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मुआवजा प्रस्ताव ऊंट के मुंह में जीरा

सुप्रीम कोर्ट की फटकार के बावजूद दवाओं के परीक्षण के दौरान मौत या स्थायी विकलांगता पर सरकार ने मुआवजे की जिस राशि का प्रस्ताव रखा है, वह दूसरे देशों की तुलना में ऊंट के मुंह में जीरे जैसा ही है। विशेषज्ञों को भी सरकार का यह प्रस्ताव रास नहीं आ रहा है।

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने क्लिनिकल ट्रायल के दौरान मौतों एवं विकलांगता के मुआवजा प्रदान करने का फॉर्मूला तैयार किया है। इसमें स्थायी विकलांगता पर महज 6.4 लाख रुपये का मुआवजा तय किया गया है। जबकि अमेरिका में ऐसे ही मामलों में प्रति व्यक्ति न्यूनतम मुआवजा तीन लाख डॉलर यानी करीब 1.80 करोड़ है। जबकि गरीब देश नाइजीरिया में फाइजर ने 84 लाख का मुआवजा अदा किया। मामले की सुनवाई सुप्रीम कोर्ट में चल रही है, इसलिए मंत्रालय ने इसका ब्योरा कोर्ट को भी दिया है। हालांकि जो फॉर्मूला मंत्रालय ने तैयार किया है, वह विशेषज्ञों के गले नहीं उतर रहा है।

इसके तहत मृत्यु पर अधिकतम आठ लाख मुआवजा दिया जाएगा और सौ फीसदी विकलांगता पर आठ लाख का 80 फीसदी मुआवजा दिया जा सकता है। इसका मतलब यह हुआ कि सौ फीसदी विकलांगता में पीड़ित को अधिकतम 6.4 लाख मिलेगा। मंथली इंडेक्स ऑफ मेडिकल स्पीसियलिटीज (मिम्स) के संपादक डॉ. सी. एम. गुलाटी ने कहा कि ऐसी मौतों के मामले में पूरी दुनिया में जो फॉर्मूला अपनाया जाता है, वह उसी तरह होता है जैसे मोटर दुर्घटना के मामले में होता है। डॉ. गुलाटी के अनुसार स्वास्थ्य मंत्रालय में चार सदस्यीय समिति ने दवा कंपनियों के हितों को ध्यान में रखकर फॉर्मूला तैयार किया है। समिति में मुआवजे के मामलों का विशेषज्ञ नहीं था। चारों डॉक्टर थे। इससे ट्रायल के चलते रोगी बने लोगों का भला नहीं हो सकता है।

मंत्रालय की योजना
- जिन पर दवा परीक्षण होंगे, उनका ब्योरा एक विशेष वेबसाइट पर होगा।
- मरीज से परीक्षण की अनुमति स्थानीय भाषा में ली जाएगी। उसकी वीडियोग्राफी की जाएगी।
- पर्याप्त इंतजाम वाली जगहों पर परीक्षण होंगे।
- मुआवजा उन्हीं मामलों में होगा जिनमें दवा के दुष्प्रभाव से मरीज की मौत हो या वह किसी विकृति का शिकार हुआ हो।
- मरीज को परीक्षण वाली दवा से फायदा नहीं होने पर उपचार का खर्च दवा कंपनी को उठाना होगा।
- मोटे तौर पर छह सौ मरीज दवा परीक्षणों की भेंट हर साल चढ़ रहे हैं।
- भारत में तीन हजार दवाओं के क्लिनिकल ट्रायल चल रहे हैं। इनमें से करीबन सभी विदेशी दवा कंपनियों द्वारा कराए जा रहे हैं।

परीक्षणों को लेकर आपत्तियां:
- बिना अनुमति के परीक्षण
- अल्प चिकित्सा सुविधा वाले क्षेत्रों में परीक्षण
- मरीजों को चिकित्सा सुविधाए नहीं देना
- विकृति या मौत पर मुआवजा नहीं देना 

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