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भारत-पाक क्रिकेट की बहाली विचार विमर्श के बाद ही : खेलमंत्री

भारत-पाक क्रिकेट की बहाली विचार विमर्श के बाद ही : खेलमंत्री

भारत-पाक द्विपक्षीय क्रिकेट संबंधों की बहाली की संभावना पर कोई सीधा जवाब नहीं देते हुए खेलमंत्री सर्वानंद सोनोवाल ने कहा है कि इस मसले पर काफी विचार विमर्श की जरूरत है हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि खेल को राजनीति से परे होना चाहिए।
    
बीसीसीआई ने पीसीबी के साथ 2015 से 2023 तक छह द्विपक्षीय सीरीज़ खेलने के करार पर हस्ताक्षर किये हैं। पाकिस्तान ने 2012 के आखिर में छोटी वनडे सीरीज़ के लिए भारत का दौरा किया था लेकिन दोनों देशों के बीच 2008 के मुंबई आतंकी हमले के बाद संपूर्ण द्विपक्षीय सीरीज़ नहीं खेली गई है। भारत ने आखिरी बार 2006 में पाकिस्तान का दौरा किया था।
      
यह पूछने पर कि क्या पाकिस्तान के साथ सीरीज अगले साल संभव है चूंकि यह सरकार की मंजूरी पर निर्भर होगी, सोनोवाल ने कहा कि इस मसले पर बात की जायेगी।
     
उन्होंने इंटरव्यू में कहा कि निश्चित तौर पर इस मसले पर काफी विचार विमर्श की जरूरत है। मेरा मानना है कि खेलों को विवादों और राजनीति से परे होना चाहिए। हम दूसरे देशों के साथ खेलों के जरिये अच्छे संबंध बना सकते हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने शपथ ग्रहण समारोह में पाकिस्तान समेत सार्क देशों के सभी प्रमुखों को बुलाया था जो अच्छा संकेत है।
      
असम से सांसद सोनोवाल ने कहा कि खेलों के जरिये सकारात्मक उर्जा का संचार होना चाहिए। फिलहाल मैं इतना ही कह सकता हूं कि पहले हमें इस मसले पर बात करने दीजिये। बातचीत के दरवाजे हमेशा खुले हैं।

एशियाई खेल 2019 की मेजबानी की दावेदारी के बारे में पूछने पर सोनोवाल ने कहा कि इस पर एक या दो दिन में फैसला लिया जाएगा। उन्होंने कहा कि हमने आईओए से विस्तत प्रस्ताव भेजने के लिए कहा था जो हमें अभी तक नहीं मिला है। मैं खेल सचिव से इस पर बात करूंगा। आईओए ने प्रधानमंत्री को भी पत्र लिखा है। हम इस पर बात करेंगे और एक या दो दिन में फैसला ले लेंगे।
      
खेल मंत्रालय राष्ट्रीय खेल महासंघों की स्वायत्ता से समझौता किये बिना उन्हें जवाबदेह बनाने की व्यवस्था पर भी विचार कर रहा है।
     
खेलमंत्री ने कहा कि उनकी स्वायत्ता रहनी चाहिए लेकिन उन्हें देशवासियों की अपेक्षाओं पर भी खरा उतरना होगा। जवाबदेही जरूर है। अनुशासन, ऊंचे मानदंड बनाए रखना और लोकतांत्रिक प्रक्रिया का पालन करना जरूरी है। हमें इस पर ध्यान रखना होगा।
     
उन्होंने कहा कि खेलों को विवादों, भ्रष्टाचार और अनियमितताओं से परे रखना चाहिए। देशवासी भी यही चाहते हैं। पिछली यूपीए सरकार के कार्यकाल में लंबित खेल विधेयक के बारे में पूछने पर उन्होंने कहा कि इस पर भी बात करने की जरूरत है।
     
सोनोवाल ने कहा कि हमें खेल विधेयक पर नए सिरे से बात करनी होगी। मैं विस्तार में नहीं जाना चाहता लेकिन संबंधित सभी पक्षों से बात की जाएगी। वह बीसीसीआई समेत सभी राष्ट्रीय खेल महासंघों से समन्वय के पक्षधर भी हैं। उन्होंने कहा कि मेरा मंत्रालय सभी एनएसएफ के साथ अच्छे संबंध रखना चाहता है। मेरा भरोसा आपसी सहयोग में है, लड़ाई में नहीं।
     
उन्होंने वित्तमंत्री अरूण जेटली से भी आम बजट में खेलों के लिए आवंटन बढ़ाने का आग्रह किया है। सोनोवाल ने कहा कि हमारा लक्ष्य रियो ओलंपिक में अधिक पदक लाना है और मंत्रालय 100 फीसदी प्रयास करेगा। मैंने वित्त मंत्री से बजट में खेलों के लिए आवंटन बढ़ाने का भी अनुरोध किया है। फिलहाल हमारा फोकस राष्ट्रमंडल और एशियाई खेल है लेकिन ओलंपिक की तैयारियों के लिए भी कई योजनायें बनाई जाएंगी।
      
उन्होंने कहा कि भारत मुक्केबाजी, निशानेबाजी, बैडमिंटन और तीरंदाजी जैसे खेलों में पदक का प्रबल दावेदार है और मंत्रालय प्रतिभा तलाश योजना जल्दी ही शुरू करके इनमें जमीनी स्तर से प्रतिभाओं को तलाशकर तैयार करेगा। उन्होंने कहा कि सिर्फ खिलाड़ियों ही नहीं बल्कि कोचों और ट्रेनरों को भी प्रशिक्षण दिया जाएगा।
    
उन्होंने कहा कि हमें देश में खेल संस्कृति का विकास करना है और खेलों में उत्कष्ट प्रदर्शन हमारी प्राथमिकता है। हम खेलों को शैक्षणिक पाठयक्रम में भी जोड़ना चाहते हैं ताकि इसे राष्ट्रनिर्माण की प्रक्रिया का हिस्सा बनाया जा सके। भारत में प्रतिभा की कमी नहीं है और हमारा लक्ष्य भारत को खेल की महाशक्ति बनाना है।

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