिलाड़ी हैं जो विंबलडन के क्वार्टरफाइनल में पहुंचे हैं।    
     
ग्रैंड स्लेम विंबलडन टूर्नामेंट में दूसरा मंगलवार आमतौर पर महिलाओं के क्वार्टरफाइनल मैचों से व्यस्त रहता है लेकिन वर्षा के कारण इस बार दो ही मैच हो सके और चेक गणराज्य की दोनों महिलायें 2011 की चैंपियन पेत्रा क्वीतोवा तथा लुसी सफारोवा अपने-अपने क्वार्टर फाइनल मुकाबले जीतकर सेमीफाइनल में प्रवेश कर गई। 
    
छठी सीड चेक खिलाड़ी क्वीतोवा ने हमवतन बारबोरा जालावो वास्ट्रीकोवा को लगातार सेटों में 6-1, 7-5 से हराया जबकि 23वीं सीड चेक खिलाड़ी लुसी सफारोवा ने 22वीं सीड रूस की एकातेरीना माकारोवा को 6-3, 6-1 से हराकर सेमीफाइनल में प्रवेश किया।

दो चेक खिलाड़ियों के सेमीफाइनल में पहुंचने से अब एक चेक महिला का फाइनल में प्रवेश तय है। वर्ष 1968 के बाद यह पहली बार है जब चेक गणराज्य की तीन महिला खिलाड़ियों ने एक साथ विंबलडन के क्वार्टरफाइनल में प्रवेश किया है। 
     
सेमीफाइनल में अब क्वीतोवा और सफारोवा के बीच मुकाबला देखने को मिलेगा। हालांकि 24 वर्षीय और छठी सीड कवीतोवा पर जीत दर्ज करने के लिए सफारोवा को अधिक मेहनत करनी होगी। दोनों खिलाड़ी एक दूसरे के खिलाफ कुल पांच बार खेल चुकी हैं जिसमें क्वीतोवा ने हर बार जीत दर्ज की है।
     
इससे पहले पुरुषों में नडाल की वाइल्डकार्ड धारी खिलाड़ी के हाथों हार ने सभी को चौंका दिया। हालांकि इससे पहले विश्व रैंकिंग में टॉप 100 से बाहर के खिलाड़ियों में लुकास रोसोल और स्टीव डार्सिस भी नडाल को हरा चुके है। 14 बार के ग्रैंड स्लेम चैंपियन नडाल ने अपनी इस हैरतअंगेज हार के बाद कहा कि जब आप यहां आते हैं तो आपके लिए हर चीज नई होती है और खोने के लिए कुछ नहीं होता। देखते हैं कि किर्गियोस आगे इस प्रदर्शन को जारी रख पाते हैं या नहीं। लेकिन मैं उन्हें भविष्य के लिए शुभकामनायें देना चाहता हूं।
     
इस मैच को देखने के बाद तीन बार के विंबलडन चैंपियन जान मैकनोर ने कहा कि किर्गियोस का करियर अभी शुरू हुआ है और नडाल के खिलाफ वह जिस तरह से खेल रहे थे कौन जानता है कि वह भविष्य में कहां तक पहुंचे। मुझे तो उन्हें देखकर लग रहा था कि वह पूरा टूर्नामेंट जीत सकते हैं। आखिरी बार मैंने बोरिस बेकर के रूप में ऐसा उर्जावान खिलाड़ी देखा था।

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