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आईआईएम में गीता ज्ञान

आईआईएम में गीता ज्ञान

दौर आईआईएम के स्टूडेंट्स को कोर्स में नया सिलेबस मिला है, ये है गीता ज्ञान का। दिलचस्प बात यह है कि यह फैसला उस वक्त लिया गया, जब स्टार प्लस पर आने वाले सीरियल में भी गीता ज्ञान का एपिसोड दिखाया जा रहा था। जीवन में आने वाली कठिन चुनौतियों से कैसे मुकाबला किया जाए, इसका फॉर्मूला गीता ज्ञान से मिलता है, ऐसा मानना है आईआईएम के प्रोफेसर्स का और इस काम के लिए इन प्रोफेसर्स ने मदद ली दुनिया भर में श्रीकृष्ण मंदिरों को बनवाने वाली संस्था इस्कॉन की। इस कोर्स में हिस्सा लेना जरूरी नहीं है, पर इस कोर्स के लिए 70 स्टूडेंट्स ने अपनी इच्छा जताई है।

गीता ज्ञान के कोर्स को दस सैशंस में बांटा गया है। इस कोर्स के दौरान गीता के थ्योरिटिकल ज्ञान के बाद इस बात पर चर्चा होगी कि जिंदगी और करियर की राहों में किसी भी तरह की मुश्किल से निपटने में, उसका हल निकालने में गीता कैसे मदद कर सकती है। इस कोर्स के बाद स्टूडेंट्स को कहा जाएगा कि वो खुद की पर्सनेलिटी की समीक्षा करें और खुद को अंक दें।

पुणे यूनिवर्सिटी ने दिया 71 कॉलेजों को झटका
नागपुर यूनिवर्सिटी के बाद अब पुणे यूनिवर्सिटी ने तमाम कॉलेजों के प्रबंधन को जोर का झटका दिया है। एक साथ पूरे 71 कॉलेजों की संबद्धता यूनिवर्सिटी से खत्म कर दी गई है। नागपुर यूनिवर्सिटी ने हाल ही में ऐसा ही कडम कदम उठाया था और अचानक बहुत से कॉलेजों की मान्यता खत्म कर दी थी, उसके उलट पुणे यूनिवर्सिटी ने साइंटिफिक तरीके से बाकायदा एक कमेटी बनाई, जिसने कड़ाई से यूनिवर्सिटी के संबद्धता नियमों की समीक्षा करते हुए एक साथ 71 कॉलेजों की मान्यता खत्म करने की अनुशंसा की। कोई कॉलेज केवल दो कमरों में चल रहा था तो कोई महीनों से बिना प्रिंसिपल के चल रहा था, किसी कॉलेज में हाईस्कूल लैवल जैसी लैब तक की सुविधाएं भी नहीं थीं तो कई कॉलेज इन्फ्रास्ट्रक्चर की शर्ते पूरी करने में नाकाम रहे थे। इस फैसले को लेकर पुणे के राजनैतिक हलकों में जबरदस्त हलचल है। इसकी वजह भी है, तमाम मान्यता रद्द किए गए कॉलेज राजनैतिक परिवारों से सम्बंधित हैं। इधर यूनिवर्सिटी प्रशासन इस बात में व्यस्त है कि कैसे इन कॉलेजों के स्टूडेंट्स को पास ही के किसी कॉलेज में एडमिशन दिया जाए।

कानपुर आईआईटी को मिली ऑब्जरवेटरी
कानपुर का आईआईटी ऐसा पहला एजुकेशनल इंस्टीटय़ूट बन गया है, जिसमें अपनी ऑब्जरवेटरी होगी। अब आईआईटी के स्टूडेंट्स आकाश गंगा को, सूर्य एवं चंद्रग्रहण को और समय-समय पर आकाश में घटने वाली घटनाओं को बारीकी से देख सकेंगे। इसके लिए अमेरिका से टेलीस्कोप और दूसरे उपकरण आयात किए गए हैं। आईआईटी कानपुर में पहले से ही स्टूडेंट्स ने एक एस्ट्रोनॉमी क्लब बना रखा है। टेलीस्कोप व बाकी उपकरणों को आने के दस दिन के अंदर एसेंबल कर दिया गया। ऑब्जरवेटरी पूरी तरह कम्प्यूटराइज्ड है और इसका एक यूजर नेम व पासवर्ड बनाया गया है, जिसके जरिए पूरी दुनिया में टेलीस्कोप के डेटा को एक्सेस किया जा सकेगा।

टॉवर्स की फ्यूल सेविंग तकनीक
देश भर में लाखों की संख्या में मोबाइल टॉवर्स लगे हुए हैं, देश का छोटे से छोटा शहर इनसे अछूता नहीं है। उतना ही बड़ा सच ये है कि इन लाखों टॉवर्स से सिग्नल लेते रहने के लिए हरदम बिजली की जरूरत रहती है और इनसे जुड़े जेनरेटर रोज लाखों लीटर डीजल पी जाते हैं। अब मुंबई आईआईटी के स्टूडेंट्स ने ढूंढा है वह तरीका, जिससे मोबाइल टॉवर्स के लिए खपत होने वाले ईंधन में कमी आएगी। आईआईटी की इस टीम का मानना है कि शुरुआती एक्सपेरिमेंट में ही कम से कम दस प्रतिशत तक डीजल की खपत कम हो सकती है।
     
अगर ऐसा मुमकिन हो पाया तो सालाना कम से कम 2000 करोड़ रुपए की बचत की जा सकेगी। मुंबई आईआईटी में टाटा टेलीसर्विसेज आईआईटी बॉम्बे सेंटर ऑफ एक्सीलेंस इन टेलीकॉम से जुड़े रिसर्चर्स ने इस प्रोजेक्ट पर खासी मेहनत की है। इस सेंटर से सरकार की टेलीकॉम मिनिस्ट्री भी जुड़ी हुई है। इस सेंटर की तमाम बड़ी सेलुलर कंपनियों से बात चल रही है और उनका अनुमान है कि साल के अंत तक करीब पचास हजार मोबाइल टावर्स में उनकी टेक्नोलॉजी फिट हो जाएगी।

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